बच्चों में मिर्गी की समस्या। Epilepsy in Babies in Hindi

फ़रवरी 22, 2020 Brain Diseases 9369 Views

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Epilepsy in Babies Meaning in Hindi

मिर्गी की समस्या आजकल बड़ो में ही नहीं बल्कि बच्चों भी पीड़ित हो रहे है। मिर्गी की समस्या से पुरे दुनिया में लगभग पांच करोड़ से अधिक लोग परेशान है। जैसा की आपको पता है मिर्गी की समस्या में व्यक्ति को दौरे पड़ते है। अगर बच्चों की बात करे तो सामान्य तौर पर 20 में से एक बच्चा मिर्गी के दौरे पड़ सकता है। हालांकि मिर्गी के दौरे बच्चों को आने से माता पिता परेशान हो जाते है। किंतु इसका उपचार उपलब्ध है। बच्चों में मिर्गी की शुरुवाती समस्या होने पर उनमे कुछ लक्षण नजर आने लगते है। जैसे बच्चों के मांसपेशियो में ऐंठन होने लगता है। इस लेख में हम आपको बच्चों में मिर्गी की समस्या के कारण, लक्षण, उपचार व बचाव के बारे में विस्तार से बताएंगे।

  • बच्चों में मिर्गी के प्रकार ? (Types of Epilepsy in Babies in Hindi)
  • बच्चों में मिर्गी के कारण क्या है ? (What are the Causes of Epilepsy in Babies in Hindi.
  • बच्चों में मिर्गी के लक्षण क्या है ? (What are the Symptoms of Epilepsy in Babies in Hindi.
  • बच्चों में मिर्गी का उपचार क्या है ? (What are the Treatments for Epilepsy in Babies in Hindi)
  • बच्चों में मिर्गी से बचाव कैसे करें ? (Prevention of Epilepsy in Babies in Hindi)

बच्चों में मिर्गी के प्रकार ? (Types of Epilepsy in Babies in Hindi)

मिर्गी के दौरे मनुष्य को शारीरिक रूप से अधिक प्रभावित करता है। दरसल यह समस्या मनुष्य में तब देखी जाती है तब मस्तिष्क और न्युरॉन के बिच किसी तरह की समस्या हो जाती है। मस्तिष्क में हो रहे है परेशानी के आधार पर चिकिस्तक मिर्गी को दो भागो में विभाजित किया है।

  • सामान्यीकृत दौरा – यह स्तिथि दिमाग के दोनों न्यूरॉन कोशिकाओं में गड़बड़ी करता है। इसमें बच्चें को हल्की ऐंठन और गंभीर दौरा पड़ सकता है। इसमें कई बार बच्चों को कुछ समय के लिए होती है।
  • एब्सेंस रिसर्च – इस प्रकार में बच्चों को दौरा अचानक से आता है ऐसे स्तिथि में व्यक्ति अगर आराम से बैठा होतो आ जाता है यह स्तिथि कम से कम 15 मिनट तक रहती है।
  • एटोनिक सिजर्स – एटोनिक सिजर्स के दौरान, एक बच्चे को मांसपेशियों की टोन का नुकसान होता है जो अचानक आता है। वे नीचे गिर सकते हैं या लंगड़ा हो सकते हैं और प्रतिक्रिया देना बंद कर सकते हैं। वे आमतौर पर 15 सेकंड से कम समय तक रहते हैं। इन्हें ड्रॉप बरामदगी भी कहा जाता है।
  • सामान्यीकृत टॉनिक-क्लोनिक सिजर्स (जीटीसी) – जीटीसी, या भव्य माल जब्ती के चरण होते हैं। एक बच्चे का शरीर और अंग पहले सिकुड़ेगा, फिर सीधा होगा, और फिर हिल जाएगा। मांसपेशियों को फिर अनुबंध और आराम होगा। अंतिम चरण पश्चात अवधि है, जहां बच्चा थका हुआ और भ्रमित होगा। जीटीसी आमतौर पर बचपन में शुरू होता है और 1-3 मिनट तक रहता है।
  • मायोक्लोनिक सिजर्स – इस प्रकार की सिजर्स मांसपेशियों के अचानक झटके का कारण बनती है। मायोक्लोनिक दौरे आमतौर पर 1 या 2 सेकंड तक रहते हैं, और बहुत कम समय में हो सकते हैं। संक्षिप्त मायोक्लोनिक दौरे वाले लोग चेतना नहीं खोते हैं।
  • फोकल सिजर्स – इस प्रकार को आंशिक दौरा भी कहा जाता है। यह मस्तिष्क की एक कोशिका में गड़बड़ी कर प्रभावित करता है। इससे केवल एक हिस्से में दौरा पड़ता है। बच्चों में होनेवाले फोकल को निम्न भागो में बाटा गया है।
  • फोकल नॉन मोटर सिजर्स – इस प्रकार में बच्चें के भावनात्मक व्यवहार में उतार-चढ़ाव अधिक होता है। उनकी दिल की धड़कने तेज हो जाती है। इसके अलावा बच्चें को ठंड या गर्म लग सकता है।
  • फोकल मोटर सिजर्स – इस प्रकार में बच्चों हमेशा झटका महसूस होने लगता है इसमें बच्चें रगने और ताली बजाने का काम करते है।
  • फोकल अवेयर सिजर्स – इस प्रकार में बच्चों को सामान्य दौरा पड़ता है। इसे साधारण आंशिक दौरा भी कह सकते है।
  • फोकल इमपैयर्ड अवेयर सिजर्स – इस प्रकार में दौरा बहुत जटिल होता है। इसमें बच्चें कुछ भी समझ नहीं पाते है। इसके अलावा दौरे के बाद कुछ याद नहीं रहता है।

बच्चों में मिर्गी के कारण क्या है ? (What are the Causes of Epilepsy in Babies in Hindi).

बच्चों के आयु के आधार पर दौरा अलग -अलग कारण से पड़ सकता है। हालांकि कुछ बच्चों में मिर्गी की समस्या अनुवांशिक होती है। कई अन्य कारण भी मिर्गी के दौरे का हो सकता है। सिर की चोट लगने से मिर्गी के दौरे का जोखिम हो सकता है।

  • कुछ मामले मस्तिष्क के आकार बदलने के कारण हो सकता है।
  • आटिज्म से ग्रस्त बच्चें को मिर्गी का दौरा पड़ सकता है।
  • किसी जन्मजात बच्चें को विकार व शरीर के रसायनो का असंतुलन होने से मिर्गी के दौरे पड़ सकते है।
  • बच्चों में मस्तिष्क से जुडी समस्या बढ़ने से मिर्गी का जोखिम पैदा हो सकता है।
  • मस्तिष्क को किसी तरह नुकसान पहुंचने से मिर्गी का कारण बन सकता है। (और पढ़े – डिमेंशिया क्या है)

बच्चों में मिर्गी के लक्षण क्या है ? (What are the Symptoms of Epilepsy in Babies in Hindi).

बच्चों में मिर्गी की समस्या होने पर निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकता है। मोटर लक्षण –

  • मांसपेशियो में मरोड़ होना।
  • मांसपेशियो में ऐंठन होना।
  • मांसपेशियो में कठोरता।
  • अचानक मांसपेशी में झटके लगना।
  • सांस लेने में दिक्कत होना। (और पढ़े – अस्थमा क्यों होता है)
  • बोलने में परेशानी होना।
  • हाथो को रगड़ना या ताली बजाना।
  • चेतना खो देना। नॉन मोटर लक्षण –
  • त्वचा के रंग में परिवर्तन होना।
  • अचानक से कुछ समझ पाना।
  • अपनी बात समझाना कठिन लगना।
  • किसी वस्तु को ध्यान से देखना।
  • भावनात्मक बदलाव।

बच्चों में मिर्गी का उपचार क्या है ? (What are the Treatments for Epilepsy in Babies in Hindi)

  • बच्चों में मिर्गी के दौरे का उपचार बच्चे के कारण और आयु के आधार पर किया जाता है। सबसे पहले बच्चें के दौरे को कम करने पर काम किया जाता है। इसमें चिकिस्तक कई तरह के दवाएं देते है। इसके अलावा कुछ मामलो में मस्तिष्क की सर्जरी भी कर सकते है। आपको निम्न उपचार के बारे में बताएंगे।
  • यदि किसी बच्चें पर दवा का असर नहीं होता है, तो कीटोजेनिक डाइट पर रखा जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेड कम किया जाता है। इससे दौरा का जोखिम कम रहता है।
  • मिर्गी को कम करने वाली दवाओं को लेने की सलाह देते है ताकि मिर्गी की समस्या ठीक हो। सकरे।
  • यदि दवा और डाइट में बदलाव करने से कोई खास देखभाल नहीं हो पाते तो चिकिस्तक समस्या को ठीक करने के लिए सर्जरी की सलाह देती है।

बच्चों में मिर्गी से बचाव कैसे करें ? (Prevention of Epilepsy in Babies in Hindi)

बच्चों में मिर्गी के दौरे पड़ने के कारण के बारे में आपको पहचाहनना चाहिए। बच्चें में जो मिर्गी के परेशानी को रोकने के लिए मिर्गी को बढ़ाने वाले कारक को रोकना चाहिए। बच्चों में मिर्गी से बचाव करने के लिए कुछ निम्न उपाय कर सकते है।

  • बच्चों को गिरने से बचाने के लिए बच्चें को ध्यान देकर चलने को कहे।
  • बच्चों को प्रोटीन वाले आहार अधिक दे और कम कार्बोहाइड्रेड वाले आहार को खिलाये। बच्चों में आहार को लेकर कोई परेशानी है, तो किसी विशेष सलाहकार से बात करे।
  • बच्चों को सिर में चोट लगने से बचाव करे और साईकिल चलाते समय हेलमेट पहनने की सलाह दे। (और पढ़े – सिर की चोट के कारण)
  • बच्चों को सही समय पर दौरा वाली दवाएं खिलाया करे।
  • बच्चों को सही समय सोने की सलाह दे, क्योंकि नींद की कमी दौरे पैदा कर सकता है।
  • बच्चें को अधिक शोरगुल वाली जगह पर न ले जाएं, क्योंकि शोर दौरे के जोखिम को बढ़ावा देती है।
  • अधिक तनाव बच्चें को मिर्गी के दौरे का कारण बनता है। इसलिए, जितना हो सके तनाव से दूर रखें।

अगर आपके बच्चें में मिर्गी के लक्षण नजर आ रहे है, तो बिना किसी देरी के (Paediatric Neurologist) से संपर्क करें।

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है। 


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