पाचन तंत्र के रोग क्या है। Digestive Disorders in Hindi

Login to Health नवम्बर 28, 2019 Lifestyle Diseases 27 Views

Digestive Disorders Meaning in Hindi

हमारे शरीर में पाचनतंत्र के अंदर और भी अंग स्तिथ है जो एक ट्यूब से दूसरे ट्यूब तक जुड़े होते है। पाचनतंत्र में गुर्दा से लेकर मुँह तक सभी अंग है जिनमे भोजन की नली, छोटी आंत और बड़ी आंत शामिल है। पाचन प्रणाली में लिवर, पित्ताशय की थैली, आग्रशय है। यह सब पाचन क्रिया को करने में रस का निर्माण करता है। पाचन तंत्र सभी पोषक तत्वों को अवशोषित करता है और खराब पदार्थो को शरीर से बाहर निकालता है। अगर पाचन संबंधित समस्या हो जाती है तो उसे पाचन तंत्र रोग कहते है। पाचन तंत्र से जुडी बहुत सी समस्या जैसे: सीने में जलन होना, इरिटेबल सिंड्रोम, इलेमेट्री बॉउल डिजीज आदि है। पाचन तंत्र के रोग को भूल कर भी लापरवाही न करे बल्कि उपचार करवाए। पाचन तंत्र रोग होने पर विभिन्न लक्षण नजर आने लगते है जैसे: कब्ज, दस्त होना, निगलने में कठिनाई, पाचन प्रणाली रक्त आना आदि। अगर आपको ऐसे लक्षण हो रहे है, तो चिकिस्तक को खुलकर बताये ताकि अच्छे से आपका उपचार हो सके। चिकिस्तक पाचन तंत्र संबंधित रोग को जांच करने के लिए मरीज का रक्त जांच, एक्स-रे, एंडोस्कोपी जांच कर निदान हेतु उपचार करते है। चलिए आपको (Digestive Disorders) पाचन तंत्र के रोग के बारे में विस्तार से बताने का प्रयास किया गया है।

  • पाचन तंत्र बीमारी के कारण क्या है ? (What are the Causes of Digestive Disorders in Hindi)
  • पाचन तंत्र बीमारी के लक्षण क्या है ? (What are the Symptoms of Digestive Disorders in Hindi)
  • पाचन तंत्र बीमारी के परिक्षण ? (Diagnosis of Digestive Disorders in Hindi)
  • पाचन तंत्र बीमारी के उपचार क्या है ? (What are the Treatments for Digestive Disorders in Hindi)
  • पाचन तंत्र बीमारी से बचाव ? (Prevention of Digestive Disorders in Hindi)

पाचन तंत्र बीमारी के कारण क्या है ? (What are the Causes of Digestive Disorders in Hindi)

पाचन तंत्र रोग के निम्नलिखित कारण होते है।

  • पेट में अल्सर होना।
  • कब्ज के कारण अवस्थ और सुस्तीपन होता है।
  • अधिक मात्रा में मीठा खाने से कब्ज की समस्या होती है।
  • भोजन में अधिक मात्रा में तरल पदार्थ व पानी मौजूद होना।
  • शराब, कॉफी, चाय आदि का सेवन करना।
  • पित्त की पथरी होने का सटीक कारण पता नहीं चल पाया है। लेकिन पित रस शरीर के कोलेस्ट्रॉल को पचाने में मदद करता है। अगर पित्तरस के बहाव में बाधा उत्पन्न हो जाती है तो पित्त का कारण बनता है।
  • क्रोन रोग हो जाना यह पाचन संबंधित विकार है। (और पढ़े – क्रोन रोग क्या है)
  • पाचन तंत्र में सूजन होने के कारण अलसेरेक्टिव रोग होता है।
  • बवासीर होने के कारण पाचन प्रणाली से संबंधित है। इसमें मोटापा, शौचालय में लंबे समय तक बैठना, मल त्यागने के दौरान अधिक दाब लगाना, कम फाइबरयुक्त आहार खाना आदि जिम्मेदार है।
  • एसिड भाटा रोग में पेट में कुछ अजीब चीज चले जाना जैसे शराब का सेवन, अधिक मात्रा में चाय कॉफी लेना, शरीर भरी होना आदि शामिल है। जो पाचन तंत्र रोग का कारण बनता है।

पाचन तंत्र बीमारी के लक्षण क्या है ? (What are the Symptoms of Digestive Disorders in Hindi)

पाचन तंत्र की बीमारी के बहुत से लक्षण होते है लेकिन सभी लक्षण केवल एक ही व्यक्ति में नजर नहीं आते है। यह भिन्न-भिन्न नजर आते है।

  • सीने में जलन होना।
  • कब्ज होना।
  • मल में रक्त आना।
  • भूख कम लगना।
  • थकावट महसूस होना।
  • मल त्याग के दौरान दर्द होना। (और पढ़े – बवासीर क्या है)
  • काले रंग का मल होना।
  • अपच होना।
  • निगलने में दर्द होना।
  • सुस्ती होना।
  • जी मिचलाना।
  • मलती होना।
  • पेट में गैस होना।
  • पेट फूलना।
  • दस्त होना।

पाचन तंत्र बीमारी के परिक्षण ? (Diagnosis of Digestive Disorders in Hindi)

पाचन तंत्र के रोग का परीक्षण करने के लिए मरीज के लक्षणो के आधार पर निदान हेतु परीक्षण किया जाता है। इसके अलावा मरीज के मेडिकल स्तिथि के बारे में पूछते है। अगर आप कोई दवा ले रहे है, तो इसके बारे में जानकारी लेते है। पाचन तंत्र के रोग के लिए चिकिस्तक निम्न परीक्षण कर सकते है।

  • सिटी स्कैन व एमआरआई स्कैन।
  • स्टूल टेस्ट।
  • अल्ट्रासॉउन्ड।
  • एक्स-रे। यह सब परीक्षण कर मरीज का उपचार किया जाता है।

पाचन तंत्र बीमारी के उपचार क्या है ? (What are the Treatments for Digestive Disorders in Hindi)

पाचन तंत्र का उपचार मरीज के लक्षण के आधार पर उपचार किया जाता है। इसके अलावा बिना चिकिस्तक की सलाह के किसी भी तरह की दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। पाचन तंत्र के रोग अपने जीवनशैली में बदलाव कर हम ठीक कर सकते है। अगर दवाओं से रोग ठीक नहीं हो पाता है, तो चिकिस्तक कुछ ऑपरेशन करने की सलाह दे सकते है।

  • पेट में छाले का उपचार करने के लिए चिकिस्तक एंटीबायोटिक दवाओं की सलाह सकते है। ताकि आपके छाले ठीक हो सके।
  • कब्ज का उपचार करने के लिए मरीज को मल हो सके इसके लिए कुछ दवाइयों की सलाह देते है।
  • पित्ताशय की पथरी का उपचार करने के लिए चिकिस्तक लक्षण के आधार पर ऑपरेशन करने का निर्णय लेते है।
  • अगर सीलिएक रोग है तो उसे ठीक करने के लिए ग्लूटेन फ्री आहार का सेवन करने कि सलाह देते है।
  • पाचन तंत्र में सूजन और लालिमा का उपचार करने के लिए पोषक तत्वों से बहरे सप्लीमेंट्स दिए जाते है ताकि इन समस्या से बचाव हो सके।
  • बवासीर के उपचार करने के मरीज के लक्षणो को देखते है। इसके लिए फाइबर युक्त आहार का अधिक सेवन करना चाहिए। बवासीर के मरीज को चिकिस्तक कुछ क्रीम लगाने की सलाह देते है। ताकि शौच करने में कठिनाई ना हो।

पाचन तंत्र बीमारी से बचाव ? (Prevention of Digestive Disorders in Hindi)

पाचन तंत्र की बीमारी से बचाव करने के लिए कुछ निम्न उपाय अपना सकते है। सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन न करे।

  • धीरे-धीरे भोजन को खाना चाहिए।
  • भोजन को एक साथ अधिक ना खाये।
  • रात के समय हल्का खाना खाये।
  • धूम्रपान ना करें।
  • अधिक चिकना व मसालेदार भोजन न खाये।
  • खाने के बाद तुरंत नहीं लेटना चाहिए।
  • रोजाना व्यायाम और योगा करना चाहिए।
  • अपने हाथो की अच्छी सफाई कर भोजन का सेवन करें।
  • अगर आपको मल त्याग ने की इच्छा हो रही है, तो तुरंत शौच जाना चाहिए। उस समय नहीं जाने से मल कठोर हो जाता है इस कारण मल त्याग ने में कठिनाई व दर्द होता है।
  • जो भी आप दवाएं ले रहे है उनकी अच्छी से जांच कर सेवन करे क्योंकि कुछ दवाएं पेट में जलन की समस्या को उत्पन्न करता है।

अगर आपको पाचन तंत्र बीमारी के बारे में अधिक जानकारी एव उपचार करवाना हो, तो किसी अच्छे (Gastroenterologist) से संपर्क करें।

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है। 

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