पोलियो क्या है ? जानिए इसके कारण, लक्षण, इलाज, व बचाव। What is Polio in Hindi.? Learn its Causes, Symptoms, Treatments And Prevention Polio Meaning in Hindi

Login to Health अगस्त 6, 2019 Lifestyle Diseases 106 Views

Polio Meaning in Hindi.

भारत में लगभग 30 साल पहले के समय में बच्चो को पोलियो होना एक आम बात हुआ करती थी। लेकिन भारत एक विशाल आबादी वाला देश है। उस समय कई लोग इस बीमारी का शिकार हुए थे। किंतु भारत सरकार के कठिन प्रयासों से आज भारत में पोलियो केवल नाम की तरह हो गया है। यह हमारे लिए किसी प्रगती या उपलब्धि से कम नहीं है। भारत में पोलियो का अंतिम मामला पंजाब और गुजरात की रिपोर्ट में हुआ था। 27 मार्च 2014 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को पोलियो से मुक्त बताया है। लोगो को पोलियो से जागरूक करने के लिए हर साल 24 अक्टूबर को पुरे विश्व में वर्ल्ड पोलियो डे मनाया जाता है। चलिए आज पोलियो के बारे में कुछ विशेष जानकारी प्राप्त करते है।

  • पोलियो क्या है ? (What is Polio in Hindi)
  • पोलियो कितने प्रकार के होते है ? (What are The Types of Polio in Hindi)
  • पोलियो होने के कारण क्या है ? (What are The Causes of Polio in Hindi)
  • पोलियो के लक्षण क्या है ? (What are The Symptoms of Polio in Hindi)
  • पोलियो का इलाज क्या है ? (What are The Treatments for Polio in Hindi)
  • पोलियो से बचाव कैसे करें ? (How to Prevent Polio in Hindi)

पोलियो क्या है ? (What is Polio in Hindi)

पोलियो को पोलियोमेलाइटिस भी कहते है। यह एक गंभीर संक्रमण रोग है। जो पोलियो वायरस यानि संक्रमण के कारण होता है। यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यह संक्रमण व्यक्ति के शरीर की रीढ़ की हड्डियों एव मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है। जिसके कारण व्यक्ति को लकवा यानि शरीर के कुछ हिस्से ठीक से कार्य नहीं कर पाते है।

पोलियो कितने प्रकार के होते है ? (What are The Types of Polio in Hindi)

पोलियो तीन प्रकार के होते है।

  • बुलबार (Bulbar) ;- बुलबार से पीड़ित लोगो की मांसपेशियो में कमजोरी व श्वसन से जुडी समस्या हो सकती है।
  • स्पाइनल परलैटिक (Spinal Paralytic) :- स्पाइनल परलैटिक से ग्रसित व्यक्ति के शरीर के कुछ हिस्से में या पुरे शरीर में लकवा हो जाता है।
  • नॉन-परलैटिक (Non -Paralytic) :- नॉन-परलैटिक से ग्रसित व्यक्ति को लकवा की शिकायत नहीं होती है।

पोलियो होने के कारण क्या है ? (What are The Causes of Polio in Hindi)

पोलियो होने के अनेको कारण हो सकते है। इनकी सूची इस प्रकार है।

  • पोलियो वायरस दूषित पानी में और भोजन या वायरस से संक्रमित व्यक्ति के साथ सीधे संपर्क में आने से फैलता है। पोलियो इतना अधिक संक्रामक है। व्यक्ति के साथ रहने वाले को हो जाता है।
  • संक्रमित मल के आस-पास आने वाली खिलौने जैसी वस्तुओं के प्रसरित होने के संपर्क में आने से व्यक्ति पोलियो वायरस से ग्रस्त हो जाता है।
  • पोलियो का संक्रमण कभी-कभी छींकने या खाँसने से भी यह वायरस संचार करता है। क्योंकि गले या आंतो में रहता है।
  • शौचालय में अक्सर कई लोग आते-जाते रहते है। लेकिन यदि शौचालय या फ्लस को संक्रमित व्यक्ति उपयोग किया हो। इसके बाद कोई स्वस्थ व्यक्ति वही शौचालय या फ्लस को उपयोग करता है तो उसे भी संक्रमण हो सकता है।
  • यदि गर्भवती महिला वायरस यानि एचआईवी पॉजिटिव होती है। तो उसका बच्चा भी वायरस से संक्रमित हो सकता है।

पोलियो के लक्षण क्या है ? (What are The Symptoms of Polio in Hindi)

पोलियो के लक्षण पोलियो के प्रकार पर निर्भर होते है। कुछ लोगो को नॉन-परलैटिकहो ता है। जिसमे हलके फ्लू होते है और यह 10 दिनों तक नजर आते है।

  • बुखार।
  •  सिरदर्द।
  • थकान।
  • उल्टी।
  • गले में खराश।
  • गर्दन में दर्द।
  • मांसपेशियो में कमजोरी होना।
  • मेनिनजाइटिस।
  • बाहों या पैरों में दर्द या ऐठन होना।
  • पीठ में दर्द।

पोलियो का इलाज क्या है ? (What are The Treatments for Polio in Hindi)

पोलियो का इलाज मुख्य रूप से दो तरह से किया जाता है।

  • पहला पोलियो की ड्राप के द्वारा 5 साल से कम आयु वाले बच्चो को पिलाकर किया जाता है।
  • दूसरा पोलियो का इलाज इंजेक्शन के माध्यम से पोलियो ग्रस्त व्यक्ति को ठीक करने के लिए लगाया जाता है।

पोलियो से बचाव कैसे करें ? (How to Prevent Polio in Hindi)

  • पोलियो से बचाव करने के लिए छोटे बच्चों को सही समय पर टिके लगवाना चाहिए।
  • बच्चों को IVP के अनुसार चार खुराक दिए जाते है। इसमें २ महीने, ४ महीने, ६ से १८ महीने, और ४ से ६ वर्ष में एक पोलियो का बूस्टर दिया जाता है।
  • सीसीडी की सलाह के अनुसार पोलियो ग्रस्त इलाके में यात्रा करने से जाने से पहले अपने बच्चे के लिए पोलियो शॉट बूस्टर जरूर ले।
  • इस बात का विशेष ध्यान रखे 5 साल तक के बच्चो को हमेशा पोलियो ड्राप पिलाना चाहिए। जिससे बच्चे को पोलियो की शिकायत ना हो।

अगर आपको पोलियो वायरस से जुडी जानकारी व इलाज करवाना हो तो तुरंत जनरल फिजिशियन डॉक्टर (General Physician Doctor) से संपर्क करे।

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