बच्चो में मोटापा बढ़ने का कारण क्या है। Obesity in Children in Hindi

फ़रवरी 12, 2020 Lifestyle Diseases 8667 Views

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Obesity in Children Meaning in Hindi

सभी बच्चें एक जैसे नहीं होते है, उसी तरह उनके शरीर का विकास अलग-अलग तरह से होता है। अगर बच्चों की वजन की बात करे, तो कोई सटीक वजन बताना बहुत कठिन है। बच्चों के मोटापा होने पर बहुत से माता-पिता इन पर खास ध्यान नहीं देते है क्योंकि उनके हिसाब से बच्चा मोटा है तो स्वस्थ है। मोटापा सभी के लिए एक चिंता का विषय है। हालांकि शरीर की लंबाई और उम्र के आधार पर वजन सामन्य से अधिक है, तो मोटापा कहा जा सकता है। बच्चों का वजन अधिक बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधित अनेको समस्या जैसे: हृदय रोग, डायबिटीज, अस्थमा आदि का सामना करना पड़ सकता है। बच्चों का अधिक मोटापा उनके खेल-कूद करने में बाधा उत्पन्न करता है। कई बार मोटे बच्चें पतले बच्चे को देखकर बहुत दुखी हो जाते है, इस वजह से कुछ बच्चे तनाव ग्रस्त महसूस करने लगते है। आज के इस लेख में बच्चो के मोटापे (Obesity in Children) से होने वाली परेशानियों के बारे में विस्तार से बतलाया गया है।

  • बच्चों में मोटापे होने का कारण क्या है ? (What are the Causes of Obesity in Children in Hindi)
  • बच्चों में मोटापे के लक्षण क्या है ? (What are the Symptoms of Obesity in Children in Hindi)
  • बच्चों के मोटापे का उपचार क्या है ? (What are the Treatments for Obesity in Children in Hindi)
  • बच्चों का मोटापा से बचाव कैसे करें ? (Prevention of Obesity in Children in Hindi)

बच्चों में मोटापे होने का कारण क्या है ? (What are the Causes of Obesity in Children in Hindi)

  • बच्चों में मोटापा होने का मुख्य कारण पारिवारिक हो सकता है अगर माता-पिता मोटे हो तो उनके बच्चें भी मोटे हो सकते है। इसके अलावा बहुत से घरो में कोई भी सदस्य मोटा है, तो बच्चें का शरीर मोटापा होता जाता है। इसका मुख्य कारण रोजाना व्यायाम न करना केवल खाते रहना है। मोटापा होने के कुछ अन्य कारण के बारे में नीचे दिया गया है।
  • बच्चों को प्रोटीन वाली चीज़ो के जगह प्रोटेस्ट फ़ूड जैसे: चायनीज, नूडल्स और चीनी वाले पेय पदार्थ, सॉफ्ट ड्रिंक्स, स्नैक्स, मिठाई वाले खाने आदि मोटापा को बढ़ाते है।
  • शारीरिक गतिविधिया न करने पर मोटापा अपने आप बढ़ने लगता है। इसके अलावा तैलीय भोजन करने से मोटापा बढ़ता जाता है। यदि आप व्यायाम करते है तो आपकी एक्स्ट्रा चर्बी कम होने लगती है और आप नहीं करते तो कैलोरी कम नहीं होती है। अगर बच्चे बाहर खेलने नहीं जाते है या टीवी मोबाईल पर पूरा समय लगा देते है, यह भी मोटापा बढ़ाने का कारण बनता है।
  • बहुत से ऐसे माता-पिता है जिनको समझ नहीं आता है, बच्चें को क्या खाने को दो जो स्वास्थ्य के लिए सही है। इसके अलावा कुछ ऐसे भी माँ बाप है जिनकी पारिवारिक स्तिथि इस योग्य नहीं होती है की उनके बच्चें के लिए ताजे फल या सब्जिया का सेवन करवा सके।
  • बच्चों में तनाव होने से वह अधिक खाना खाने लगते है, जिसके कारण मोटापा धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। इसके अलावा कुछ बैक्टीरियल कारण व दिमाग की कमजोरी भी हो सकता है। कुछ शोध के अनुसार मनोवैज्ञानिक कारण बच्चें के मोटापे का कारण बन सकता है।
  • अक्सर माता अपने बच्चें को डिब्बे बंद वाले दूध पिलाती है, उनको यह समझ नहीं आता है बच्चों को कितनी मात्रा में भोजन करवाया जाये, इस वजह से भोजन की अधिक मात्रा बच्चें को खिला देते है, जिस कारण बच्चा मोटा हो जाता है। (और पढ़े – तनाव दूर करने में लाल मिर्च के फायदे)

बच्चों में मोटापे के लक्षण क्या है ? (What are the Symptoms of Obesity in Children in Hindi)

जैसा की आप सबको पता है सभी बच्चें का शरीर का वजन समान नहीं होता है। कुछ ऐसे बच्चें भी होते है जिनका उनके उम्र के हिसाब से अधिक वजन बढ़ जाता है। शारीरिक विकास की बात करे तो यह भी भिन्न-भिन्न तरीके से होता है। इसके अलावा बच्चें में वसा की मात्रा अलग होती है। बच्चों के वजन व मोटापे को जानने के लिए चिकिस्तक बीएमआई का उपयोग करता है। यह उपकरण मोटापे के सही आंकड़े को बताता है। इसके अलावा मोटापे की जांच करने के लिए बीएमआई चार्ट का उपयोग करते है। कुछ मामलो में चिकिस्तक वजन का सटीक पता लगाने के लिए कुछ जांच कर सकते है, इससे आपके बच्चें के स्वास्थ्य में होने वाले जोखिमों का पता लग सकता है। (और पढ़े – मोटापा कम कैसे करें)

बच्चों के मोटापे का उपचार क्या है ? (What are the Treatments for Obesity in Children in Hindi)

  • बच्चो में मोटापा का उपचार उनके कारणों के आधार पर किया जाता है। उपचार में खासतौर पर बच्चे की आयु व वजन, लंबाई का आकलन किया जाता है। ताकि यह निश्चित कर सके बीएमआई अंक देख सके। बच्चों के मोटापे को कम करने में माता पिता का बड़ा योगदान होता है। बच्चों को शारीरिक विधि करवाना चाहिए।
  • कुछ विशेष परिस्तिथि में मोटापे को कम करने के लिए सर्जरी करने का सुझाव देते है।
  • अगर बच्चे 2 साल के है तो उनको खेलने में प्रोत्साहन दे ताकि वह खेलने कूदने में मजे भी करे और साथ ही वजन पर नियंत्रण हो सके। इसके अलावा अगर आपका बच्चा छे साल से अधिक का हैं तो उनके खाने पिने में पौष्टिक व संतुलित आहार को अधिक शामिल करे। बच्चों को सुबह गतिविधि करवाने की शिक्षा दे। हर महीने बच्चे का वजन मापे और उनके अनुसार उनका डाइट चार्ट बनाये।

बच्चों का मोटापा से बचाव कैसे करें ? (Prevention of Obesity in Children in Hindi)

बच्चों को मोटापे से बचाव करने में सबसे बड़ा योगदान माता-पिता का होता है। इसलिए मोटापे को नियंत्रण करने के लिए बच्चों को निम्नलिखित उपाय करवा सकते है।

  • बच्चों को जितना हो सके घर का खाना दे, बाहर का खाना जंकफूड से बचाये।
  • बच्चों को टीवी मोबाईल खेलने न दे बल्कि बहार खेल कूद करवाए।
  • बच्चों को पौष्टिक व संतुलित आहार दे।
  • बच्चों को मीठी चीज़े यानी चॉकलेट, आईक्रीम, डिब्बा बंद रस कम देने की कोशिश करें। (और पढ़े – मीठे खाने के नुकसान)
  • बच्चों को समाज में रहने के तरीके सिखाये।
  • बच्चों को सुबह शारीरिक गतिविधिया करवाने की शिक्षा दे।
  • विद्यालय में बच्चों को शारीरिक गतिविधि व भावनात्मक, मानसिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर देना चाहिए।

अगर आपके बच्चें का मोटापा दिन पर दिन बढ़ते जा रहे है, तो ऐसे में आपको बाल चिकिस्तक (Pediatric-Endocrinologist) से संपर्क करें।

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है। 


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