मासिक धर्म में देरी होने के कारण। Masik Dharm me Deri Hone ke Karan in Hindi

Login to Health जनवरी 8, 2020 Womens Health 29 Views

Masik Dharm me Deri Hone ka Meaning in Hindi

मासिकधर्म देर से आना कुछ महिलाओं में आम होता है। लेकिन कुछ महिलाये जो अनचाहे गर्भ से बचने के लिए मासिकधर्म की प्रतिशा करती है और मासिकधर्म का इंतजार करती है। जैसा की आपको पता होगा लड़की में प्यूबर्टी 12 साल से 16 साल की उम्र होता है और 45 से 55 की उम्र होने पर मेनोपॉज में चले जाते है यानि मासिकधर्म आना बंद हो जाते है। मासिकधर्म का चक्र सभी महिलाओं का अलग होता है, क्योंकि कुछ महिलाओं में सामान्य चक्र 28 दिनों का होता है। इसके अलावा कुछ महिलाओं में 32 दिन का होता है और कुछ महिलाओं में अनियमित मासिकधर्म होने लगता है जो बाद में मेनोपॉज़ की स्तिथि में चला जाता है। इसके अलावा किसी महिला को 32 दिन से अधिक समय लग रहा है, तो इस समस्या को लेट पीरियड कहते है। अक्सर मासिकधर्म उन महिलाओं को देरी से आते है जिनके मासिकधर्म अनियमित रहते है। ऐसा महिलाओं में गर्भनिरोधक की गोलियों के सेवन से होता है या मेनोपॉज की स्थिति के पास पहुंचने से होता है। अत्यधिक व्यायाम करने से पीरियड्स देरी से आ सकते है। अगर कोई महिला मेनोपॉज़ में जा रही है तो उसका खास उपचार उपलब्ध नहीं रहता है। इसके अलावा गर्भधारण के समय मासिकधर्म देरी से हो रहा है तो महिला विशेषज्ञ से सलाह ले। चलिए इस लेख में महिलाओं को मासिकधर्म के देरी से आने के कारण और लक्षण के बारे में विस्तार से बताने वाले है।

  • मासिक धर्म में देरी आने के कारण क्या है ? (Masik Dharm me Deri Se aane ke Karan kya Hai in Hindi)
  • मासिकधर्म में देरी के लक्षण क्या है ? (Masik Dharm me Deri aane ke Laksan in Hindi)
  • मासिकधर्म में देरी का उपचार क्या है ? (Masik Dharm me Deri ka Upchar in Hindi)
  • मासिकधर्म में देरी होने से बचाव कैसे करें ? (Masik Dharm me Deri hone se Bachaw in Hindi)

मासिक धर्म में देरी आने के कारण क्या है ? (Masik Dharm me Deri Se aane ke Karan kya Hai in Hindi)

मासिकधर्म में देरी होने के अनेको कारण हो सकते है।

  • महिलाओं में कुछ प्रकार की गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से मासिकधर्म में प्रभाव पड़ता है और इस वजह से मासिकधर्म देरी से या अनियमित होने लगते है। गर्भनिरोधक गोलिया गर्भ को रोकने के लिए करती है।
  • अगर किसी महिला को सीलिएक रोग है तो इस वजह से सूजन जलन की समस्या हो सकती है। छोटी आंत प्रभावित होने से पोषक तत्व अवशोषित नहीं हो पाता है और मासिकधर्म देरी से आने लगता है।
  • अगर महिला को लंबे समय से कोई रोग है तो उसका असर आपके मासिकधर्म पर पड़ता है। इस कारण मासिकधर्म अपने समय पर न होकर देरी से आता है।
  • यदि थायरॉइड से जुडी समस्या है तो मासिकधर्म पर अधिक प्रभाव पड़ता है और हार्मोन्स का संतुलन ठीक से हो नहीं पाता है और मासिकधर्म देर से आने लगता है।
  • शरीर का मोटापा अधिक होने पर मासिकधर्म आने में समस्या होती है। इसलिए अपने वजन को कम करे और मासिकधर्म में हो रही देरी से बचें।
  • अगर आप हमेशा तनाव में रहती है तो कुछ दिनों तक आराम करने की कोशिश करे ताकि आपके मासिकधर्म आने में समस्या न हो। इसके अलावा शारीरिक व मानसिक तनाव मासिकधर्म में देरी करता है। (और पढ़े – अनियमियत मासिकधर्म क्या है)

मासिकधर्म में देरी के लक्षण क्या है ? (Masik Dharm me Deri aane ke Laksan in Hindi)

मासिकधर्म में देरी होने के अनेको लक्षण नजर आ सकते है लेकिन सभी महिलाओं में सारे लक्षण एक साथ नजर नहीं आते है बल्कि अलग -अलग आते है।

  • जैसा की आपको पता है महिलाओं का मासिकधर्म का चक्र एक दूसरे से अलग होता है। इसके अलावा महिलाओं चार से पांच दिनों तक रक्तश्राव व सात दिनों तक हो सकता है। अगर सात दिनों से अधिक रक्तश्राव हो रहा है तो चिकिस्तक से संपर्क करना चाहिए। सामान्य रूप से मासिकधर्म की अवधी 28 दिनों की होती है। कुछ महिलाओं में मासिकधर्म की अवधी 32 दिन के बिच में होता है। इस दौरान खून में काफी बदलाव नजर आता है। इसका मुख्य लक्षण 35 दिन में मासिकधर्म होता है। इसके अलावा मासिकधर्म के दौरान खून के थक्के आना यह लक्षण अनियमित व देर से मासिकधर्म आने का होता है।
  • अगर आपको आपके सामान्य मासिकधर्म से अलग लग रहा है तो आपको अपने चिकिस्तक से संपर्क करना चाहिए। चिकिस्तक आपके परीक्षण कर निदान कर सकते है। इसके अलावा अगर आपको कुछ और लक्षण नजर आ रहे है।
  • बुखार आना।
  • मलती आना।
  • उल्टी आना।
  • सात दिन से अधिक ब्लीडिंग होने लगना।
  • अधिक रक्त आना।
  • मेनोपॉज होने के एक साल बाद पीरियड्स आना। (और पढ़े – मेनोपॉज़ होने का कारण)
  • आपको चिकिस्तक से संपर्क कर यह सब लक्षण को बताना चाहिए।

मासिकधर्म में देरी का उपचार क्या है ? (Masik Dharm me Deri ka Upchar in Hindi)

मासिकधर्म देरी से आने की स्थिति अत्यधिक गंभीर नहीं होती है। इसका उपचार करने की खास जरुरत नहीं होती है, लेकिन समस्या होने पर एक बार चिकिस्तक से जांच करवा ले की मासिकधर्म क्यों देरी से आ रहा है। हालांकि मासिकधर्म देरी से आने की समस्या का उपचार करने के लिए कुछ निम्न सुझाव दे सकते है।

  • तनाव और पोषक सम्बंधित समस्या को ठीक करने के लिए सर्वाइकल थरेपी का उपयोग कर सकते है। इसमें चिंता मुक्त होने की ट्रेनिंग दी जाती है।
  • अगर मोटापा के कारण मासिकधर्म में देरी हो रही है तो वजन कम करने की सलाह देते है और अपने भोजन में फिबेरयुक्त चीजे खा सकते है। रोजाना व्यायाम करना चाहिए।
  • थायरॉइड की समस्या के कारण पीरियड्स लेट हो रहा है तो, चिकिस्तक उपचार कर थायरॉइड ठीक करने की कोशिश करते है और कुछ मामलो में सर्जरी करते है। (और पढ़े – थायरॉइड क्या है)

मासिकधर्म में देरी होने से बचाव कैसे करें ? (Masik Dharm me Deri hone se Bachaw in Hindi)

  • मासिकधर्म में देरी होने का कारण आपका तनाव भी हो सकता है। इसलिए अगर लैपटॉप पर काम करती है तो काम बंद कर आराम करे भले ही आधे घंटे का हो लेकिन आराम लेना चाहिए। तनाव मुक्त होने पर पीरियड्स आने की संभावना रहती है।
  • मासिकधर्म की तारिक को याद रखे कम से कम तिन महीनो को नोटिस करे आपका पीरियड्स कैसा हो रहा है और रक्त में बदलाव क्या नजर आ रहा है। इन सब बातो को ध्यान में रखकर चिकिस्तक से बतानी चाहिए।
  • स्वस्थ व पौष्टिक आहार की कमी से मासिकधर्म ठीक से हो नहीं पाता है इसलिए अपने भोजन में स्वस्थ आहार शामिल करें। पोषक तत्व की कमी पूरी होने से पीरियड्स समय पर होंगे।
  • बहुत से मामलो में गर्म पानी से स्नान करने या गर्म पानी पोटली पेट पर रखने से मासिकधर्म जल्दी आने की संभावना बनती है। गर्मपानी उत्तेजित करते है और इस वजह से मासिकधर्म लेट नहीं आता है।
  • मासिकधर्म आने की अवधि में अपने अंडरवियर में पैड लगाकर रखे क्योंकि मासिकधर्म आने पर रक्त को रोक सके। इसके अलावा अपने बैग में एक पैड जरूर रखे। (और पढ़े – मासिकधर्म में अधिक रक्तश्राव होना)

अगर किसी महिला को मासिकधर्म अनियमित या देरी से आने की समस्या हो रही है तो उनको महिला विशेषज्ञ (Gynecologist) से संपर्क करना चाहिए।

हमारा उद्देश्य आपको रोगो के प्रति जानकारी देना है हम आपको किसी तरह के दवा, उपचार, सर्जरी की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक दे सकता है क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा नहीं होता है। 

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