थायराइड सर्जरी (थायरोडेक्टॉमी) क्या हैं। Thyroidectomy in Hindi

Login to Health सितम्बर 18, 2020 Lifestyle Diseases 5522 Views

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थायराइड सर्जरी (थायरोडेक्टॉमी) क्या हैं (Thyroidectomy Meaning in Hindi)

थायरॉइड ग्रंथि एक तितली के आकार का अंग है जो आपकी गर्दन के आधार पर स्थित होता है और दो शंकु के समान लोब या पंखों से बना होता है। ग्रंथि हार्मोन स्रावित करके चयापचय को नियंत्रित करती है, और जब रोग थायरॉयड को प्रभावित करते हैं, तो इसका आकार या गतिविधि असामान्य हो सकती है।थायराइडेक्टोमी आपकी असामान्य थायरॉयड ग्रंथि के सभी या कुछ हिस्सों को हटाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा थायराइडेक्टोमी थायरॉइड कैंसर, गोइटर या थायरॉइड में गांठ होने की स्थिति में किया जाता है। थायरॉइड के ऑपेरशन में कम से कम दो घंटो का समय लगता है। सर्जरी के बाद मरीज को बहुत आराम की जरूरत होती है। हालांकि थायरॉइड सर्जरी सुरक्षित होती है, किंतु थायराइडेक्टोमी में कुछ खतरा हो सकते है। जैसे घाव के जगह संक्रमण या आवाज में बदलाव आदि। अगर किसी व्यक्ति की थायरॉइड ग्रथि पूरी निकाली जा रही है, तो ऐसे में चिकिस्तक उस व्यक्ति को पुरे जीवन थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी देते है। यदि थाइरोइड का एक हिस्सा निकाला है तो इस थेरेपी की जरूर नहीं है। इसमें सर्जरी के बाद मरीज को एक हफ्ते जांच के लिए जाना होता है ताकि चिकिस्तक घाव की जांच कर सके और जरुरत पड़ने पर कुछ अन्य जांच की सलाह दे सके। चलिए आज के लेख में आपको थाइरोइड सर्जरी यानि (थायरोडेक्टॉमी) के बारे में विस्तार से बताने का प्रयास करेंगे।

  • थायरोडेक्टॉमी के प्रकार ? (What are the Types of Thyroidectomy in Hindi)

  • थायरॉइड सर्जरी क्यों की जाती हैं ? (Thyroid surgery kyo ki jati hai in Hindi)

  • थायराइड सर्जरी किन लोगो को करवाना चाहिए और किन लोगो नहीं ? (Thyroid surgery kin logo ko karwana chahiye aur kin logo ko nahi in Hindi)

  • थायरोडेक्टॉमी कैसे की जाती हैं ? (Thyroidectomy kaise ki jati hai in Hindi)

  • थायरोडेक्टॉमी के बाद देखभाल कैसे करें ? (Thyroidectomy ke bad dekhbhal kaise kare in Hindi)

  • थायरोडेक्टॉमी की जटिलताएं क्या हैं ? (Thyroidectomy ki jatiltaye kya hai in Hindi)

  • भारत में थायरोडेक्टॉमी कराने का कितना खर्च लगता हैं ? (What is cost of Thyroidectomy in India in Hindi)

थायरोडेक्टॉमी के प्रकार ? (What are the Types of Thyroidectomy in Hindi)

थायराइडेक्टोमी के तीन प्रकार है। चलिए आगे बताते है।

  • पारंपरिक थायरॉयडेक्टॉमी (Conventional thyroidectomy) – इसमें थायरॉयड ग्रंथि तक सीधे पहुंचने के लिए गर्दन के केंद्र में एक चीरा बनाना शामिल है।
  • एंडोस्कोपिक थायरॉयडेक्टॉमी (Endoscopic thyroidectomy) – यह विधि गर्दन में छोटे चीरों का उपयोग करती है। सर्जिकल उपकरणों और एक छोटा वीडियो कैमरा इन चीरों के माध्यम से डाला जाता है, और कैमरा प्रक्रिया के माध्यम से आपके सर्जन को निर्देशित करता है।
  • रोबोट थायरॉयडेक्टॉमी (Robotic thyroidectomy) – इसमें आपकी छाती और बगल में चीरों के माध्यम से या चीरा लगाने वाले हिग के माध्यम से किया जाता है।

थायरॉइड सर्जरी क्यों की जाती हैं ? (Thyroid surgery kyo ki jati hai in Hindi)

चिकिस्तक थायरोडेक्टॉमी की सलाह कुछ निम्न स्तिथियो में देते है। जैसे, किसी को थाइरोइड कैंसर हो, हाइपरथायरोडिज्म, गोइटर या थाइरोइड नोडूयल्स जो गर कैंसर होते है इत्यादि। थाइरोइड कैंसर में कुछ लक्षण नजर आ सकते है।

  • सांस लेने में परेशानी होना।
  • आवाज में हमेशा बदलाव होना।
  • गले में सूजन आना।
  • गले में तेज गांठ बनना।
  • गले के हिस्से का दर्द कानो तक पहुंचना।
  • लगातार खांसी आना जिसमे जुखाम न हुआ हो।

सामान्य तौर पर नोड्यूल्स के कोई लक्षण नजर नहीं आते है, किंतु गले के बाहर कुछ गांठ की तरह दिखाई देने लगते है। हालांकि गांठ होने से भोजन निगलने में परेशानी होने लगती है। इसके अलावा अधिक थाइरोइड हार्मोन के बढ़ने से कुछ लक्षण का अनुभव हो सकता है।

  • वजन घटना।
  • बाल गिरना।
  • गर्मी से परेशान होना।
  • ह्रदय की गति बढ़ना।
  • थकान महसूस करना।
  • मांसपेशियो में कमजोरी होना।
  • सोने में परेशानी होना।
  • मकिसधार्म ठीक से नहीं आना।
  • बोवेल मूवमेंट का बढ़ जाना।

गोइटर की समस्या में कुछ लक्षण नजर आ सकते है।

थायराइड सर्जरी किन लोगो को करवाना चाहिए और किन लोगो नहीं ? (Thyroid surgery kin logo ko karwana chahiye aur kin logo ko nahi in Hindi)

मरीज के स्तिथि के आधार पर चिकिस्तक थायरोडेक्टॉमी की सलाह देते है।

  • जिनको थायराइड कैंसर की समस्या है तो उनको पूरी थाइरोइड ग्रंथि या थाइरोइड ग्रंथि के एक भाग को निकाला जा सकता है।
  • हाइपरथायराइडिज्म में यदि व्यक्ति आयोडीन की सर्जरी नहीं करवाना चाहते है, तो उनको एंटी थाइरोइड की दवा दे सकते है। इसके अलावा सर्जरी करवाने की सलाह दे सकते है।
  • व्यक्ति को गोइटर के कारण अधिक समस्या हो रही है, तो चिकिस्तक गोइटर हटाने हेतु सर्जरी की सलाह देते है। इसके अलावा व्यक्ति ठीक से सांस नहीं ले पा रहा और निगलने में परेशानी आदि में सर्जरी की सलाह दी जाती है। कुछ मामलो में हाइपरथायराइडिज्म के कारण सर्जरी करने की सलाह दे सकते है।
  • यदि किसी ऊतक की मिक्रोस्कोपिक और बायोप्सी के बाद गांठ की पहचान ठीक से नहीं हो पाती है तो चिकिस्तक थायरोडेक्टॉमी करवाने की सलाह दे सकते है। थायरोडेक्टॉमी से आसानी से कैंसर का पता लगाया जा सकता है।
  • आपको बता दे, इम्युनिटी सिस्टम का विकार होने के कारण हाइपरथायरॉइडिज्म होता है तो इसमें थायरोडेक्टॉमी नहीं करवाने की सलाह दी जाती है। खासतौर पर गर्भवती महिलाएं को बच्चे के जन्म के बाद ही सर्जरी की सलाह दी जाती है ताकि जच्चा -बच्चा के सेहत पर असर न पड़े। (और पढ़े – गर्भवती महिला की तनाव की समस्या)

थायरोडेक्टॉमी कैसे की जाती हैं ? (Thyroidectomy kaise ki jati hai in Hindi)

थायरोडेक्टॉमी में सबसे पहले एनेस्थिसिया दी जाती है। सर्जरी के दौरान मरीज को सांस लेने में परेशानी न हो इसलिए मरीज की श्वास नली में एक ब्रीथिंग ट्यूब डाली जाती है। सर्जरी के पहले मरीज का रक्तचाप देखी जाती है। इसके अलावा हार्ट रेट, ऑक्सीजन का स्तर जांच करने के लिए मॉनिटर लगाए जाते है। मरीज की नसों में एक इंद्रावेनस डाला जाता है ताकि इसके माध्यम से दवाएं और द्रव दिया जा सके। सर्जरी करने के लिए किसी एक प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। चलिए आगे बताते है।

कन्वेक्शनल थायरॉयडेक्टॉमी – इस प्रक्रिया में सर्जन आपके गले के सामने वाले भाग पर तीन से चार चीरा लगाता है। मांसपेशियो को हटाकर थायरॉयड ग्रंथि देखा जाता है। इसके बाद जरूर के आधार पर पूरी ग्रंथि या आधे भाग को निकाल दिया जाता है। थाइरोइड कैंसर के इलाज में लसिका ग्रंथिया को हटा दिया जाता है। हालांकि लसिका ग्रंथि की पहले जांच होती है कैंसर है या नहीं। सर्जन का प्रयास रेहता है पेराथायरॉइड को कोई नुकसान न हो क्योकि ये थाइरोइड ग्रंथि से जुडी होती है। थाइरोइड ग्रंथि निकालने के बाद सर्जन सभी मांसपेशियो को फिर साथ लाकर टाका लगा देते है।

रोबॉटिकली सर्जरी – इस प्रक्रिया में सर्जरी के लिए मरीज को टेबल पर लिटा दिया जाता है। फिर कंसोल की मदद से सर्जरी की जाती है, इसमें कंसोल में एक कैमरा होगा जिसमे विशेष उपकरण लगे रहते है। थाइरोइड का एक भाग या पूरा भाग निकाल दिया जाता है। इसके बाद चिरो को टांको की मदद से बंद कर देते है।

एंडोस्कोपिक थायरॉयडेक्टॉमी – इस प्रक्रिया में आपके गर्दन पर तीन या चार मिमी टाके लगाए जाते है। इन टांको के जरिये कुछ सर्जिकल उपकरण और एंडोस्कोप डाला जायेगा। एक छोटे कैमरे की मदद से सर्जन थाइरोइड ग्रंथि निकालने का निर्देशन देंगे। सर्जरी होने के बाद सभी चिरो को बंद कर देते है।

स्कॉरलेस थायरॉयडेक्टॉमी – इस प्रक्रिया को सर्जन लेप्रोस्कोपी द्वारा करते है। इसमें आपके होठ के निचले भाग में तीन या चार चीरा लगाकर उसमे एक कैमरा और सर्जिकल उपकरणों को डाला जायेगा। कैमरे की मदद से थायरोइड को निकाल देंगे वो भी निशान छोड़े।

थायरोडेक्टॉमी के बाद देखभाल कैसे करें ? (Thyroidectomy ke bad dekhbhal kaise kare in Hindi)

सर्जरी के बाद आपको देखभाल के लिए अस्पताल में ही रखा जायेगा। अस्पताल के नर्स और चिकिस्तक मरीज की देखभाल करते है।

  • मरीज के बीपी, ह्रदय की गति, नसे मॉनिटर किया जाता है। हालांकि जब तक मरीज को होश आता है तो सामान्य जगह पर शिफ्ट कर देते है। गले में ट्यूब लगाई है तो बाद में निकाल दिया जाता है।
  • सर्जरी के बाद मरीज आराम से खा पी सकते है, किंतु तुरंत खाने में थोड़ी परेशानी होगी। इसलिए नरम खाना और द्रव वाली चीजे कुछ दिन पिए।
  • अगर आपको छोटी सर्जरी है आप घर पर शिफ्ट हो रहे है तो अपने सिर को आराम दे और कोई ऐसा काम न करे जिससे सिर से गले पर वजन पडे।
  • सर्जरी के बाद एक हफ्ते तक चिकिस्तक के पास जांच के लिए जरूर जाएं। ताकि चिकिस्तक आपको सही सलाह दे सके।

थायरोडेक्टॉमी की जटिलताएं क्या हैं ? (Thyroidectomy ki jatiltaye kya hai in Hindi)

थायराइड की सर्जरी वैसे तो सुरक्षित मानी जाती है, किंतु कुछ जोखिम हो सकते हैं।

  • जैसे – घाव की जगह निशान बनाना।
  • गले के घाव से खून बहना।
  • आवाज में बदलाव हो सकता है क्योंकि वोकल कॉर्ड तक आने वाली नशे क्षति ग्रस्त होने की वजह से होता है।
  • सर्जरी के दौरान पैराथायराइड ग्रंथि को नुकसान पहुंच सकता है और इससे पैराथायराइड हार्मोन्स के स्तर में कमी आने लगती है। इसके अलावा कैल्शियम की कमी हो सकती है।
  • थाइरोइड हार्मोन अधिक मात्रा में होने से और थाइरोइड ग्रंथि सर्जरी के कारण प्रभावित होती है। इस कारण बड़ी मात्रा में हार्मोन गिर जाते है। (और पढ़े – थाइरोइड क्या है)
  • अन्य न्यूरोमस्कुलर के लक्षण पैदा हो सकते है।

भारत में थायरोडेक्टॉमी कराने का कितना खर्च लगता हैं ? (What is cost of Thyroidectomy in India in Hindi)

भारत में थायरोडेक्टॉमी कराने का कुल खर्च लगभग 60000 से 65000 लग सकता है। हालांकि भारत में बहुत से बड़े अस्पताल के डॉक्टर है जो थायरोडेक्टॉमी का इलाज करते है। लेकिन सभी अस्पतालों में थायरोडेक्टॉमी का खर्च अलग-अलग है। अगर आप अच्छे अस्पतालों में थायरोडेक्टॉमी के खर्च व डॉक्टर के बारे में जानकारी पाना चाहते है तो यहाँ पर क्लिक करें

अगर आप विदेश से आ रहे है तो आपकी सर्जरी के इलाज के खर्च के अलावा होटल में रहने का खर्चा होगा, रहने का खर्चा होगा, लोकल ट्रेवल का खर्चा होगा। इसके अलावा सर्जरी के बाद मरीज को दो दिन या आठ दिन रिकवरी के लिए रखा जाता है, इसलिए सभी खर्चे मिलाकर 171,047 INR होते है जो एक साथ अस्पताल में लिये जाते है। इसके बारे में अधिक जानकारी पाना चाहते है तो यहाँ पर क्लिक करे।

अगर किसी व्यक्ति को थायरोडेक्टॉमी यानि थायराइड का ऑपेरशन के बारे में अधिक जानकारी एव उपचार के लिए किसी अच्छे जनरल सर्जन (General Surgeon) से संपर्क कर सकते है।


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हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है।