कॉर्टिसॉल टेस्ट क्या है । Cortisol Test in Hindi

फ़रवरी 3, 2021 Lifestyle Diseases 2631 Views

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कॉर्टिसॉल टेस्ट का मतलब हिंदी में,  (Cortisol Test Meaning in Hindi)

कॉर्टिसॉल टेस्ट क्या है ?

कॉर्टिसॉल टेस्ट एक तरह की जांच प्रक्रिया है, जिसमे कॉर्टिसॉल हार्मोन के स्तर की जांच की जाती है। इस प्रक्रिया के लिए शरीर से रक्त नमूना लिया जाता है ताकि रक्त में उपस्तिथ कॉर्टिसॉल के स्तर को मापा जा सके। हालांकि कॉर्टिसॉल टेस्ट कुछ गंभीर बीमारियों का पता लगाया जाता है जिनमे कुशिंग रोग, एडिसन रोग शामिल है। आपको बता दे, कॉर्टिसॉल हार्मोन किडनी के ठीक ऊपरी छोर पर रहता है। यह एक ऐसा हार्मोन है जो शरीर के सभी अंग व टिश्यू को प्रभावित करता है। जैसे शरीर में मेटाबॉलिज्म सामान्य करने में, रक्तचाप नियंत्रित करने में, संक्रमण से लड़ने में, ब्लड शुगर को सामान्य करने व तनाव को कम करने में सहायक होता है। कॉर्टिसॉल टेस्ट के लिए व्यक्ति के मूत्र, रक्त, थूक के नमूने लिए जाते है ताकि यह पता हो सके, शरीर में कॉर्टिसॉल हार्मोन कम है या अधिक है। चलिए आज के लेख में आपको कॉर्टिसॉल टेस्ट के बारे में विस्तार से बताते हैं। 

  • कॉर्टिसॉल टेस्ट क्यों किया जाता हैं ? (What are the Purpose of Cortisol Test in Hindi)
  • कॉर्टिसॉल टेस्ट से पहले की तयारी ? (Prepare Before Cortisol Test in Hindi)
  • कॉर्टिसॉल टेस्ट कैसे किया जाता हैं ? (What are the Procedure of Cortisol Test in Hindi)
  • कॉर्टिसॉल टेस्ट के क्या जोखिम हो सकते हैं ? (What are the Risks of Cortisol Test in Hindi)
  • कॉर्टिसॉल टेस्ट के परिणाम क्या आ सकते है ? (What do Results of Cortisol Test mean in Hindi)

कॉर्टिसॉल टेस्ट क्यों किया जाता हैं ? (What are the Purpose of Cortisol Test in Hindi)

कॉर्टिसॉल की जांच शरीर में कॉर्टिसॉल के स्तर कम है या अधिक पता लगाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा कुशिंग सिंड्रोम व एडिसन रोग का पता लगाने के लिए कॉर्टिसॉल की जांच की जाती है। हालांकि एडिसन रोग के लक्षण नजर आने पर यह जांच की जा सकती है। 

  • जैसे – दस्त होना। 
  • बीपी लो होना। 
  • त्वचा में चकत्ते आना। 
  • वजन कम होने लगना। (और पढ़े – वजन कम करने के घरेलु उपचार)
  • महिलाओं में कामेच्छा में कमी होना। 
  • मांसपेशियो में दर्द होना। 
  • बहुत थकान महसूस करना। 

कॉर्टिसॉल टेस्ट की सलाह कुशिंग सिंड्रोम के लक्षण नजर आने पर दे सकते है। 

  • पेट में दर्द होना। 
  • उल्टी आना। 
  • बेहोश होना। 
  • अधिक कमजोरी महसूस करना। 
  • पानी की कमी होना। (और पढ़े – डिहाइड्रेशन क्या है)
  • बीपी अधिक कम होना। 
  • दस्त होना। 

कॉर्टिसॉल टेस्ट से पहले की तयारी ? (Prepare Before Cortisol Test in Hindi)

कॉर्टिसॉल टेस्ट से पहले चिकिस्तक व्यक्ति तनाव व चिंता नहीं करने व आराम करने की सलाह देते है ताकि जांच की प्रक्रिया में तनाव बढ़ा न मिले। इसके अलावा अन्य नमूने जैसे यूरिन, थूक लेने के लिए व्यक्ति को सुबह बिना ब्रश किये व कुछ न खाने – पीने की सलाह देते है। कॉर्टिसॉल टेस्ट की जांच के लिए सामान्य तौर पर रक्त के नमूने लेते है। यदि किसी तरह के दवा का सेवन करते है या नशीले पदार्थ, धूम्रपान करते है तो अपने चिकिस्तक को सही जानकारी दे। (और पढ़े – फुल बॉडी चेक अप क्यों किया जाता है)

कॉर्टिसॉल टेस्ट कैसे किया जाता हैं ? (What are the Procedure of Cortisol Test in Hindi)

कॉर्टिसॉल जांच की प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति के नस पर एंटीसेप्टिक दवा लगाकर सुई के माध्यम से रक्त के नमूने लिए जाते है। जैसा की आपको पता है कॉर्टिसॉल के स्तर पुरे दिन में बदलते रहता है। इसलिए कॉर्टिसॉल जांच दिन में दो बार किया जाता है पहला जांच सुबह जब कॉर्टिसॉल स्तर अधिक रहता है और दूसरी जांच शाम को जब कॉर्टिसॉल का स्तर कम रहता है। हालांकि चिकिस्तक रक्त नमूने के अलावा यूरिन व थूक के नमूने ले सकते है। नसो से रक्त लेने के दौरन व्यक्ति को अत्यधिक दर्द का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यह दर्द पलभर की होती है बाद में ठीक हो जाता है। कुछ लोगो में जांच के बाद चक्कर जैसा महसूस करने लगते है। (और पढ़े – बायोप्सी क्यों किया जाता है)

कॉर्टिसॉल टेस्ट के क्या जोखिम हो सकते हैं ? (What are the Risks of Cortisol Test in Hindi)

कॉर्टिसॉल टेस्ट में सामान्य रूप से अत्यधिक जोखिम नहीं होता है। लेकिन जांच के दौरान थोड़ा दर्द का अनुभव हो सकता है। इसके अलावा नसो से रक्त निकालने के बाद कुछ निम्न समस्या हो सकती है। 

  • जैसे – कमजोरी महसूस करना। 
  • संक्रमण होना। 
  • चक्कर आना। (और पढ़े – चक्कर आना के कारण)
  • बेहोश हो जाना। 
  • रक्तस्राव होना। 
  • ब्लड कलॉटेज होना। 

कॉर्टिसॉल टेस्ट के परिणाम क्या आ सकते है ? (What do Results of Cortisol Test mean in Hindi)

कॉर्टिसॉल टेस्ट के परिणाम व्यक्ति के उम्र, लिंग, बीमारी व उपयोग की गयी जांच प्रक्रिया के आधार पर सामान्य और असामान्य परिणाम आ सकता है। 

  • सामान्य परिणाम में –  जैसा की आगे आपको बताया गया है की कॉर्टिसॉल का स्तर 24 घंटो में बदलता रहता है। रात को स्तर कम रहता है और सुबह को स्तर अधिक हो जाता है। जांच प्रक्रिया कौन से समय पर करना उचित होता है की सामान्य परिणाम मिले। कुछ चिकिस्तक के अनुसार शाम 6 बजे से 8 बजे के मध्य 10 से 15 (mcg /dL) और शाम 4 से 3 बजे 10 (mcg /dL) 
  • असामान्य परिणाम में कॉर्टिसॉल टेस्ट के परिणाम असामान्य होने का मतलब कुछ समस्या व बीमारी का संकेत हो सकता है। जैसे कुछ लोग अधिक समय से दमा, सूजन की दवा लेते है। इसके अलावा कुशिंग सिंड्रोम रोग हो या एड्रिनल हार्मोन की कमी हो आदि में परिणाम असामन्य हो सकते है। कुछ मामलो में चिकिस्तक अन्य जांच का सुझाव दे सकते है। 
  • हालांकि यह जानकारी केवल आपको समझाने के लिए दी गयी है, आपको अच्छी सलाह चिकिस्तक आपके जांच के आधार पर दे सकते है।

हमें आशा है की आपके प्रश्न कॉर्टिसॉल टेस्ट क्या है ? का उत्तर इस लेख के माध्यम से दे पाएं। 

कॉर्टिसॉल टेस्ट के बारे में अधिक जानकारी के लिए (Endocrinologist) से संपर्क कर सकते हैं। 

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है।


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