डीपीटी वैक्सीन क्या हैं । DPT Vaccine in Hindi

Login to Health मार्च 12, 2021 Lifestyle Diseases, Liver Section 42 Views

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डीपीटी वैक्सीन का मतलब हिंदी में,  (DPT Vaccine Meaning in Hindi)

डीपीटी वैक्सीन क्या हैं ?

डीपीटी वैक्सीन शिशु को डिप्थीरिया, पर्टुसिस और टेटनस जैसे संक्रामक रोग से बचाव करने के लिए उपयोग किया जाता हैं। यह वैक्सीन बच्चों को रोगो से लड़ने के लिए तैयार करती है। यह ऐसे संक्रामक रोग होते है जिसके कारण शिशु व बच्चें के जान का जोखिम बना रहता हैं। डीपीटी वैक्सीन सात साल से कम आयु वाले बच्चों को दिया जाता हैं। यह टिका बच्चों में रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देता हैं। डिप्थीरिया के कारण बच्चों को सांस लेने में कठिनाई होती हैं और इस वजह से लकवा या हृदयघात हो सकता हैं। टिटनस बैक्टीरिया मिट्टी में पाएं जाते है जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर मांसपेशियो में ऐंठन पैदा करता हैं। पर्टुसिस शिशु में काली खांसी व खाने व पीने में परेशानी करता हैं। इस वजह से बच्चों में निमोनिया का जोखिम बना रहता है। चलिए आज के लेख में आपको डीपीटी वैक्सीन क्या हैं ? के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं। 

  • डीपीटी वैक्सीन के प्रकार ? (Types of DTP Vaccine in Hindi)
  • डीपीटी टिका कब लगाया जाता हैं ? (When is the DPT vaccine Applied in Hindi)
  • डीपीटी टिका किन बच्चों को नहीं लगाना चाहिए ? (Which children should not have the DPT vaccine in Hindi)
  • डीपीटी वैक्सीन के साइड इफेक्ट ? (Side-Effects of DTP Vaccine in Hindi)

डीपीटी वैक्सीन के प्रकार ? (Types of DTP Vaccine in Hindi)

डीपीटी वैक्सीन के दो प्रकार हैं। 

  • डीटीएपी
  • डीटीडब्लूपी

इन दोनों टिके में अलग-अलग मात्रा में बैक्टीरिया मौजूद है। 

  • डीटीएपी डीटीएपी का उपयोग दर्द निवारक के रूप में किया जाता है। इसके अलावा डीटीडब्लूपी को लगवाने के बाद अधिक दर्द हो सकता हैं। 
  • डीटीडब्लूपी  इस टिके का उपयोग काली खांसी से बचाव करने के लिए किये जाते है। इस टिके को बनाने के लिए पूरी तरह से बैक्टीरिया का उपयोग नहीं किया जाता है। हालांकि बैक्टीरिया के कुछ हिस्सों से बनाया जाता है। इस टिके से बच्चों को कोई खास नुकसान नहीं होता हैं।  (और पढ़े – बच्चों में निमोनिया की समस्या)

डीपीटी टिका कब लगाया जाता हैं ? (When is the DPT vaccine Applied in Hindi)

डीपीटी का टिका कई चरण में लगाया जाता है। चलिए आगे बताते हैं। 

  • डीपीटी टिके की पहली खुराक बच्चों को 2 महीने में दी जाती है। 
  • डीपीटी टिके की दूसरी खुराक बच्चों को 4 महीने में दी जाती हैं। 
  • डीपीटी टिके की तीसरी खुराक बच्चों को 6 महीने में दी जाती हैं। 
  • डीपीटी टिके की चौथी खुराक 15 से 18 महीने के बच्चों को दी जाती है। 
  • डीपीटी टिके की पांचवी खुराक 4 से 6 साल के बच्चों को दी जाती हैं। 
  • टीडीएपी की खुराक 11 से 12 साल के बच्चों को दी जाती है। हालांकि दस साल में एक बार इस टिके को लगवाना चाहिए। 

डीपीटी टिका किन बच्चों को नहीं लगाना चाहिए ? (Which children should not have the DPT vaccine in Hindi)

जैसा की आपको आगे की लेख में बताया है की डीपीटी टिका सात साल से कम आयु वाले बच्चों को दी जाती है। यह जरुरी नहीं सभी बच्चों में इन टिके का अच्छा प्रभाव हो क्योंकि डीपीटी टिका की जगह कुछ बच्चों को टिटनस व डिप्थीरिया का टिका लगा सकते है। कुछ बच्चों में स्वास्थ्य समस्या होने से इन टीको को बाद में लगाया जा सकता है या इलाज के बाद जब बच्चा ठीक हो जाएं तब लगा सकते है। 

जैसे की शिशु को पहली खुराक दी गयी हो और उस वजह से एलर्जी होने पर दूसरी खुराक के लिए इंतजार करना होता है। 

  • यदि शिशु बहुत छोटा हो नहीं लगाया जाता है। 
  • किसी शिशु को पहली खुराक लेने के बाद रोगप्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव पड़ा हो या तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाया हो। 
  • किसी बच्चें में डीपीटी की खुराक देने के बाद गंभीर एलर्जी या कुछ दिनों तक दौरे महसूस हुआ हो, ऐसे में अगली खुराक नहीं देते है। 
  • हालांकि अभिभावकों को बच्चें की खुराक के बारे में चिकिस्तक से सटीक बात कर लेनी चाहिए की अगली खुराक देनी है या नहीं आदि। इसके खुराक देने के लिए कितना समय का इंतजार करना होगा या बच्चों में सामान्य फ्लू के लक्षण नजर आने पर टिका लगवाना चाहिए। शिशु गंभीर रूप से बीमार है तो ठीक होने के बाद इन टीको का उपयोग किया जा सकता है। (और पढ़े – कोरोना वायरस क्या हैं)

डीपीटी वैक्सीन के साइड इफेक्ट ? (Side-Effects of DTP Vaccine in Hindi)

डीपीटी वैक्सीन लगाने के बाद कुछ शिशु या बच्चें में कुछ प्रतिक्रिया या साइड इफ़ेक्ट नजर आ सकते है। चलिए आगे बताते हैं। 

  • इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन आना। 
  • इंजेक्शन वाली जगह को छूने से अधिक दर्द का अनुभव होना। 
  • इंजेक्शन वाली जगह की त्वचा लालिमा हो जाना। 
  • कुछ मामलो में टिके लगाने के बाद शिशु में भूख की कमी, उल्टी, बुखार व बेचैनी की समस्या हो सकती हैं। 
  • कुछ बच्चों में टिके लगाने के बाद गंभीर रूप से बुखार हो जाता है जो कई घंटो तक बना रह सकता है। 
  • इस टिके की चौथी या पांचवी खुराक लेने के बाद बच्चों में हाथ दर्द व पैरो में सूजन की समस्या हो सकती है। 
  • कुछ मामलो में टिके लगाने के बाद शिशु को दौरे पड़ने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। 
  • बहुत ही कम ऐसे मामले होते है जिनमे टिके लगवाने के बाद शिशु का दिमाग क्षतिग्रस्त हो जाता है। (और पढ़े – बच्चों में मिर्गी की समस्या)

हमें आशा है की आपके प्रश्न डीपीटी वैक्सीन क्या हैं ? का उत्तर इस लेख के माध्यम से दे पाएं। 

अगर आपको डीपीटी वैक्सीन के बारे में अधिक जानकारी चाहिए तो (Child specialist) से संपर्क कर सकते हैं। 

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है।


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