गर्भावस्था में थकान की समस्या Fatigue During Pregnancy in Hindi

Login to Health दिसम्बर 10, 2019 Womens Health 104 Views

Fatigue During Pregnancy in Meaning Hindi

गर्भावस्था महिला के लिए एक ऐसी अवस्था होती है जिसमे शरीर में कई तरह के बदलाव होते रहते है। लेकिन महिलाओं को अधिक थकान आमतौर पर पहले महीने अधिक रहता है। गर्भावस्था के दूसरे व तीसरे महीने में थकान की समस्य ठीक हो जाती है। लेकिन अगले महीने में थकान वापस हो सकती है। गर्भावस्था में महिलाओं को नींद न आने की समस्या, पेरो में ऐंठन, दर्द, पेशाब व सीने में जलन आदि लक्षण महसूस हो सकते है। महिलाओं को इन समस्या को दूर करने का प्रयास करना चाहिए ताकि आप थकावट से आराम मिल सके। कुछ परिस्थितियों में महिलाओं के स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति जैसे खून की कमी, तनाव, अवसाद आदि के कारण से थकान की समस्या हो सकती है। ऐसी समस्याओं को ठीक करने के लिए चिकिस्तक से सलाह लेनी चाहिए। चलिए इस लेख में आपको गर्भवस्था में थकान की समस्या के कारण व उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है।

  • गर्भावस्था में थकान के कारण क्या है ? (Causes of Fatigue During Pregnancy in Hindi)
  • गर्भावस्था में थकान कब होता है ? (When Does Pregnancy Fatigue in Hindi)
  • गर्भावस्था में थकान का उपचार क्या है ? (Treatments for Pregnancy Fatigue in Hindi)

गर्भावस्था में थकान के कारण क्या है ? (Causes of Fatigue During Pregnancy in Hindi)

  • गर्भावस्था में महिलाओं को माँ बनने की खुशी तो रहती है साथ ही कष्ट दायक स्तिथि भी उत्पन्न होती है। गर्भवस्था के हर चरण में शरीर बहुत से बदलाव होते रहता है। लेकिन पहली चरण में महिलाओं को अधिक सामना करना पड़ता है। इसके अलावा महिलाओं की ऊर्जा की खपत अधिक होती है और यही थकान का मुख्य कारण होता है। गर्भावस्था में अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्या जिसमे महिला के ब्लड स्तर में कमी, पाचन क्रिया का कमजोर होना आदि शामिल है। पहले या तीसरे महीने में प्लेट्स का निर्माण पूरी तरह से हो जाता है और शरीर में अन्य हार्मोनल और भावनात्मक भावनाएं बदलती है।
  • गर्भावस्था में थकान तीसरी माह में अधिक इसलिए होता है क्योंकि परिवर्तन के साथ महिला का वजन में वृद्धि हो जाता है। अगर महिला थोड़ा भी काम करे तो उसे थकान ही होती है। इसके वजह से महिलाओं के कमर दर्द, पीठदर्द, सीने में जलन, जी मिचलाना, नींद अधिक आना आदि हो सकता है।
  • सही तरह का पोषक तत्व न मिलने के कारण महिला का शरीर कमजोर हो जाता है। थोड़ा सा भी ऊर्जा खर्च करने पर थकान की समस्या हो जाती है। इसके अलावा महिला अगर नौकरी करती है या उसके और भी बच्चे है तो इनका पालन पोषण करने में माता व्यस्त हो जाती है जो अक्सर थकान का कारण बनता है।
  • अगर महिला को गर्भावस्था के पहले महीने या तीसरे महीने में अत्यधिक थकान हो रही है तो ऐसे में आपको महिला चिकिस्तक से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा महिला को बेहोशी बहुत हो रही है तो आयरन की कमी हो सकती है जिसे दूर करने के लिए आयरन युक्त फल का सेवन करे। महिला को अपने सातवे महीने में एक जांच जरूर करवाना चाहिए ताकि चिकिस्तक आपके तनाव, चिंता, अवसाद को दूर करने में मदद कर सके। (और पढ़े – आयरन की कमी)

गर्भावस्था में थकान कब होता है ? (When Does Pregnancy Fatigue in Hindi)

थकान गर्भावस्था का पहला लक्षण होता है जो पहले महीने में महिलाओं को होता है। गर्भधारण के पहले और तीसरे माह में थकान की समस्या अधिक देखने को मिलती है। थकावट की समस्या सभी महिलाओं में एक जैसी नहीं होता है बल्कि अलग-अलग तरह से हो सकता है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार पहले महीने में अधिक थकान महसूस होता है जो तीसरी माह कम या अधिक हो सकता है। शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन के वृद्धि होने कारण थकान होती है। इस कारण गर्भवती महिला को अधिक नींद आती है। ऐसी अवस्था में आपको भरपूर विटामिन लेने की जरूरत होती है। इसके अलावा अपने चिकिस्तक से सलाह ले सकती है। (और पढ़े – विटामिन ए की कमी)

गर्भावस्था में थकान का उपचार क्या है ? (Treatments for Pregnancy Fatigue in Hindi)

गर्भावस्था में थकान की समस्या को कम करने के लिए चिकिस्तक आपको निम्नलिखित सुझाव दे सकते है।

  • अगर आप पहली बार माँ बनने जा रही है तो आपको अपना अधिक ख्याल रखना चाहिए। इसके अलावा दूसरा बच्चा है तो आपको सही तरीके से स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। जैसे की घर के काम को न करे बल्कि अपने किसी रिश्तेदार को घर बुला ले। अगर आप आर्थिक स्तिथी अच्छी है तो काम वाली रख सकती है। घर के कपडे को ऐसी हालत में न धोये और सभी को अपने कपडे खुद धोने की सलाह दे। गर्भावस्था में अधिक आराम की जरूरत होती है। ताकि बच्चे का विकास हो सके।
  • गर्भधारण के कुछ महीने होने पर वजन बढ़ने लगता है। जिस वजह से महिलाओं में अनेको तरह से थकान महसूस होने लगती है। गर्भावस्था में अपने साथी को छोटी से बड़ी समस्या के बारे में चर्चा करे ताकि आपका साथी आपका सही तरीके से देखभाल कर सके। अगर आपका साथी बाहर है तो घर में किसी के मदद लेने से हिचकिचाए नहीं और मदद ले।
  • अगर आपको नींद अधिक आ रही है तो एक घंटा पहले सोने की कोशिश करे क्योंकि थकान के कारण नींद अधिक आती है।
  • गर्भावस्था में दर्द को भूलकर माता को खुश रहना चाहिए और हमेशा आराम के बजाय शाम और सुबह को टहलना चाहिए ताकि आपको स्वच्छ हवा की प्राप्ति हो। इसके अलावा आप नौकरी पेशी महिला है तो लांच समय में टेबल पर पैर रख बैठे।
  • अपने ऊर्जा को बनाये रखने के लिए आपको संतुलित आहार की जरूरत होती है। इस दौरान चिकिस्तक द्वारा दिया गया डाइट चार्ट फॉलो करना चाहिए। आपको कितना केलेरी लेना है या नहीं और क्या खाना है और क्या नहीं खाना है आदि। क्योंकि कुछ गलत चीज़ का सेवन नुकसानदायक हो सकता है।
  • गर्भावस्था के समय खाली पेट न रहकर कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। दिन में तीन से चार बार खाने से थकान से आराम मिलता है और आपके रक्त में मौजूद शुगर को नियंत्रित करके ऊर्जा को बरकार करता है। भोजन में पोषक तत्वों का सेवन अधिक करे।
  • गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को व्यायाम थोड़ी मात्रा में करना यानि पार्क में धीरे धीरे चलना चाहिए व योग ध्यान लगाना चाहिए। दिमाग में एक अलग शांति होती है और मन खुश रहता है। माता के सेहत के लिए फायदेमंद होता है।

अगर गर्भावस्था में किसी तरह की समस्या हो रही है तो आपको स्त्री विशेषज्ञ Gynecologist से संपर्क करें।

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है। 

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