मस्तिष्क की चोट के कारण और उपचार। Brain Injury in Hindi

जनवरी 25, 2020 Brain Diseases 14755 Views

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Brain Injury Meaning in Hindi

मस्तिष्क की चोट की समस्या मनुष्य के जीवन को अधिक प्रभावित करती है। इसमें व्यक्ति को अनेको तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है, जैसे कुछ लोग मस्तिष्क की चोट के कारण पार्किसन रोग के शिकार हो सकते है। इसके अलावा किसी तरह के दुर्धटना होने से व्यक्ति के मस्तिष्क को गंभीर रूप से क्षति पहुंचती है। व्यक्ति के अधिक शराब व नशीले पदार्थ का उपयोग करने से मस्तिष्क को बहुत नुकसान पहुंचता है, इस वजह से बहुत से लोग मस्तिष्क के संक्रमण, अचानक हिंसक व्यवहार जैसे लक्षण नजर आने लगते है। हालांकि मस्तिष्क पर गंभीर रूप से चोट लगने से कुछ लक्षण नजर आ सकते है। जिनमे कोमा, बेहोशी, दौरा, अंधापन, सिरदर्द आदि शामिल है। मस्तिष्क की चोट का कारण जानने के लिए चिकिस्तक सिटी स्कैन, एमआरआई स्कैन कर सकते है। जैसा की आपको पता है की मस्तिष्क के चोट लगने पर तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया जाता है ताकि उचित उपचार हो सके। कुछ मामले में सर्जरी करने की जरूरत पड़ सकती है और कुछ लोगो में हल्की सिर की चोट अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन अत्यधिक सिर की चोट व्यक्ति के मृत्यु का कारण बनता है। चलिए इस लेख में आपको सिर में चोट लगने से होने वाली समस्याओं के बारे में विस्तार से बतायेंगे।

  • मस्तिष्क की चोट के प्रकार ? (Types of Brain Injury in Hindi)
  • मस्तिष्क की चोट के कारण क्या है ? (What are the Causes of Brain Injury in Hindi)
  • मस्तिष्क की चोट के लक्षण क्या है ? (What are the Symptoms of Brain Injury in Hindi)
  • मस्तिष्क की चोट का उपचार क्या है ? (What are the Treatments for Brain Injury in Hindi)
  • मस्तिष्क की चोट से बचाव कैसे करें ? (Prevention of Brain Injury in Hindi)

मस्तिष्क की चोट के प्रकार ? (Types of Brain Injury in Hindi)

मस्तिष्क के चोट लगने के मुख्य रूप से दो प्रकार है। जिसमे आंतरिक चोट व बाहरी चोट शामिल है।

  • आंतरिक चोट यानी मस्तिष्क में रक्तश्राव होना, ट्यूमर, गंभीर चोट आदि शामिल है।
  • बाहरी चोट यानि आधात पहुंचना सिर को झटका लगने से हो सकता है। इसके अलावा चोट से व्यक्ति सदमा या कोमा में चला जाता है।

मस्तिष्क की चोट के कारण क्या है ? (What are the Causes of Brain Injury in Hindi)

मस्तिष्क में चोट लगने के अनेको कारण हो सकते है।

  • अगर मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी अधिक समय से हो रही है तो, यह मस्तिष्क को क्षति पहुंचाने का कारण बनता है। इसके अलावा किसी बीमारी के कारण मस्तिष्क को क्षति हो सकता है।
  • बाहरी चोट लगने के कुछ निम्न कारण हो सकते है।
  • जैसे: खेल में चोट लगना चाहे क्रिकेट, फुटबॉल, वॉलीबाल, मुक्केबाज आदि हो।
  • ऑक्सीडेंट होने पर किसी को भी चोट लग सकती है चाहे बच्चा हो या वयस्क।
  • हिंसा होने या पथराव व गोली बारी होने से सिर में चोट लगने का खतरा बना रहता है।
  • कुछ विस्फोट होने से मस्तिष्क को बाहरी चोट का खतरा बना रहता है।
  • मस्तिष्क में चोट के अन्य कारण में शामिल है।
  • दिल का दौरा पड़ना।
  • ट्यूमर होना।
  • संक्रमण किसी तरह का रहना।
  • नशीले पदार्थ का अधिक सेवन।

मस्तिष्क की चोट के लक्षण क्या है ? (What are the Symptoms of Brain Injury in Hindi)

मस्तिष्क के चोट लगने से विभिन्न तरह के लक्षण नजर आते है।

  • सिरदर्द होना।
  • लकवा मार देना।
  • बेहोशी आ जाना। (और पढ़े – मिर्गी के लक्षण)
  • उल्टी आना।
  • बोलने में परेशानी होना।
  • शरीर का सुन्न हो जाना।
  • देखने में चीजे धुंधली नजर आना।
  • चक्कर आ जाना। (और पढ़े – चक्कर दूर करने के घरेलु उपाय)
  • रक्तचाप में कमी या बढ़ जाना।
  • श्वास लेने में समस्या होना।
  • मूत्र की मात्रा बढ़ जाना।
  • चेहरे की मांसपेशियो की कमजोरी।

मस्तिष्क की चोट का उपचार क्या है ? (What are the Treatments for Brain Injury in Hindi)

  • मस्तिष्क की चोट अगर सामान्य है तो कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। यदि गंभीर रूप लगी है तो ऐसे में अस्पताल में भर्ती करवाया जाता है। ऐसे में व्यक्ति को ठीक होने में कुछ महीने लग जाते है। जैसे आपातकालीन की स्थिति होने पर मस्तिष्क की जांच की जाती है। मस्तिष्क की वायुमार्ग खुली तो नहीं है। श्वास की जांच की जाती है। रक्त के बहाव को रोका जाता है। हड्डी यानि गर्दन को स्थिर किया जाता है। दर्द को कम करने के लिए दवा दिया जाता है। हड्डिया टूटी है तो उसे प्लास्टर चढ़ाया जाता है। हृदय गति, रक्तचाप व ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करते है।
  • कुछ मामलो में अगर व्यक्ति चोट से विकलांग हो जाता है और दर्द को कम करने के लिए कुछ दवाइयों की सलाह लेने को देते है। जैसे कोमा में गए व्यक्तियों को अस्थाई कोमा में रखने की दवा देते है।
  • मस्तिष्क के ऊतकों को किसी तरह का नुकसान होता है तो चिकिस्तक उसकी सर्जरी कर ठीक करते है। जैसे मस्तिष्क में रक्त का जमाव हो या टिशू हो गया हो आदि।
  • खोपड़ी में फ्रैक्चर की समस्या को ठीक करने के लिए सर्जरी करते है। इस सर्जरी में खोपड़ी के टुकड़े को बाहर निकालते है।
  • मस्तिष्क की चोट के घात होने पर व्यक्ति को चिकिस्तक स्पीच थेरपी देते है। इसके अलावा पुराने गम को भुलाने के लिए मानसिक व शारीरिक रूप से मजबूत बनाते है। चलने और फिरने में सहायता करते है। (और पढ़े – बाइपोलर डिसऑर्डर क्या है)

मस्तिष्क की चोट से बचाव कैसे करें ? (Prevention of Brain Injury in Hindi)

मस्तिष्क के चोट के जोखिम को कम करने के लिए कुछ निम्न उपाय अपना सकते है।

  • बाइक चलाने से पहले हेलमेट जरूर लगाए। इसके अलावा गाड़ी चलाते समय सीटबेल्ट लगाए।
  • शराब व नशीले पदार्थ का सेवन कर गाड़ी नहीं चलाना चाहिए।
  • ऐसी चीजे न पहने जिससे आपको सामने की चीजे ठीक से नजर न आये।
  • अगर आप किसी बीमारी से ग्रस्त है तो अधिक भाग दौड़ न करें।
  • जहरीले ड्रग्स का उपयोग करने से बचे।
  • कोई भी खेल करने पर उचित बचाव के साम्रगी को पहने जैसे हेलमेट दस्ताना आदि।
  • बच्चो को सिर की चोट से बचाव के तरीके
  • सीढ़ी की अच्छी तरह से सफाई रखे।
  • बच्चो को अकेले बालकनी में खेलने न दे।
  • टब या बाथरूम के बाहर मैट रखे ताकि बच्चे गिरे नहीं।

अगर आपको मस्तिष्क की चोट के बारे में अधिक जानकारी व उपचार करवाना चाहते है, तो किसी अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट (Neurologist) से संपर्क करें।

हमारा उद्देश्य आपको रोगो के प्रति जानकारी देना है हम आपको किसी तरह के दवा, उपचार, सर्जरी की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक दे सकता है क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा नहीं होता है। 


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