बोन मैरो ट्रांसप्लांट क्या हैं। Bone Marrow Transplant in Hindi

सितम्बर 25, 2020 Cancer Hub 3867 Views

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बोन मैरो ट्रांसप्लांट क्या हैं। Bone Marrow Transplant Meaning in Hindi

बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जो बीमारी, संक्रमण, या कीमोथेरेपी द्वारा क्षतिग्रस्त या नष्ट होने पर बोन मैरो को बदलने के लिए की जाती है। इस प्रक्रिया में रक्त स्टेम कोशिकाओं का प्रत्यारोपण शामिल है, जो अस्थि मज्जा की यात्रा करते हैं जहां वे नई रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करते हैं और नए अस्थि मज्जा के विकास को बढ़ावा देते हैं। अस्थि मज्जा हड्डियों के अंदर मौजूद स्पंजी, वसायुक्त ऊतक है। यह हड्डी को पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए भी जाना जाता है। अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण स्वस्थ कोशिकाओं के साथ क्षतिग्रस्त स्टेम कोशिकाओं को बदलने में मदद करता है। यह आपके शरीर को संक्रमण या रक्तस्राव विकारों से बचने में मदद करता है। हालांकि अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण कई बीमारियों के इलाज के लिए एक स्थायी और प्रभावी तरीका माना जाता है जैसे कि अविकासी खून की कमी, लिंफोमा, लेकिमिया, थैलेसीमिया, दरांती कोशिका अरक्तता, एकाधिक मायलोमा इत्यादि। चलिए बोन मेरौ ट्रांसप्लांट (Bone Marrow Transplant )के बारे में विस्तार से बताते हैं।

  • बोन मेरौ ट्रांसप्लांट क्यों किया जाता हैं ? (Bone Marrow Transplant kyo kiya jata hai in Hindi)

  • बोन मेरौ ट्रांसप्लांट कैसे किया जाता हैं ? (Bone Marrow Transplant kaise kiya jata hai in Hindi)

  • बोन मेरौ ट्रांसप्लांट के बाद देखभाल ? (Bone Marrow Transplant ke bad Dekhbhal kaise kare in Hindi)

  • बोन मेरौ ट्रांसप्लांट के बाद सावधानियां ? (Bone Marrow Transplant ke bad Shawdhaniya in Hindi)

  • भारत में बोन मेरौ ट्रांसप्लांट कराने कितना खर्च लग सकता हैं ? (What is cost of Bone Marrow Transplant in India in Hindi)

बोन मेरौ ट्रांसप्लांट क्यों किया जाता हैं ? (Bone Marrow Transplant kyo kiya jata hai in Hindi)

यदि व्यक्ति लंबे समय से किसी बीमारी से ग्रस्त चल रहा है तो इस कारण उनका बोन मेरौ क्षतिग्रस्त हो जाता है। ऐसी स्तिथि में चिकिस्तक बोन मेरौ ट्रांसप्लांट करवाने की सलाह देते है। इसके अलावा कुछ अन्य रोग भी शामिल है जिनमे बोन मेरौ ट्रांसप्लांट करवाने की जरूरत पड़ सकती है।

  • जैसे – लिंफोमा जो संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाओं का कैंसर होता है।
  • ल्यूकेमिया एक तरह का कैंसर है।
  • पोयस सिंड्रोम होना।
  • सफ़ेद रक्त कोशिकाओं का कैंसर जिसे मल्टीपल मायलोमा कहते है। यह गैर कैंसरकारी कोशिका है जो बोन के स्वस्थ जगह में जगह बनाने लगती है।
  • अमायलोडोडिस एक असामान्य रोग है जो प्रोटीन अस्थि मज्जा में बनने लगता है।
  • एक्यूट लिम्फोटिक ल्यूकेमिया।
  • प्राइमरी इम्यूनो डेफिशियेंसी एक ऐसा रोग है जो मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है। (और पढ़े – इम्म्युंटी बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए)
  • अप्लास्टिक एनीमिया होना जिसमे बोन मैरो में रक्त कोशिका नहीं बन पाता है।
  • क्रोनिक लिम्फोटिक ल्यूकेमिया।

बोन मेरौ ट्रांसप्लांट कैसे किया जाता हैं ? (Bone Marrow Transplant kaise kiya jata hai in Hindi)

व्यक्ति के लक्षणों को देखकर एक पूर्ण रक्त गणना आवश्यक होता है। रक्त और प्रयोगशाला परीक्षणों को अस्थि मज्जा की आकांक्षा और बायोप्सी के साथ-साथ गुणात्मक और मात्रात्मक रूप से मूल्यांकन करने के लिए किया जाना है। रक्त कोशिकाओं की संख्या में बदलाव रक्त कैंसर, एनीमिया और कई अन्य बीमारियों की संभावना को प्रकट करता है जिनके लिए अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो सकती है। अस्थि मज्जा की कोशिकाओं को आमतौर पर बायोप्सी के लिए कूल्हे की हड्डी से लिया जाता है और इसकी पूरी जांच की जाती है। दानकर्ता की उपलब्धता के आधार पर अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण कई प्रकार से किया जा सकता हैं।

  • ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट (Autologous bone marrow transplant) जिसमें उपयोग की जाने वाली स्टेम कोशिकाएँ स्वयं रोगी की होती हैं। इन स्टेम सेल को कीमोथेरेपी या विकिरण चिकित्सा से पहले लिया गया होता है।
  • एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट (Allogeneic bone marrow transplant) जिसमें उपयोग की जाने वाली स्टेम कोशिकाएं किसी अन्य व्यक्ति की होती हैं, अधितर किसी करीबी रिश्तेदार की होती है। उनकी स्टेम कोशिकाओं की अनुकूलता की जांच के लिए कई परीक्षण किए जाते हैं।
  • उम्बिकल कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट (Umbilical cord blood transplant) जिसमें जन्म के तुरंत बाद गर्भनाल से स्टेम सेल लिए गए हैं। ये अपरिपक्व कोशिकाएं जो भी आवश्यक है उन कोशिकाओं में अंतर कर सकते हैं। दानकर्ता के मामले में अस्थि मज्जा को मानव ल्यूकोसाइट एंटीजन संगतता परीक्षणों का उपयोग करके मिलान किया जाना है। तने की कोशिकाओं को एफेरेसिस या बोन मैरो कटाई द्वारा एकत्र किया जा सकता है। एफेरेसिस में, डोनर की एक कोशिका पृथक्करण मशीन से जुड़ा होता है जिसमें रक्त से स्टेम कोशिकाएं निकाल दी जाती हैं। इसके लिए, यह आवश्यक है कि एफेरेसिस से एक सप्ताह पहले; अस्थि मज्जा से परिधीय रक्त प्रणाली से बाहर आने के लिए स्टेम सेल के लिए उपयुक्त दवा दी जाती है। अस्थि मज्जा कटाई के मामले में, स्टेम कोशिकाओं को आमतौर पर एक सुई का उपयोग करके कूल्हे की हड्डी से एकत्र किया जाता है। (और पढ़े – हड्डियों का फ्रैक्चर होने के कारण)

बोन मेरौ ट्रांसप्लांट के बाद देखभाल ? (Bone Marrow Transplant ke bad Dekhbhal kaise kare in Hindi)

बोन मेरौ ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को अस्पताल में कम से कम 28 दिन के लिए रखा जाता है। ताकि चिकिस्तक मरीज का ध्यान दे पाए और नई कोशिकाओं मरीज के शरीर में काम करने में 14 से 28 दिन तक का समय लग सकता है। इन समय में चिकिस्तक मरीज को कुछ एंटीबायोटिक दवा की खुराक देते है। इसके अलावा रक्तधान की आवश्यकता की पूर्ति कर सकते है। जिस व्यक्ति से स्टेम सेल ट्रांसप्लांट हुआ है उसके लिए बहुत देखभाल जरुरी होता है क्योंकि ग्राफ्ट वर्सेस डिजीज का जोखिम रहता है। इन समस्या से बचाव के लिए अस्पताल में 50 दिन रहने बोला जा सकता है। मरीज को घर की छुट्टी मिलने पर कुछ निम्न बातो का ध्यान रखना चाहिए।

  • मरीज को फॉलो अप के लिए चिकिस्तक से संपर्क करते रहना चाहिए।
  • ट्रांसप्लांट होने के बाद संक्रमण का जोखिम रहता है इसलिए चिकिस्तक द्वारा दिए गए निर्देश का सही पालन करना चाहिए।
  • बोन मेरौ ट्रांसप्लांट के बाद व्यक्ति को शारीरिक कमजोरी का अनुभव हो रहा है तो अपने चिकिस्तक को बताएं।
  • मरीज को पोषक तत्व से युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। जैसे रस, दूध, अंडे, पनीर, फल, पीनट बटर, एवोकाडो आदि।
  • जिन मरीजों को चक्कर बहुत आते है उनको व्यायाम न करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा अन्य मरीज व्यायाम के बारे में सोच रहे है तो चिकिस्तक से संपर्क करे। (और पढ़े – सुबह दौड़ने के फायदे)

बोन मेरौ ट्रांसप्लांट के बाद सावधानियां ? (Bone Marrow Transplant ke bad Shawdhaniya in Hindi)

बोन मैरो ट्रांसप्लांट होने के बाद कुछ जटिलता का जोखिम हो सकता है। जैसे ग्राफ्ट-बनाम-होस्ट बीमारी है जिसमें दान वाली कोशिकाएं प्राप्तकर्ता के उन लोगों पर हमला करना शुरू कर देती हैं और इसलिए प्रतिरक्षा के संबंध में समस्याएं पैदा करती हैं। इसके अलावा, ग्राफ्ट अस्वीकृति का एक मौका है जिसमें डोनर स्टेम कोशिकाएं प्राप्तकर्ता में प्रभावी रूप से कार्य नहीं करती हैं और रक्त कोशिकाओं में अंतर करने में विफल रहती हैं। जिस वजह से यह थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और एनीमिया को खतरा बन सकता है।

  • सर्जरी के बाद रोगी को कई संक्रमणों का भी खतरा हो सकता है। इसके अलावा मतली, उल्टी, थकान, कमजोरी और दस्त का अनुभव हो सकता है।
  • यकृत को नुकसान, बच्चों में वृद्धि में देरी, रक्त वाहिकाओं में थक्का जमना और यहां तक कि शरीर के आवश्यक अंगों में रक्तस्राव की संभावनाएं हो सकती हैं।

भारत में बोन मेरौ ट्रांसप्लांट कराने कितना खर्च लग सकता हैं ? (What is cost of Bone Marrow Transplant in India in Hindi)

भारत में बोन मेरौ ट्रांसप्लांट कराने का कुल खर्च लगभग 1000000 से 2000000 लग सकता है। हालांकि भारत में बहुत से बड़े अस्पताल के डॉक्टर है जो का बोन मेरौ ट्रांसप्लांट करते है। लेकिन सभी अस्पतालों में बोन मेरौ ट्रांसप्लांट का खर्च अलग-अलग है। अगर आप अच्छे अस्पतालों में बोन मेरौ ट्रांसप्लांट के खर्च व डॉक्टर के बारे में जानकारी पाना चाहते है तो यहाँ पर क्लिक करें। अगर आप विदेश से आ रहे है तो आपकी सर्जरी के इलाज के खर्च के अलावा होटल में रहने का खर्चा होगा, रहने का खर्चा होगा, लोकल ट्रेवल का खर्चा होगा। इसके अलावा सर्जरी के बाद मरीज को 21 दिन अस्पताल व या 21 दिन होटल में रिकवरी के लिए रखा जाता है, इसलिए सभी खर्चे मिलाकर 1,439,892 INR होते है जो एक साथ अस्पताल में लिये जाते है। इसके बारे में अधिक जानकारी पाना चाहते है तो यहाँ पर क्लिक करे।

अगर आपको बोन मेरौ ट्रांसप्लांट के बारे में अधिक जानकारी व इलाज करवाना चाहते है तो Oncologist से संपर्क कर सकते हैं।

हमारा उद्देश्य है आपको जानकारी प्रदान करना है। ना की किसी तरह के दवा, इलाज, घरेलु उपचार की सलाह दी जाती है। आपको चिकिस्तक अच्छी सलाह दे सकते है क्योंकि उनसे अच्छी सलाह कोई नहीं देता है।


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