इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम क्या होता हैं । Irritable bowel syndrome (IBS) in Hindi

Login to Health दिसम्बर 10, 2020 Lifestyle Diseases 100 Views

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इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम क्या होता हैं ? (Irritable bowel syndrome (IBS) Meaning in Hindi)

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम (आईबीएस) एक तरह बीमारी है जो बड़ी आंत को क्षति पहुंचाती है। इसमें व्यक्ति को पेट में दर्द , पेट में ऐंठन, दस होना, कब्ज या गैस जैसे लक्षण नजर आने लगते है। यदि किसी व्यक्ति में यह समस्या लंबे समय से प्रभावित कर रही है तो चिकिस्तक से संपर्क कर निदान व उपचार करवाना चाहिए। कुछ मामलो में आईबीएस गंभीर लक्षण व संकेत होने पर आंत के सूजन, क्रोहन रोग या अन्य रोगो का कारण बन सकता है। आईबीएस से बहुत कम लोग पीड़ित होते है, लेकिन इन समस्या से बचने के लिए आहार में कुछ परिवर्तन कर शरीर को स्वस्थ कर सकते है। इसके अलावा कुछ लोगो में तनाव के कारण व्यक्ति में दस्त या पेट दर्द की समस्या होने लगती है। तनाव व चिंता को कम करने के लिए चिकिस्तक मनोचिकिस्तक व मनोवैज्ञानिक से उपचार करवाने की सलाह देते है ताकि तनाव को कम करने मदद कर सकें। चलिए आज के लेख में आपको इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम क्या होता हैं (आईबीएस) के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं। 

  • इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम के लक्षण ? (What are the Symptoms of Irritable Bowel Syndrome (IBS) in Hindi)
  • इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम के कारण ? (What are the Causes of Irritable Bowel Syndrome (IBS) in Hindi)
  • इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम का निदान ? (Diagnoses of Irritable Bowel Syndrome (IBS) in Hindi)
  • इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम का इलाज ? (What are the Treatments for Irritable Bowel Syndrome (IBS) in Hindi)
  • इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम से बचाव ? (Prevention of Irritable Bowel Syndrome (IBS) in Hindi)

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम के लक्षण ? (What are the Symptoms of Irritable Bowel Syndrome (IBS) in Hindi)

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम के लक्षण निम्नलिखित हो सकते है जो व्यक्ति में अलग-अलग तरह से नजर आ सकते हैं। 

  • पेट में दर्द होना 
  • मल त्यागने में कठिनाई होना। 
  • दस्त होना। 
  • कब्ज होना। 

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम के अन्य लक्षणो में शामिल है। 

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम दर्दनाक हो सकता है लेकिन अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण नहीं बन सकता है, तो आपके पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। यदि सही समय पर निदान या उपचार नहीं किया गया तो लक्षण और हो सकते है। 

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम के कारण ? (What are the Causes of Irritable Bowel Syndrome (IBS) in Hindi)

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम का कोई स्पष्ट कारण का पता नहीं चल पाया है, हालाँकि इसका उपचार के कई तरीके से किया जाता हैं। कई जोखिम कारण हो सकते है जो इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम को बढ़ावा दे सकते है। जिनमे अत्यधिक संवेदनशील बृहदान्त्र या प्रतिरक्षा प्रणाली शामिल है। इसक अलावा पोस्टिनसियस आईबीएस गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में पिछले बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है। अनेको जोखिम कारणों से आईबीएस की रोकथाम करना कठिन हो जाता है। 

कुछ अन्य जोखिम कारक में शामिल है। 

  • तनाव होने से व्यक्ति को आईबीएस के संकेत का अनुभव हो सकता है। तनाव अधिक बढ़ने पर लक्षण और गंभीर होने लगते है और अन्य परिस्तिथि उत्पन्न हो सकता है। 
  • महिलाओं के मासिकधर्म के दौरान या गर्भावस्था के समय हार्मोन बदलाव होने पर आईबीसीएस के लक्षण को बढ़ा सकते है।  
  • कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ है जो आईबीसीएस के कारक बन सकते है जैसे मसाले, सेम की फली, दूध, ब्रोकली, अल्कोहल आदि का अत्यधिक सेवन समस्या उत्पन्न करता है। 
  • कुछ ऐसी बीमारिया जैसे दस्त या संक्रमण, आंत में जीवाणु होने से आईबीसीएस का कारक बन सकता है। (और पढ़े – शिशु में दस्त के घरेलू उपचार)

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम का निदान ? (Diagnoses of Irritable Bowel Syndrome (IBS) in Hindi)

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम (IBS) का निदान करने के लिए, चिकिस्तक आपके लक्षणों के बारे में सवाल करेंगे, और पुरानी बीमारी इतिहास के बारे में जानेंगे। इसके बाद मरीज का शारीरिक परीक्षण करते है। । कुछ मामलों में, चिकिस्तक अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए परीक्षणों का सुझाव दे सकते हैं।

  • रक्त परीक्षण (Blood test) इस परीक्षण में आपके रक्त का नमूना लेकर प्रयोगशाला में भेजा जायेगा। चिकिस्तक आईबीएस के अलावा अन्य स्थितियों की जांच के लिए रक्त परीक्षण का Irriउपयोग करते हैं, जिसमें एनीमिया, संक्रमण और पाचन संबंधी बीमारियां शामिल हैं।
  • मल परीक्षण  (Stool test) इस परीक्षण में चिकिस्तक आपके मल के नमूने को लेने के लिए एक कंटेनर देंगे। चिकिस्तक मल में रक्त की जांच या संक्रमण या बीमारियों के अन्य लक्षणों के लिए मल परीक्षणों का उपयोग करते हैं। चिकिस्तक शारीरिक परीक्षण के दौरान मलाशय की जांच करके मल में रक्त की जांच कर सकता है।
  • अन्य परीक्षण (Other test) –  निम्न समस्या का पता लगाने के लिए चिकिस्तक अन्य परीक्षण कर सकता है। 
  • जैसे – छोटी आंतों के जीवाणु अतिवृद्धि या कुछ कार्बोहाइड्रेट, जैसे लैक्टोज असहिष्णुता को पचाने में समस्याओं के लिए हाइड्रोजन सांस परीक्षण। 
  • सीलिएक रोग की जांच के लिए बायोप्सी के साथ ऊपरी जीआई एंडोस्कोपी। 
  • बृहदान्त्र कैंसर या सूजन आंत्र रोग जैसे स्थितियों की जाँच करने के लिए कोलोनोस्कोपी जांच। (और पढ़े – कोलोनोस्कोपी क्यों किया जाता है)

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम का इलाज ? (What are the Treatments for Irritable Bowel Syndrome (IBS) in Hindi)

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम का सटीक कारण नहीं है, इसलिए लक्षण के आधार पर उपचार किया जा सकता है। उपचार में चिकिस्तक भोजन में कुछ बदलाव और अन्य जीवनशैली में बदलाव, दवाओं, प्रोबायोटिक्स और मानसिक स्वास्थ्य उपचारों में परिवर्तन करने की सलाह देते है। ताकि आईबीएस को ठीक किया जा सके।  

  • दस्त के साथ आईबीएस का इलाज करने के लिए, चिकिस्तक कुछ दवा की खुराक लेने की सलाह देते है। जिनमे शामिल है लोपरामाइड, ईलुक्सेडोलिने। 
  • कुछ मेंटल थेरेपी का सुझाव देते है जो तनाव से बाहर निकालने में मदद कर सकते है। 
  • जैसे संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी जो आईबीएस के लक्षणों को सुधारने के लिए विचार और व्यवहार के पैटर्न को बदलने में आपकी मदद करता है। 
  • आंत-निर्देशित हिप्नोथेरेपी, जिसमें  चिकित्सक सम्मोहन का उपयोग किया जाता है। एक ट्रान्स-जैसी स्थिति जिसमें आप आराम करते हैं या ध्यान केंद्रित करते हैं ताकिआईबीएस के लक्षणों को सुधारने में मदद मिल सके। 
  • विश्राम प्रशिक्षण, जो आपकी मांसपेशियों को आराम करने या तनाव को कम करने में आपकी मदद कर सकता है। 

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम से बचाव ? (Prevention of Irritable Bowel Syndrome (IBS) in Hindi)

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम से होने वाले लक्षण के प्रभाव को कम करने के लिए निम्न तरीको से अपना बचाव कर सकते है। 

  • यदि तनाव, चिंता के वजह से समस्या हो रही है तो आपको मनोचिकिस्तक की सहायता ले सकते है। मनोचिकिस्तक आपकी समस्या व घटना से बाहर निकालने में मदद करते है। 
  • शरीर की मांसपेशियो मजबूत करने व आराम के लिए योगा कर ध्यान लगा सकते है। ध्यान लगाने से तनाव जैसी समस्या कम होने लगती है। 
  • आपके दिमाग को शांत करने के लिए ट्रेनर ध्यान केंद्रित करवाते है और तनाव से बाहर लाने का प्रयास करते है। 
  • यदि दिन के कार्यो से बहुत ऊब जाते है, तो आपको कोई ऐसे काम करने चाहिए जिससे दिमाग की शांति हो, जैसे डांस करना, टीवी देखना या गाने सुनना आदि। 
  • शरीर की श्वास कार्य को बेहतर बनाने के लिए गहरी सांस लेना चाहिए। आमतौर पर छाती से सांस लिया जाता है लेकिन लंबी सांस लेने पर अलग शांत का अनुभव होता है। 

हमें आशा है की आपके प्रश्न इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम क्या होता हैं ? का उत्तर इस लेख के माध्यम से दे पाएं। 

अगर आपको इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम के बारे में अधिक जानकारी व इलाज के लिए (Gastroenterologist) से संपर्क कर सकते हैं।


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