कॉर्नियल ट्रांसप्लांट क्या हैं । Corneal Transplant in Hindi

Login to Health जनवरी 12, 2021 Lifestyle Diseases 146 Views

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कॉर्नियल ट्रांसप्लांट का मतलब हिंदी में,  (Corneal Transplant Meaning in Hindi)

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट क्या हैं ?

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट एक तरह की सर्जिकल प्रक्रिया है जिसे केरेटोप्लास्टी भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया में रोग ग्रस्त या क्षतिग्रस्त कॉर्निया को बदल दिया जाता है। किसी मृत व्यक्ति के आंखो से कॉर्निया लिया जा सकता है क्योंकि डोनर मरने से पहले अपनी आंखो को दान दे सकता है। बहुत लोग सोच रहे होंगे कॉर्निया क्या होता है तो बता दे, कॉर्निया एक सफ़ेद और गुबंद के आकर का बाहरी भाग होता है और इसमें तीन परत होती है। वातावरण में फैले धुल, मिटटी संक्रमण से बचाव करने  कॉर्निया आंखो की मदद करता है। कॉर्निया आंखो की रौशनी को तेज करता है और हमें साफ चित्र दिखाता है। यदि किसी व्यक्ति की पूरी कॉर्निया क्षतिग्रस्त हो गयी है तो व्यक्ति सब धुंधला दिखाई देने लगता है। कुछ मामलो में व्यक्ति को अंधापन हो सकता है। चलिए आज के लेख में आपको कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के बारे में विस्तार से बताते हैं। 

  • कॉर्नियल ट्रांसप्लांट क्यों किया जाता है ? (Purpose of Corneal Transplant in Hindi)
  • कॉर्नियल ट्रांसप्लांट से पहले क्या किया जाता है ? (Pre-procedure of Corneal Transplant in Hindi)
  • कॉर्नियल ट्रांसप्लांट कैसे किया जाता हैं ? (Procedure of Corneal Transplant in Hindi)
  • कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के बाद देखभाल ? (How to care After Corneal Transplant in Hindi)
  • कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के बाद क्या जटिलताएं आ सकती हैं ?  (What are the Risks of Corneal Transplant in Hindi)
  • भारत में कॉर्नियल ट्रांसप्लांट करवाने का कितना खर्च लगता हैं ? (What is Cost of Corneal Transplant in India in Hindi)

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट क्यों किया जाता है ? (Purpose of Corneal Transplant in Hindi)

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट निम्न स्तिथियो के आधार पर करवाने की सलाह दी जा सकती है। 

  • कॉर्नियल के एक भाग क्षतिग्रस्त होने से चिकिस्तक ट्रांसप्लांट की सलाह दे सकते है। 
  • किसी दुर्गटना के कारण कार्निया में चोट लगने से। 
  • आंख में धुंधलापन होना। 
  • संक्रमण होना। 
  • किसी तरह के जीवाणु के कारण कॉर्निया में सूजन आना। 
  • फुच्स डिस्ट्रॉफी। 
  • आंख की सर्जरी पहले कराई हो।  

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट से पहले क्या किया जाता है ? (Pre-procedure of Corneal Transplant in Hindi)

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट से पहले निम्न तैयारी करने की आवश्कयता होती है। 

  • चिकिस्तक उपचार के पहले नेत्र परीक्षण करते है ताकि जान सके सर्जरी करना है या नहीं। 
  • सर्जरी करवाने के एक हफ्ते पहले से रक्त पतला करने वाली दवाओं का सेवन करना बंद कर दे। 
  • अगर आप किसी तरह की विशेष दवा का सेवन करते है तो चिकिस्तक से बात कर ले। 
  • यदि आप डायबिटीज व बीपी के मरीज है तो सर्जरी के पहले दवा के सेवन के बारे में चिकिस्तक से पूछ ले। (और पढ़े – डायबिटीज का इलाज क्या है)
  • सर्जरी के पहले मरीज को आधे रात तक भूखा रहना पड़ सकता है। 
  • सर्जरी करवाने के पहले मरीज को किसी भी तरह नशीले पदार्थ व शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। 
  • सर्जरी करवाने जाने पर अपने साथ घर के किसी सदस्य को ले जाये। 
  • किसी भी प्रक्रिया के पहले चिकिस्तक मरीज से अस्पताल के कागज पर साइन लेते हैं।

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट कैसे किया जाता हैं ? (Procedure of Corneal Transplant in Hindi)

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू करने के पहले मरीज के आंखो में ड्राप डालेंगे और मरीज को कुछ दवा दे सकते है। इसके बाद मरीज की आंख सुन्न करने के लिए सामान्य एनेस्थीसिया दिया जा सकता है। सर्जरी की प्रक्रिया के दौरान आंखो की हलचल को रोक दिया जाता है व आंखो को खुला रखने के लिए उपकरण का उपयोग किया जाता है। एनेस्थीसिया के प्रभाव से मरीज को कुछ स्पष्ट नजर नहीं आता है। ऐसे में चिकिस्तक कॉर्नियल की क्षति की जांच करते है कितना है या कम है, ताकि प्रक्रिया कौन सा उपयोग करना है यह समझ सके। 

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट तीन तरह से किया जा सकता है। यह स्तिथि के आधार पर किया जाता है। 

  • एंडोथेलियाल (Endothelial keratoplasty) इस प्रक्रिया में पुरे क्षतिग्रस्त कॉर्निया को ब्लेड की मदद से बाहर निकाल कर उसके जगह पर स्वस्थ कॉर्निया को लगा दिया जाता है। 
  • पेनेट्रेटिंग केरेटोप्लास्टी (penetrating keratoplasty) इस प्रक्रिया में कॉर्निया की परत को किसी डोनर के द्वारा प्राप्त की गयी परत से बदला जाता है। हालांकि प्रक्रिया खत्म  टांके नहीं लगाते है बल्कि बबल का उपयोग करते है। 
  • डीप एंटीरियर लेमेलर केरेटोप्लास्टी (Deep anterior lamellar keratoplasty) इस प्रक्रिया में कॉर्निया की बाहरी परत को बदल दिया जाता है। (और पढ़े – ग्लूकोमा सर्जरी कैसे की जाती है)

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के बाद देखभाल ? (How to care After Corneal Transplant in Hindi)

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को रिकवर होने में कुछ महीने से एक साल तक का समय लग सकता है। कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की खास देखभाल की आवश्यकता होती है। 

  • मरीज को अपने आंखो को रगड़ना या मसलना नहीं चाहिए। 
  • अधिक वजन वाली चीज न उठाये। 
  • नहाते समय आंखो को खुला न रखे। 
  • ऑपरेशन के बाद मरीज को गाड़ी तबतक नहीं चलानी चाहिए जबतक चिकिस्तक न कहे। 
  • तैराकी और पानी में कुछ महीनो तक बिलकुल भी न खेले। 
  • चिकिस्तक द्वारा दी गयी आंखो के ड्रॉप को सही समय पर आंखो में डाले। इसके अलावा दवा का सेवन करें। 
  • आंखो को सुरक्षा देने के लिए चश्मे का उपयोग करना चाहिए। 
  • ऑपरेशन के बाद कोई भी ऐसी गतिविधि न करे जिससे आंखो को गहरा प्रभाव पडे। 
  • कोई ऐसा कार्य न करे जिसमे आंखो पर अधिक प्रभाव पड़े। (और पढ़े – आई फ्लू क्या है)

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के बाद क्या जटिलताएं आ सकती हैं ?  (What are the Risks of Corneal Transplant in Hindi)

हर सर्जरी में कुछ न कुछ जोखिम व जटिलताएं होती है, उसी तरह कॉर्नियल ट्रांसप्लांट में कुछ निम्न जोखिम हो सकते है। 

  • आंखो में सूजन आना। 
  • आंख में रक्तस्राव होना। 
  • मोतियाबिंद का जोखिम होना। 
  • कॉर्निया लगाया गया भाग अलग होना। 
  • ग्लूकोमा की शुरुवात होना। (और पढ़े – ग्लूकोमा का इलाज क्या है)
  • आंखो की सतह पर संक्रमण होना। 
  • रेटिना अलग होना। 
  • कुछ देखने में कठिनाई होना। 

भारत में कॉर्नियल ट्रांसप्लांट करवाने का कितना खर्च लगता हैं ? (What is Cost of Corneal Transplant in India in Hindi)

भारत में कॉर्नियल ट्रांसप्लांट कराने का कुल खर्च लगभग INR 50,000 से INR 100000  तक लग सकता है। हालांकि भारत में बहुत से बड़े अस्पताल के डॉक्टर है जो का इलाज करते है। लेकिन सभी अस्पतालों में कॉर्नियल ट्रांसप्लांट का खर्च अलग-अलग हो सकता है। (और पढ़े – मोतियाबिंद सर्जरी कैसे होता है) 

हमें आशा है की आपके प्रश्न कॉर्नियल ट्रांसप्लांट क्या हैं ? का उत्तर इस लेख के माध्यम से दे पाएं। 

अगर आपको कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के बारे में अधिक जानकारी व इलाज करवाना हो तो (Ophthalmologist) से संपर्क कर सकते हैं। 

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है।


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