बाईपास सर्जरी क्या है। Heart Bypass Surgery in Hindi

Login to Health दिसम्बर 13, 2019 Heart Diseases 89 Views

Heart Bypass Surgery Meaning in Hindi

हृदय बाईपास सर्जरी तब की जाती है। जब हृदय की मांसपेशियो में रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनिया क्षति ग्रस्त हो जाती है। जो पुरे शरीर में रक्त प्राप्त करने का काम हृदय करता है। इस रक्त फेफड़ो तक भेजा जाता है। ताकि जहा तक ऑक्सीजन के साथ मिल सके। इसके बाद हृदय के माध्यम से सभी अंगो में पंप किया जाता है। यह कार्य हमारे शरीर में बहुत महत्वपूर्ण होता है। रक्त और ऑक्सीजन के बिना शरीर का कोई भी अंग कार्य नहीं करता है। इसी प्रकार यदि दिल की मांसपेशिया ठीक से रक्त की आपूर्ति नहीं कर पाती है तो यह दिल में गंभीर जटिलता उत्पन्न करती है। सर्जरी में मुख्यरूप से रोगी के रक्तवाहिका से हृदय को जोड़ा जाता है। ताकि धमनी का क्षतिग्रस्त भाग को बाईपास हो सके। बाईपास होने से हृदय की मांसपेशिया सही से कार्य करने लगती है। इस लेख में आपको हृदय बाईपास सर्जरी के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।

बाईपास सर्जरी क्यों की जाती है ? (Bypass Surgery Kyo Ki Jati Hai in Hindi)

बाईपास सर्जरी तब की जाती है अगर हृदय में कुछ निम्न परेशानी हो।

  • एंजाइना में छाती में अचानक दर्द महसूस होता है। यदि हृदय की मांसपेशियो को पर्याप्त रक्त आपूर्ति की कमी के कारण होता है। इसमें अचानक दर्द, दांत, उंगलिया, जबड़े, हाथ में महसूस किया जाता है। यह दिल की मांसपेशियो को बाधित करता है। यह कोनोनरी धमनी का परिणाम हो सकता है। (और पढ़े – उच्च रक्तचाप के लिए कीवी के फायदे)
  • सांस लेने में तकलीफ में कोनोनरी धमनी की क्षति का संकेत हो सकता है। इसमें सांस फुलता है और सांस लेने में कठिनाई होता है। क्योंकि इसमें हृदय रक्त की आपूर्ति ठीक से कर नहीं पाता है। शरीर में कमजोरी हो जाती है। मामूली गतिविधि करने पर सांस लेने में कठिनाई हो जाती है।
  • अगर धमनी में सूजन – धमनी शोध एक ऐसी स्तिथि है। जो मानव शरीर की किसी धमनी को प्रभावित करता है। सूजन से प्रभावित धमनी की दीवारे क्षति ग्रस्त हो जाती है। इस स्तिथि कोनोनरी धमनी प्रभावित हो सकती है। इसके कारण क्षति पहुंच सकती है।
  • अन्य विधिया का विफल हो जाने से कोनोनरी धमनी के हर ब्लॉकेज की सर्जरी करनी पड़ती है। ऐसे में चिकिस्तक मरीज को कुछ व्यायाम करवाते है। आहार लेने बोलते है और दवाइया लेने बोल सकते है। कुछ गंभीर मामलो एंजियोप्लास्टिक की जरूरत पड़ती है।
  • अगर विभिन्न कारणों से धमनी की दिवार मोटी और कठोर हो जाती है तो इसे धमनिकठिन्य कहा जाता है। धमनी के भीतर प्लाक जमा हो जाता है। मोटी दीवारे धमनियों के लुमेन को सकरा कर देती है। जो रक्त प्रवाह को रोक देता है। रक्त में उच्च कोलेस्ट्रॉल की स्तिथि को भी उत्पन्न करता है। (और पढ़े – हार्ट अटैक क्या है)

बाईपास सर्जरी होने से पहले की तैयारी ? (Bypass Surgery Hone se Pehle Ki Taiyari in Hindi)

बाईपास सर्जरी के पहले कुछ निम्न बातो का ध्यान रखना चाहिए।

  • सर्जरी करवाने से पहले कुछ जांच करवानी पड़ती है।
  • एनेस्थीसिया की जांच करवाना।
  • सर्जरी की योना बनाना।
  • सर्जरी के पहले निर्धारित दवाएं लेना।
  • सर्जरी के पहले खाली पेट रहना।
  • सर्जरी के दिन
  • विशेष जांच करना ईसीजी की जांच करना, एंजियोग्राम, कार्डियक कैथेतेराइजेशन जिससे चिकिस्तक धमनियों की शाखाएं की जांच करते है।
  • ग्राफ्ट का चयन करना।
  • जिस जगह चीरा लगाया जायेगा वहा के त्वचा के बाल साफ करना।

बाईपास सर्जरी कैसे होती है ? (Bypass Surgery Kaise hoti Hai in Hindi)

सर्जरी से पहले, आप एक अस्पताल के गाउन में बदल जाएंगे और आईवी के माध्यम से दवा, तरल पदार्थ और संज्ञाहरण प्राप्त करेंगे। जब संज्ञाहरण काम करना शुरू करता है, तो आप गहरी, दर्द रहित नींद में पड़ जाएंगे।

  • पहला कदम – आपका सर्जन आपकी छाती के बीच में चीरा लगाकर शुरू करता है। आपका रिब पिंजरा फिर आपके दिल को उजागर करने के लिए फैला हुआ है। आपका सर्जन न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी का विकल्प भी चुन सकता है, जिसमें छोटे कट और विशेष लघु उपकरण और रोबोट प्रक्रिया शामिल हैं।
  • कार्डियोपल्मोनरी बाईपास मशीन से जुड़ना
  • आप एक कार्डियोपल्मोनरी बाईपास मशीन से आदी हो सकते हैं जो आपके शरीर के माध्यम से ऑक्सीजन युक्त रक्त को प्रसारित करता है, जबकि आपका सर्जन आपके दिल पर काम करता है।
  • कुछ प्रक्रियाओं को “ऑफ-पंप” किया जाता है, जिसका अर्थ है कि आपको कार्डियोपल्मोनरी बाईपास मशीन से जोड़ना आवश्यक नहीं है।
  • कलम बांधने का काम – आपका सर्जन तब आपकी धमनी के अवरुद्ध या क्षतिग्रस्त हिस्से को बायपास करने के लिए पैर से एक स्वस्थ रक्त वाहिका को निकालता है। ग्राफ्ट का एक सिरा रुकावट के ऊपर और दूसरा सिरा नीचे से जुड़ा होता है।
  • अंतिम चरण – जब आपका सर्जन किया जाता है, तो बाईपास के कार्य की जांच की जाती है। एक बार बाईपास काम कर रहा है, तो आपको निगरानी के लिए सघन चिकित्सा इकाई (ICU) तक ले जाया जाएगा, बैंड किया जाएगा, और ले जाया जाएगा। हार्ट बाईपास की सर्जरी में कम से कम तीन से छे घंटे लगते है। यह एक जटिल प्रक्रिया है। जितनी अधिक धमनियों को ग्राफ्टिंग की जरूरत है। उतना अधिक समय लग सकता है।

बाईपास सर्जरी के बाद देखभाल कैसे करे ? (Bypass Surgery ke Bad dekhbhal Kaise kare in Hindi)

  • सर्जरी के बाद मरीज को (ICU) में आमतौर पर, लगभग एक सप्ताह तक अस्पताल में रखा जाता है। ताकि मरीज की अच्छी से देखभाल हो सके। जटिलताएं संभव हैं लेकिन असामान्य हैं। यह मानते हुए कि कोई जटिलता नहीं है, ज्यादातर लोग सर्जरी के तुरंत बाद जीवन की बेहतर गुणवत्ता की उम्मीद कर सकते हैं।
  • शरीर में जो सूजन आई होती है। वो ठीक होने में कम से कम 7 से 10 दिन लग जाते है। अगर ग्राफट पेरो की नसों से लिया गया हो तो मरीज को स्टाकिंग पहनना चाहिए।
  • टाके की रोजाना जांच करना चाहिए।
  • सर्जरी के बाद शारीरिक गतिविधि करना कम कर दे। क्योंकि आपका शरीर कमजोर हो जाता है। चीरा भी लगा होता है इसलिए ऐसे समय में भारी वजन ना उठाये कोई भारी काम ना करे।
  • अपने आहार में खास ध्यान देना चाहिए। कोलेस्ट्रॉल कम युक्त भोजन करे। रक्तचाप की नार्मल जांच करते है। आप भोजन नमक और अचार की मात्रा कम ले। (और पढ़े – ओट्स के फायदे दिल के लिए)

अगर आपको बाईपास सर्जरी के बारे अधिक जानकारी एव उपचार करवाना चाहते है, मेदांता अस्पताल के Dr Naresh Trehan से संपर्क कर सकते है। जो की बहुत ही अनुभवी Cardiovascular and Cardiothoracic surgeon में से एक है। बाईपास सर्जरी की जानकारी दी गई है।

हमारा उद्देश्य केवल आपको जानकारी प्रदान करना है। ना की किसी प्रकार के दवा, उपचार, सर्जरी करने की सलाह देता है। उपचार की सलाह केवल चिकिस्तक ही दे सकते है। क्योंकि चिकिस्तक से अच्छा कोई सलाह नहीं दे सकता है। 

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