जानिए मानसून में होनेवाली बीमारिया और उनके प्राकृतिक उपचार। Pre Monsoon Diseases and Natural Remedies in Hindi

जुलाई 19, 2020 Lifestyle Diseases 7041 Views

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Pre Monsoon Diseases Meaning in Hindi

मानसून यानि बरसात का मौसम आते ही बीमारियों का फैलना शुरू हो जाता हैं। लेकिन लोगो को बरसात का मौसम बहुत पसंद होता है, क्योंकि बरसात होने से तपती गर्मी से राहत मिलती है। इसके अलावा लोग बरसात में नहाना और बौछारे में खेलना पसंद करते है, किंतु ठंडी बारिश में भीगने पर व्यक्ति बीमार हो जाता हैं। बरसात में अधिक भीग जाने पर शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता में कमी होने लगती है और बीमारिया तेजी से प्रहार करने लगती हैं। हालांकि इन समस्या से बचने के लिए शीध्र दवाइयां या कुछ प्राकृतिक घरेलु उपचार का उपयोग कर सकते हैं। वैसे बरसात का मौसम आते ही अपने साथ कई बीमारिया लेकर आता है, इसलिए आज के लेख में हम आपको बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचने के लिए कुछ प्राकृतिक घरेलु उपचार के बारे में विस्तार से बताएंगे।

  • बरसात में होने वाली बीमारियां ? (Pre Monsoon diseases in Hindi)
  • बरसात में होने वाली बीमारियों से बचने के प्राकृतिक उपचार क्या हैं ? (Home remedies to prevent monsoon diseases in Hindi)
  • बरसात के मौसम में आहार में क्या लेना चाहिए ? (Healthy Diet Tips for Rainy Season in Hindi)

बरसात में होने वाली बीमारियां ? (Pre Monsoon diseases in Hindi)

बरसात के मौसम में मुख्य रूप से सर्दी, फ्लू और मच्छरो से अनेक बीमारियां होती हैं। चलिए विस्तार से बताते हैं।

  • बरसात के मौसम में तापमान में उतार चढ़ाव होने से बैक्टीरिया का प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ता है और वह सर्दी या फ्लू का शिकार हो जाता हैं। हालांकि वायरल संक्रमण का सामान्य रूप है। इसलिए बरसात के मौसम में अपने शरीर को सुरक्षित करने के लिए अच्छे पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए आपकी शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो और बीमारियों से लड़ने में सफल रहे। परिणामस्वरूप कीटाणु मारने में मदद कर सके। (और पढ़े – कोरोना वायरस के लक्षण)
  • मच्छरो से फैलने वाली बीमारियों में मलेरिया, डेंगू, हैजा, टाइफोइड, हेपेटाइटिस ए आदि शामिल है।
  • बरसात के मौसम में मलेरिया से अधिक रोग ग्रस्त होते है। बारिश के पानी से जगह जगह भरने पर उसमे मच्छरो की प्रजनन क्रिया होती है। इन भरे पानी को साफ करने से मलेरिया के खतरे को रोका जा सकता हैं।
  • डेंगू बुखार बहुत ही जानलेवा बुखार माना जाता है। यह बुखार एडीज मच्छर के काटने से फैलती है। इस वजह से व्यक्ति के घुटने में दर्द होने लगता है। इस बीमारी से बचने के लिए मच्छरो को शरीर पर काटने से बचाये। इसके लिए मच्छरदानी व पूरी बाहे के कपडे पहने।
  • हैजा एक जलजनित संक्रमण है जो शरीर में कलरा फैलाता है। हैजा मुख्य रूप से जठराल सबंधित मार्ग में समस्या उत्पन्न करता है। इस वजह से दस्त व दिहाइड्रैशन की समस्या हो सकती है। बरसात के मौसम में हमेशा हल्का गर्म पानी पीना चाहिए।
  • टाइफाइड बुखार दूषित भोजन व पानी से होता है। इस बीमारी में साल्मोनेला टाइफिम्यूरियम जीवाणु होते है जो संक्रमण का कारण बनते है। इसलिए अपने घर के आसपास स्वच्छता बनाएं और गंदगी जमा न होने दे। बीमार पड़ने पर तुरंत चिकिस्तक से संपर्क करे।
  • हेपेटाइटिस ए संक्रमण दूषित पानी व भोजन के कारण होता है। यह बीमारी लिवर को अधिक प्रभावित करती है। हेपेटाइटिस ए के लक्षण में बुखार, उल्टी, शरीर पर दाने नजर आते है। अधिक साफ सफाई से भोजन व पानी पिए ताकि बीमारी के जोखिम से बचा जा सके। (और पढ़े – फैटी लिवर के कारण)

बरसात में होने वाली बीमारियों से बचने के प्राकृतिक उपचार क्या हैं ? (Home remedies to prevent monsoon diseases in Hindi)

बरसात के मौसम में सर्दी फ्लू व मच्छरो से जनित बीमारियों के लिए कुछ निम्न प्राकृतिक घरेलु उपचार उपयोग कर सकते हैं।

  • सर्दी और फ्लू से बचने के लिए बहुत पुराने समय से भाप लेना, आराम करना, अधिक नींद पूरी करना, अधिक पानी पीना अधिक फायदेमंद होता है। इसके अलावा गर्म सुप, हर्बल चाय आहार में शामिल करना सही होता है। रोजाना हल्दी वाला दूध पिने से संक्रमण का जोखिम कम रहता है और तुलसी के पत्ते को खाने से रोका जा सकता है। तुलसी बुखार व ठंड से बचाव करने में मदद करती है।
  • मच्छरो से जनित बीमारियों से बचने के लिए सबसे पहले अपने घर के आसपास के स्थान को स्वच्छ बनाएं व पानी को जमा न होने दे। आप संतरा के रस का सेवन करे, इसमें बहुत से पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते है जो आपकी शरीर को मजबूत बनाते है और रोगो से लड़ने में मदद करते है। डेंगू में पपीते के पत्ते का रस बहुत फायदेमंद माना जाता है। नीम के पत्ते भी डेंगू बुखार को दूर करते है। अपने घर में मच्छर भागने वाले क्रीम व कोइल, मच्छरदानी का उपयोग करें। (और पढ़े – मलेरिया बुखार क्यों होता हैं)

बरसात के मौसम में आहार में क्या लेना चाहिए ? (Healthy Diet Tips for Rainy Season in Hindi)

बरसात के मौसम में कुछ निम्न आहार के बारे में बताने वाले है जिनका सेवन मानसून में कर सकते है या नहीं।

  • बरसात के मौसम में मौसमी फल का सेवन करना लाभदायक होता हैं। मौसमी फल में जामुन, सेब, लीची, नाशपाती, अनार, आलूबुखारा, चेरी आदि है जो शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर रोगो से लड़ने में मदद करता हैं।
  • बरसात के मौसम में पानी वाले खाद्य पदार्थो से बचना चाहिए जैसे, लस्सी, तरबूज, छाछ आदि। यह शरीर में सूजन की समस्या उत्पन्न कर सकते है।
  • बरसात के मौसम में कम नमक का सेवन करना चाहिए, क्योंकि अधिक नमक से वॉटर रेटेशन व उच्च रक्त चाप बढ़ सकता है। इसके अलावा अन्य स्वास्थ्य समस्या का जोखिम पैदा हो सकता हैं।
  • दूध की जगह दही या योगर्ट का उपयोग कर सकते है क्योंकि इसका सेवन करने से खराब बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश नहीं कर पाते हैं।
  • बरसात के मौसम में पानी को उबालकर पीना उचित होता हैं और सीधे नल का पानी न पीये।
  • बाहर के स्ट्रीट फ़ूड खाने के बजाय घर का बना भोजन ले ताकि बीमारियों से बचे रहे।
  • बरसात में अत्यधिक मसालेदार भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए। इसके अलावा कड़वे भोजन जरूर शामिल करे जैसे करेला आदि।
  • बरसात में सक्रमण व बुखार से बचने के लिए अदरक, तुलसी, काली मिर्च, दालचीनी, इलायची की चाय बनाकर पीनी चाहिए। (और पढ़े – दालचीनी के फायदे और नुकसान)

बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों के बारे में अधिक जानकारी व उपचार के लिए सामान्य चिकिस्तक (General Physician) से संपर्क करें।

हमारा उद्देश्य है आपको जानकारी प्रदान करना है। ना की किसी तरह के दवा, इलाज, घरेलु उपचार की सलाह दी जाती है। आपको चिकिस्तक अच्छी सलाह दे सकते है क्योंकि उनसे अच्छी सलाह कोई नहीं देता है। 


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