जानिए पेचिश (आव) क्या होता है। Dysentery in Hindi.

जून 27, 2019 Lifestyle Diseases 24475 Views

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Dysentery Meaning in Hindi.

पेचिश को अंग्रेजी में डीसेंट्री के नाम से जाना जाता है। यह एक तरह की आंतो की बीमारी है जो संक्रमण के द्वारा आंतो में फैलती है। इसमें पेचिश के दौरान बलगम में रक्त की कुछ बूंदे दिखाई [पड़ती है। यह रोग बहुत तेजी से मनुष्यो को हो जाता है। क्योकि जो मनुष्य अपने हाथों की सफाई अच्छे से नहीं रखता है। उनको ही अधिक होता है। जब कुछ भी खाते है। जो जीवाणु और बैक्टीरिया हाथो के माध्यम से पेट के आंतो तक पहुंच जाती है। पेचिश जैसी समस्या उत्पन्न कर देती है। यही कारण है मनुष्य को स्वच्छता रखना चाहिए। आज इस लेख में Dysentery के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे।

  • पेचिश के प्रकार ? (Types of Dysentery in Hindi)
  • पेचिश के कारण क्या है ? (What are the Causes of Dysentery in Hindi)
  • पेचिश के लक्षण क्या है ? (What are the Symptoms of Dysentery in Hindi)
  • पेचिश का इलाज क्या है? (What are the Treatments for Dysentery in Hindi)

पेचिश के प्रकार ? (Types of Dysentery in Hindi)

पेचिश मुख्य रूप से दो प्रकार के होते है।

  • बैक्टीरियल पेचिश – इस प्रकार के पेचिश का मुख्य कारण दूषित भोजन और पानी होता है। जिसके सेवन से पेट में बैक्टीरिया प्रवेश कर लेते है। इससे कई तरह के गंभीर लक्षण भी पैदा कर सकते है। इसलिए सफाई रखना बहुत जरुरी होता है।
  • अमीबी पेचिश – इस प्रकार के पेचिश में कोशिकीय पैराडाइस के कारण फैलता है। यह खासतौर पर आंतो को प्रभावित करता है। अमीबा पैरासाइटिस अकेले नहीं बल्कि समूह के साथ संक्रमण करते है। इसके अलावा Cyst का निर्माण करते है। यह दूषित जगहों पर अधिक रहते है। यह शरीर के बाहर भी जीवित रह सकते है। इसमें शौचालय से आने के बाद तुरंत अपने हाथो की सफाई करनी चाहिए ताकि कोई संक्रमण शरीर में प्रवेश ना कर पाए।

पेचिश के कारण क्या है ? (What are the Causes of Dysentery in Hindi)

पेचिश दूषित भोजन और पानी के सेवन करने के कारण फैलता है। जो मनुष्य के मल को दूषित करता है। कई बिना हाथ धोये भोजन को स्पर्श करने से भोजन संक्रमित यानि दूषित हो जाता है हालांकि अमीबी पेचिश उन लोगो को अधिक होता है। जो कोई बीमारी से पहले से ग्रस्त होते है पेचिश के कुछ अन्य कारक भी इस प्रकार है।

  • दूषित भोजन।
  •  दूषित नदी या तालाब में स्नान करना।
  • संक्रमित लोगो से हाँथ को ठीक से साफ नहीं करना।
  • दूषित पानी एव अन्य पेय पदार्थ।
  • शारीरिक संपर्क।

पेचिश के लक्षण क्या है ? (What are the Symptoms of Dysentery in Hindi)

पेचिश के लक्षण हल्के से गंभीर तक होते हैं। यह काफी हद तक उन क्षेत्रों में स्वच्छता की गुणवत्ता पर निर्भर करता है जहां संक्रमण फैल गया है। इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं।

  •  हल्का पेट-दर्द
  •  ऐंठन (और पढ़े – कब्ज के लक्षण क्या है)
  • दस्त
  • ये आमतौर पर संक्रमण के 1 से 3 दिन बाद दिखाई देते हैं, और रोगी एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाता है।
  • कुछ लोग लैक्टोज असहिष्णुता भी विकसित करते हैं, जो लंबे समय तक, कभी-कभी वर्षों तक रह सकते हैं।

संक्रमण के द्वारा हुए पेचिश के लक्षण

  •  मल में रक्त या बलगम
  • तीव्र पेट दर्द
  • बुखार (और पढ़े – चमकी बुखार क्या है)
  • जी मिचलाना
  • उल्टी
  • अक्सर, लक्षण इतने हल्के होते हैं कि डॉक्टर की यात्रा की आवश्यकता नहीं होती है, और समस्या कुछ दिनों में हल हो जाती है।

अमीबिक पेचिश के लक्षण

  • अमीबी पेचिश वाले व्यक्ति में हो सकता है।
  • पेट में दर्द
  • बुखार और ठंड लगना
  •  मतली और उल्टी
  • पानी दस्त, जिसमें रक्त, बलगम या मवाद हो सकता है
  • मल के दर्दनाक गुजर (और पढ़े – बवासीर के कारण क्या है)
  • थकान
  • आंतरायिक कब्ज
  • यदि आंतों की दीवार के माध्यम से अमीबा सुरंग है, तो वे रक्तप्रवाह में फैल सकते हैं और अन्य अंगों को संक्रमित कर सकते हैं।
  •  अल्सर विकसित हो सकता है। इनसे खून निकल सकता है, जिससे मल में खून आ सकता है।लक्षण कई हफ्तों तक जारी रह सकते हैं।
  • अमीबा मानव लक्षणों के जाने के बाद भी रह सकता है। फिर, लक्षणों की पुनरावृत्ति हो सकती है जब व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है। उपचार अमीबा के जीवित रहने के जोखिम को कम करता है।

पेचिश का इलाज क्या है? (What are the Treatments for Dysentery in Hindi)

  • अगर व्यक्ति व्यक्ति का पेचिश 4 से 7 दिनों के भीतर लक्षण कम होने लगते है। तो उनको उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन यदि चिकिस्तक के उपचार की आवश्यकता होती है। तो चिकिस्तक कुछ निम्न सुझाव देते है।
  • जैसे : दिन अधिक मात्रा में पानी पीये इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, फलो के रस को पीये।
  • अगर व्यक्ति को दर्द व बुखार है। तो उसके लिए कुछ दर्द की खुराक लिख देते है।
  • मरीजों के लक्षणो के आधार पर कुछ एंटीबायोटिक दवाइयों की खुराक देते है।
  • अपने आसपास के परिसर एव हाथो को स्वच्छ रखने की सलाह देते है। ताकि दोबारा पेचिश जैसी समस्या ना हो। इसके अतरिक्त चिकिस्तक पेचिश के दौरान नरम पदार्थो को खाने की सलाह देते है। नरम पदार्थो में जैसे: केला, हल्के बिस्किट, चावल इत्यादि।

अगर आपको पेचिश से जुडी जानकारी  एव इलाज करवाना हो, तो गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी (Gastroenterologist) से संपर्क करें।


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