लिम्फोपेनिया क्या होता हैं। Lymphopenia in Hindi

Login to Health दिसम्बर 4, 2020 Lifestyle Diseases 28 Views

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लिम्फोपेनिया क्या होता हैं ?

लिम्फोपेनिया क्या होता हैं ? लिम्फोसाइटोपेनिया को लिम्फोपेनिया भी कहा जाता है, यह तब होता है जब रक्तप्रवाह में लिम्फोसाइट की कमी सामान्य से कम होती है। अत्यधिक लिम्फोसाइट की कमी होने से संभावित संक्रमण या अन्य सांकेतिक बीमारी का संकेत दे सकती है। ऐसी स्तिथि में आपको जांच के लिए चिकिस्तक से संपर्क करना चाहिए। आपको बता दे, लिम्फोसाइट्स सफेद रक्त कोशिका का एक प्रकार है जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं। यह कोशिकाएं रक्त और लसीका द्रव में घूमती हैं और हानिकारक जीवों द्वारा आक्रमण के पहले संकेत पर हमला करके शरीर की रक्षा करते हैं। लिम्फोसाइटों के तीन मुख्य प्रकार हैं जो संक्रमण और अन्य बीमारी को पहचानने और समाप्त करने में मदद के लिए साथ काम करते है।

  • बी कोशिकाएं यह कोशिका एंटीबॉडी और सिग्नलिंग प्रोटीन बनाती हैं जो बैक्टीरिया, वायरस और विषाक्त पदार्थों पर हमला करने या आक्रमण करने में मदद करती हैं।
  • टी कोशिकाएं यह कोशिका उन कोशिकाओं की तलाश और नष्ट कर देती हैं जो संक्रमित हो गई हैं या कैंसरग्रस्त हैं, और वे बी कोशिकाओं के साथ संचार भी करती हैं।
  • प्राकृतिक हत्यारे (एनके) यह कोशिकाओं में ऐसे यौगिक होते हैं जो कैंसर के ट्यूमर कोशिकाओं और वायरस से संक्रमित कोशिकाओं को मार सकते हैं।

टी कोशिकाओं या बहुत कम एनके कोशिकाओं के कम होने से अनियंत्रित वायरल, फंगल और परजीवी संक्रमण हो सकता है। बी-सेल लिम्फोसाइटोपेनिया से हानिकारक और विभिन्न प्रकार के संक्रमणों का जोखिम बढ़ सकता है। चलिए आज के लेख में  लिम्फोपेनिया के बारे में विस्तार से बताते हैं। 

  • लिम्फोपेनिया के कारण क्या हैं ? (What are the Causes of Lymphopenia in Hindi)
  • लिम्फोपेनिया के लक्षण क्या हैं ? (What are the Symptoms of Lymphopenia in Hindi)
  • लिम्फोपेनिया का परीक्षण ? (Diagnoses of Lymphopenia in Hindi)
  • लिम्फोपेनिया का इलाज क्या हैं ? (What are the Treatments for Lymphopenia in Hindi)
  • लिम्फोपेनिया के जोखिम क्या हैं ? (What are the Risks Factors of Lymphopenia in Hindi)Lymphopenia in Hindi)  

लिम्फोपेनिया के कारण क्या हैं ? (What are the Causes of Lymphopenia in Hindi)

सामान्य तौर पर, लिम्फोपेनिया के निम्न कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। 

  • जैसे – शरीर में पर्याप्त लिम्फोसाइट न बनना। 
  • यदि शरीर पर्याप्त लिम्फोसाइट बनाता है, तोवे नष्ट हो जाते हैं।
  • लिम्फोसाइट्स प्लीहा या लिम्फ नोड्स में फंस जाना। 
  • इन कारकों के संयोजन से लिम्फोसाइट गिनती भी कम हो सकती है।

कई बीमारियों, स्थितियों और कारकों के कारण कम लिम्फोसाइट की मात्रा में कमी आ सकती है। एक्वायर्ड की समस्या बच्चों को माता पिता के द्वारा प्राप्त हो सकती है। हालांकि व्यक्ति में रोग और स्तिथि के अनुसार लिम्फोसाइट की मात्रा को किस तरह प्रभावित करते है, यह अभी तक ज्ञात नहीं हो पाया है।  

कई अधिग्रहित रोग, स्थिति और कारक लिम्फोसाइटोपेनिया का कारण बन सकते हैं।

  • जैसे – संक्रामक रोग, जैसे एड्स, वायरल हेपेटाइटिस, तपेदिक और टाइफाइड बुखार।
  • ऑटोइम्यून विकार। 
  • स्टेरॉयड थेरेपी।
  • रक्त कैंसर और अन्य रक्त रोग, जैसे हॉजकिन की बीमारी और अप्लास्टिक एनीमिया।
  • विकिरण और कीमोथेरेपी (कैंसर के लिए उपचार)।

अनुवांशिक लिम्फोपेनिया

कुछ अनुवांशिक बीमारियों और स्थितियों से लिम्फोसाइटोपेनिया हो सकता है। जैसे – डायजॉर्ग एनोमली, विस्कॉट-एल्ड्रिच सिंड्रोम, गंभीर संयुक्त इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम और गतिभंग-टेलेंजीक्टेसिया शामिल हैं। यह अनुवांशिक स्थितियां दुर्लभ हैं।(और पढ़े – कोरोना वायरस क्या है)

लिम्फोपेनिया के लक्षण क्या हैं ? (What are the Symptoms of Lymphopenia in Hindi)

सामान्य तौर पर लिम्फोपेनिया की कमी होने के लक्षण नजर नहीं आते है। यदि चिकिस्तक द्वारा जांच किया जाए तो लिम्फोपेनिया के कमी के बारे पता लग सकता है। कुछ मामलो में लोगो लिम्फोपेनिया के लक्षण का अनुभव कर  सकते है।

  • जैसे – बुखार होना। 
  • खांसी आना। 
  • बहती नाक। 
  • बढ़े हुए लिम्फ नोड्स होना। 
  • छोटे टॉन्सिल या लिम्फ नोड्स। 
  • जोड़ों में दर्द रहना। 
  • त्वचा के लाल चकत्ते पड़ना। 
  • रात को पसीना आना। 
  • वजन कम होने लगना। (और पढ़े – वजन कम करने  घरेलु उपचार क्या है)

लिम्फोपेनिया का परीक्षण ? (Diagnoses of Lymphopenia in Hindi)

  • चिकिस्तक पूर्ण रक्त गणना (CBC) सीबीसी की जांच करते है, ताकि लिम्फोसाइट स्तर को निर्धारित किया जा सके। इसके अलावा चिकिस्तक रक्त की जांच सलाह दे सकता है जिसे लिम्फोसाइट प्रोफ़ाइल कहा जाता है। इस परीक्षण के माध्यम से शरीर में टी, बी और एनके कोशिकाओं के स्तर की जांच की जाती है। 
  • लिम्फोसाइटोपेनिया के परीक्षण का मतलब है कि व्यक्ति के रक्त लिम्फोसाइट की मटर 1,500 कोशिकाओं / माइक्रोलिटर से नीचे है। शिशुओं और बच्चों में लिम्फोसाइट्स अधिक होते हैं और इस मामले में 3,000 से कम कोशिकाओं / माइक्रोलिटर को बहुत कम माना जाता है।

लिम्फोपेनिया का इलाज क्या हैं ? (What are the Treatments for Lymphopenia in Hindi)

  • लिम्फोसाइट की कमी होने से शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए कठिन बनाती है। व्यक्ति को वायरस, कवक, परजीवी या बैक्टीरिया के कारण संक्रमण हो सकता है। संक्रमण के लिए उपचार कारण के आधार पर निर्भर करता है। बार-बार संक्रमण को रोकने में मदद करने के लिए संक्रमण होने के बाद व्यक्ति को उपचार की आवश्यकता हो सकती है।
  • हालांकि जो बच्चे गंभीर हैं, उनमें चल रहे बैक्टीरिया के संक्रमण को रोकने के लिए प्रतिरक्षा ग्लोब्युलिन नामक दवा की सलाह दे सकते है। यह दवा प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने और संक्रमण से लड़ने में मदद करती है।(और पढ़े – इम्युनिटी बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए)

लिम्फोपेनिया के जोखिम क्या हैं ? (What are the Risks Factors of Lymphopenia in Hindi)

लिम्फोपेनिया या लिम्फोसाइटोपेनिया का अधिक जोखिम उन लोगो को होता है जो पहले से किसी रोग, स्तिथि या कारक हो सकते है या कम लिम्फोसाइट गिनती का कारण बन सकता है। हालांकि इनमे वे लोग शामिल है जिनके पास है। 

  • जैसे – वह एड्स या अन्य संक्रामक रोग से पीड़ित है। 
  • ऑटोइम्यून विकार हुआ हो। 
  • रक्त कैंसर या अन्य रक्त रोग से पीड़ित हैं। 
  • कुछ विरासत में मिली बीमारियाँ या स्थितियाँ होना। 
  • लिम्फोसाइटोपेनिया का खतरा हो सकता है। 
  • व्यक्ति को संक्रमण हुआ हो या किसी तरह की हाल ही सर्जरी करवाई हो। 
  • आप कोई भी ऐसी दवाएँ ले रहे हैं जो आपके लिम्फोसाइट गिनती को प्रभावित कर सकती हैं। 
  • बड़े वयस्क और जो कुपोषित हैं, ऐसे में जोखिम लगा रहता है। (और पढ़े – कुपोषण का कारण क्या हैं)

हमें आशा है की आपके प्रश्न लिम्फोपेनिया क्या होता हैं? का उत्तर इस लेख के माध्यम से दे पाएं। 

अगर आपको लिम्फोपेनिया के बारे अधिक जानकारी चाहिए तो संक्रमण विशेषज्ञ (Infectious disease specialist) से संपर्क कर सकते हैं। 

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है।


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