कुरु रोग क्या हैं । Kuru Disease in Hindi

Login to Health मार्च 26, 2021 Brain Diseases 17 Views

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कुरु रोग का मतलब हिंदी में,  (Kuru Disease Meaning in Hindi)

कुरु रोग क्या हैं ?

कुरु एक तरह का घातक मस्तिष्क रोग है जो समय के साथ खराब हो जाता है। यह सबस्यूट स्पॉन्गिफॉर्म एन्सेफैलोपैथी का एक रूप है। यह समस्या मस्तिष्क के ऊतको में संक्रामक प्रोटीन के कारण होता है। मुख्य तौर पर कहा जाये तो मानव मस्तिष्क को खाना होता है। कुरु एक दुर्लभ स्तिथि है जिसे न्यूरोजिकल विकार भी कहा जा सकता है। कुरु के इतिहास की बात करे तो इसकी खोज बीसवीं सदी में की गयी थी। गिनी के चार लोगो में इस बीमारी का उल्लेख किया गया है जिसे कुरु नाम से संबोधित किया गया था। कुछ रिसर्च के मुताबिक इन लोगो के बिच रहने वाले लोग ने देखा मृतक लोग के मस्तिष्क रूठी परंपरा व आस्था के नाम पर भोजन में खाया जाता है। यह प्रथा को बंद करवा दिया था और यह पीढ़ी पूरी तरह से लुप्त हो चुकी है। इन बीमारियों के रिसर्च के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया था। कुरु के शुरुवाती लक्षण में सिरदर्द व जोड़ो में दर्द की समस्या होती है। इस कारण इस रोग पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया जो की बाद में गंभीर समस्या का कारण बन जाता है। चलिए आज के लेख में आपको कुरु रोग के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं।

  • कुरु रोग के कारण क्या हैं ? (What are the Causes of Kuru Disease in Hindi)
  • कुरु रोग के लक्षण क्या हैं ? (What are the Symptoms of Kuru Disease in Hindi)
  • कुरु रोग का निदान ? (Diagnoses of Kuru Disease in Hindi)
  • कुरु रोग का इलाज क्या हैं ? (What are the Treatments for Kuru Disease in Hindi)
  • कुरु रोग से बचाव कैसे करें ? (Prevention of Kuru Disease in Hindi)

कुरु रोग के कारण क्या हैं ? (What are the Causes of Kuru Disease in Hindi)

कुरु रोग एक समूह से संबंधित है जिसे ट्रांसमीसबल स्पॉन्गिफॉर्म एन्सेफैलोपैथिस (टीएसई) कहा जाता है, जिसे प्रियन रोग भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से सेरिबैलम को प्रभावित करता है। यह भाग शारीरिक समन्वय और संतुलन के लिए जिम्मेदार होता है। अधिकांश संक्रमण या संक्रामक एजेंट बैक्टीरिया, वायरस या कवक आदि का कारण नहीं होता है। प्रायन नामक असामान्य प्रोटीन कुरु का कारण बनता है। यह असामान्य प्रोटीन मस्तिष्क में बढ़ते है और मस्तिष्क के कार्य में बाधा उत्पन्न करते है (और पढ़े – डिमेंशिया रोग क्या हैं)

कुरु रोग के लक्षण क्या हैं ? (What are the Symptoms of Kuru Disease in Hindi)

कुरु रोग सामान्य तौर पर न्यूरोलॉजिकल विकारों में से एक है इसके लक्षण पार्किंसंस रोग या स्ट्रोक के लक्षण की तरह समान नजर आते है। इनमे शामिल हैं। 

  • जैसे – चलने में कठिनाई होना। 
  • शारीरिक समन्वय की समस्या। 
  • भोजन निगलने में कठिनाई होना। 
  • मतिभ्रम होना। 
  • मनोदशा और व्यवहार में परिवर्तन होना। 
  • पागलपन होना। 
  • मांसपेशियों में मरोड़ और कंपकंपी होना। 
  • वस्तुओं को समझने में असमर्थता होना। 
  • कभी भी हसने या रोने लगना। 

हालांकि कुरु तीन चरण में होता है। सबसे पहले सिरदर्द व जोड़ो में दर्द का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा शारीरिक नियंत्रण करने में समस्या उत्पन्न हो सकती है। दूसरे चरण में व्यक्ति ठीक से चल नहीं पाता है और शरीर में कंपकंपी का अनुभव होने लगता है। तीसरे चरण में व्यक्ति को कुछ भी खाने पर निगलने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्या का जोखिम लगा रहता है। अध्ययन के अनुसार इन लक्षणो के कारण व्यक्ति की मृत्यु साल भर के अंदर हो जाती है। कुछ मामलो में निमोनिया के कारण कई लोगो लो मौत हो जाती है। (और पढ़े – निमोनिया के कारण क्या हैं)

कुरु रोग का निदान ? (Diagnoses of Kuru Disease in Hindi)

कुरु रोग का निदान करने के लिए निम्न परीक्षण किया जा सकता है। जिनमे शामिल है न्यूरोलॉजिकल परीक्षण व इलेक्ट्रोडायग्रॉस्टिक परिक्षण। 

न्यूरोलॉजिकल परीक्षण कुरु रोग के निदान के लिए एक न्यूरोलॉजिकल परीक्षण किया जाता है। इनमे कुछ व्यापक चिकित्सा परीक्षण शामिल हैं। 

  • जैसे – चिकित्सा का इतिहास। 
  • तंत्रिका संबंधी कार्य का परीक्षण। 
  • व्यक्ति में थायराइड, फोलिक एसिड का स्तर, और यकृत और गुर्दे के कार्य का सटीक पता लगाने के लिए रक्त परीक्षण करते है। (और पढ़े – थायरॉइड की सर्जरी)

इलेक्ट्रोडायग्रॉस्टिक परिक्षण ईसीजी का उपयोग व्यक्ति के मस्तिष्क में विद्युत गतिविधि की जांच करने के लिए किया जाता है। व्यक्ति की स्तिथि के अनुसार चिकिस्तक अन्य जांच जैसे एमआरआई स्कैन व ब्रेन स्कैन की सिफारिश कर सकता हैं। (और पढ़े – मस्तिष्क में चोट के निदान)

कुरु रोग का इलाज क्या हैं ? (What are the Treatments for Kuru Disease in Hindi)

कुरु रोग का अभी तक कोई उपचार उपलब्ध नहीं है। हालांकि चिकिस्तक इस विकार के कारण से होने वाले प्रभावों को आसानी से नष्ट कर सकते है किंतु कई प्रयासों के बाद भी प्रायन प्रोटीन दूषित मस्तिष्क संक्रामक हो सकता है। (और पढ़े – अल्जाइमर रोग क्या हैं)

कुरु रोग से बचाव कैसे करें ? (Prevention of Kuru Disease in Hindi)

  • जैसा की आपको आगे बता चुके है कुरु एक असाधारण दुर्लभ स्तिथि है। ये सिर्फ उन लोगो के मस्तिष्क को प्रभावित करता है जो संक्रमित है या ऊतक को निगलना व संक्रमित घावों के संपर्क में आया हो आदि। हालांकि कई देश के सरकार व समाज में इस बीमारी को रोकने के लिए कई तरह के कदम उठाये गए है ताकि लोगो को इस बीमारी के प्रति जागरूकता हो सके। कुछ रिसर्च के अनुसार कुरु रोग अब कई नजर नहीं आता है और यह पूरी तरह से समाप्त हो गया है। 
  • कुरु रोग के शुरुवात संक्रमण व लक्षण के मध्य का समय लगभग 30 साल तक का हो सकता है। यह बीमारी अधिक होने पर कई मामले सामने आने लगे। न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार कुरु रोग एक तरह मस्तिष्क विकार है। यदि व्यक्ति के मस्तिष्क में किसी तरह की समस्या या संकेत नजर आए तो चिकिस्तक से संपर्क करना चाहिए। (और पढ़े – बाइपोलर डिसऑर्डर क्या हैं)

हमें आशा है की आपके प्रश्न कुरु रोग क्या हैं ? का उत्तर इस लेख के माध्यम से दे पाएं। 

अगर आपको कुरु रोग के बारे में अधिक जानकारी व उपचार करवाना हो, तो (Neurologist) से संपर्क कर सकते हैं। 

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है।


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