स्लिप डिस्क के कारण, लक्षण, उपचार व बचाव। Slipped Disc Causes, Symptoms, Treatments and Prevention in Hindi

Login to Health जनवरी 7, 2020 Bone Health 4586 Views

Slipped Disc Meaning in Hindi

हमारे शरीर में रीढ़ की हड्डी हड्डियों को सहारा देने का कार्य करती है। रीढ़ की हड्डियों में छोटे छोटे हड्डियों का समूह होता है अगर कोई छोटी हड्डी अपने आकर से बड़ी हो जाये तो इसे चिकिस्तक भाषा में स्लिप डिस्क कहते है। हड्डी बढ़ने पर दर्द होने का अनुभव होता है। इसके अलावा हड्डी में क्षति व चोट लगने से स्लिप डिस्क में समस्या आती है। स्लिप डिस्क के कारण हाथ या पैर में कमजोरी हो सकती है। बहुत से लोगो को स्लिप डिस्क के बारे में पता नहीं होगा की स्लिप डिस्क में समस्या किन कारणों से होती है। चलिए आपको इस लेख में स्लिप के प्रकार, कारण, लक्षण, उपचार के बारे में विस्तार से बतायेंगे।

  • स्लिप डिस्क के प्रकार ? (Types of Slipped Disc in Hindi)
  • स्लिप डिस्क के कारण क्या है ? (What are the Causes of Slipped Disc in Hindi)
  • स्लिप डिस्क के लक्षण क्या है ? (What are the Symptoms of Slipped Disc in Hindi)
  • स्लिप डिस्क का इलाज क्या है ? (What are the Treatments for Slipped Disc in Hindi)
  • स्लिप डिस्क से बचाव कैसे करें ? (Prevention of Slipped Disc in Hindi)

स्लिप डिस्क के प्रकार ? (Types of Slipped Disc in Hindi)

स्लिप डिस्क के मुख्य रूप से तीन प्रकार है।

  • सर्वाइकल डिस्क स्लिप – सर्वाइकल डिस्क स्लिप गर्दन में होता है। यह सिर के पिछले भाग, कंधे की हड्डी, बाह व हाथ में दर्द होता है।
  • लंबर डिस्क स्लिप – लंबर डिस्क स्लिप रीढ़ की हड्डी के निचले भाग में होती है। इससे पीठ के निचले हिस्से जांध, कुल्ला, जननांग में दर्द होता है।
  • थोरैसिक डिस्क स्लिप – थोरैसिक डिस्क स्लिप रीढ़ की हड्डी के बिच के भाग में होता है। इससे पीठ के मध्य व कंधे के जगह में दर्द होता है।

स्लिप डिस्क के कारण क्या है ? (What are the Causes of Slipped Disc in Hindi)

स्लिप डिस्क के तीन कारण होते है।

  • स्लिप डिस्क पर अचानक से झटका या चोट लगने से समस्या शुरू होती है। स्लिप डिस्क पर किसी चीज से धक्का लगने पर असामन्य दबाव पड़ता है। इस वजह से स्लिप डिस्क में सूजन हो जाता है।
  • व्यक्ति की उम्र बढ़ने पर हड्डियों में कमजोरी होना स्वभाविक है। इसके अलावा डिस्क का अधिक क्षरण होने से डिस्क को क्षति होती है। इस कारण थोड़ा भी झटका लगता है तो स्लिप डिस्क हो जाता है।
  • व्यक्ति के पीठ में रीढ़ की हड्डी झटके से बचाने का काम करती है। समय के साथ डिस्क कमजोर होने लगता है। क्योकि डिस्क की बाहरी परत कठोर के बजाय कमजोर हो जाती है।

स्लिप डिस्क के लक्षण क्या है ? (What are the Symptoms of Slipped Disc in Hindi)

मनुष्य के रीढ़ की हड्डी में कही भी स्लिप डिस्क की समस्या हो सकती है। गर्दन के निचले हिस्से व रीढ़ के निचले हिस्से को प्रभावित करती है। रीढ़ की हड्डिया व रक्त वाहिकाओं का एक जाल तंत्र है जो सभी को साथ रखता है। स्लिप डिस्क मांसपेशियो व तंत्रिकाओं के आसपास के छेत्र पर दबाव डालता है। स्लिप डिस्क के कुछ लक्षण आपको नजर आ सकते है। जिसके बारे में निचे दिया गया है।

  • दर्द की जगह जलन व झनझनाहट होना। (और पढ़े – कमर दर्द क्या है)
  • चलने में दर्द होना।
  • अधिक चल न पाना।
  • मांसपेशियो की कमजोरी।
  • एक ही मुद्रा में बैठने या उठने में दर्द का अनुभव होना।
  • हाथ में दर्द फैलना।
  • शरीर के एक हिस्से में अधिक दर्द होना।
  • रात के समय सोने में दर्द और बढ़ जाना। (और पढ़े – बदन दर्द दूर करने के घरेलु उपाय)
  • हर व्यक्ति में अलग अलग दर्द महसूस कर सकते है, जिसके बारे में अपने चिकिस्तक से बात कर सकते है।

स्लिप डिस्क का इलाज क्या है ? (What are the Treatments for Slipped Disc in Hindi)

  • स्लिप डिस्क का उपचार व्यक्ति के कारणों पर निर्भर होता है। इसके अलावा चिकिस्तक कुछ सुझाव देते है ताकि व्यक्ति की समस्या कम हो सके।
  • कुछ लोगो को चिकिस्तक व्यायाम करने की सलाह देते है ताकि स्लिप डिस्क में सुधार हो सके। इस वजह से मांसपेशिया मजबूत बनती है।
  • स्लिप डिस्क होने पर दर्द निवारक दवा लेने से दर्द से आराम मिलता है। इस बात का ध्यान रखे स्लिप डिस्क दर्द होने पर भारी सामान न उठाये।
  • अगर दर्द निवारक दवाएं लेने से आपको कोई खास आराम नहीं हो रहा है तो चिकिस्तक आपके दवाएं में बदलाव कर सकते है। अगर ऐंठन की समस्या है तो उसके लिए भी कुछ दवा लिख सकते है।
  • अगर अधिक दिनों से दर्द में कोई फर्क नहीं पड़ रहा है तो चिकिस्तक मांसपेशियो की स्लिप डिस्क के दबाव को कम करने के लिए कुछ दवाएं लेने की सुझाव दे सकते है। (और पढ़े – दूध के फायदे हड्डियों की मजबूती के लिए)
  • कुछ गंभीर मामलो में चिकिस्तक पहली डिस्क बदल कर कृत्रिम डिस्क लगा सकते है। इसके अलावा डिस्क को निकालकर कशेरुकायो के साथ मिला सकते है।

स्लिप डिस्क से बचाव कैसे करें ? (Prevention of Slipped Disc in Hindi)

स्लिप डिस्क के जोखिम को कम करने के लिए कुछ निम्न उपाय अपनाकर बचाव कर सकते है।

  • अगर आप किसी तरह का वजन उठा रहे है तो सही तकनीक का उपयोग करे।
  • नींद करते समय पीठ को सीधा कर सोये। एक तरफ सोते समय घुटने के बिच तकिया लगाए।
  • बैठने पर कुर्सी पर तकिया या तौलिया का गोल बनाकर रखे ताकि स्लिप डिस्क को क्षति न हो।
  • खाली झुकने व खड़े होने दौरान दर्द नहीं होता है। लेकिन पीठ पर चोट लगने से या गलत तरीके से बैठने से दर्द बढ़ सकता है।
  • धूम्रपान करने से डिस्क में समस्या होता है इसलिए धूम्रपान करने से परहेज करे।
  • आपको नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। व्यायाम करने से मांसपेशिया मजबूत होती है और स्लिप डिस्क की समस्या नहीं होती है।
  • अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अपना शरीर का वजन संतुलित रखे ताकि निचले हिस्से में दबाव कम हो सके। (और पढ़े – खजूर के फायदे वजन कम करने के लिए)

अगर आपको स्लिप डिस्क के बारे में अधिक जानकरी व उपचार के लिए ओर्थपेडीक (Orthopedic) से संपर्क करें।

हमारा उद्देश्य आपको रोगो के प्रति जानकारी देना है हम आपको किसी तरह के दवा, उपचार, सर्जरी की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक दे सकता है क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा नहीं होता है। 

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