प्रेगनेंसी का पहला महीना । Pregnancy First Month in Hindi

Login to Health फ़रवरी 15, 2021 Lifestyle Diseases 45 Views

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प्रेगनेंसी के पहले महीने मतलब हिंदी में,  (Pregnancy First Month Meaning in Hindi)

गर्भावस्था महिला के जीवन में एक अलग तरह की खुशी का एहसास कराता है। गर्भावस्था के दौरान महिला की जिंदगी नौ महीने के लिए पूरी तरह बदल जाती है। ऐसे समय में महिला निम्न लक्षण व संकेतो का अनुभव करती है। गर्भावस्था के पहले महीने के समय महिला को सही पता नहीं होता है की वो गर्भवती है, ऐसे में चिकिस्तक महिला के पिछले मासिकचक्र के तारीख की पुष्टि कर गर्भावस्था की पहचान करते है। कुछ मामलो में मासिकधर्म रुक जाने से गर्भावस्था लगता है लेकिन मासिकधर्म देरी से भी आ सकता है। जैसा की आपको पता है पुरुष के शुक्राणु महिला के अंडे का निषेचन नहीं करते तब तक भ्रूण का निर्माण नहीं होता है और महिला गर्भवती नहीं होती है। चलिए आज के लेख में प्रेगनेंसी का पहला महीना विस्तार से बताने वाले हैं। 

  • प्रेगनेंसी के पहले महीने के संकेत व लक्षण क्या हैं ? (What are the signs and symptoms of first month of pregnancy in Hindi)
  • प्रेगनेंसी के पहले महीने में शारीरिक बदलाव ? (Physical changes in the first month of pregnancy in Hindi)
  • प्रेगनेंसी के पहले महीने भ्रूण का विकास कैसे होता हैं ? (How do fetuses develop in the first month of pregnancy in Hindi)
  • प्रेगनेंसी के पहले महीने में कौन सी जांच करवानी चाहिए ? (Which test should be done in the first month of pregnancy in Hindi)
  • प्रेगनेंसी के पहले महीने में कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए ? (What should be kept in mind during the first month of pregnancy in Hindi)

प्रेगनेंसी के पहले महीने के संकेत व लक्षण क्या हैं ? (What are the signs and symptoms of first month of pregnancy in Hindi)

गर्भावस्था के पहले महीने में महिला निम्न लक्षण व संकेतो का अनुभव कर सकती है। 

संकेत में शामिल है।-

  • मासिकधर्म न आना। 
  • स्तनों में दर्द का अनुभव होना। 
  • स्पॉटिंग होना।  (और पढ़े – स्पॉटिंग के कारण क्या हैं)
  • मूड में बार -बार बदलाव होना। 
  • अत्यधिक शारीरिक थकान महसूस करना। 
  • बार -बार पेशाब लगना। 
  • एसिड रिफ्लक्स के वजह से सीने में जलन होना। 
  • खाने में अधिक बदलाव करना। 
  • सूंघने की क्षमता में वृद्धि होना। 

लक्षणो में शामिल है। 

  • घबराहट महसूस करना। 
  • सिर में भारीपन लगना। 
  • चक्कर आना। 
  • कमर में अत्यधिक दर्द का अनुभव करना। 
  • अधिक भूख लगना। 
  • कब्ज होना। 
  • अनियमियत मल त्यागना।  (और पढ़े – बवासीर के लक्षण क्या है)

प्रेगनेंसी के पहले महीने में शारीरिक बदलाव ? (Physical changes in the first month of pregnancy in Hindi)

गर्भावस्था के पहले महीने में निम्न शारीरिक बदलाव नजर आ सकते है, लेकिन कुछ महिलाओं में देरी से बदलाव हो सकते है। महिलाओं में मासिकधर्म आने के कुछ दिन पहले से पीएमएस के लक्षण का अनुभव करने लगती है जो कुछ शारीरिक बदलाव के समान ही लगते है। 

  • योनि के स्राव में वृद्धि होना। 
  • महिला को अधिक डर व घबराहट होना। 
  • चक्कर महसूस करना। (और पढ़े – चक्कर क्यों आता है)
  • थकान व कमजोरी महसूस करना। 
  • स्तनों के आकार में बदलाव होना यानि स्तनों का बढ़ना। 
  • निप्पल के आस पास का छेत्र बड़ा और गहरे रंग हो जाता है। 
  • कुछ महिलाओं में रक्त के धब्बे दिखाई दे सकते है। 
  • ऐसे सैमी मोटापा का अनुभव होना। 
  • कुछ महिलाओं में देरी से शारीरिक बदलाव महसूस कर सकती है या पहले महीने के शुरुवात में। (और पढ़े – गर्भावस्था में क्या खाना चाहिए)

प्रेगनेंसी के पहले महीने भ्रूण का विकास कैसे होता हैं ? (How do fetuses develop in the first month of pregnancy in Hindi)

प्रेगनेंसी के पहले महीने भ्रूण का विकास निम्न तरीको से होता है। 

  • संभोग के बाद निषेचन की प्रक्रिया कुछ घंटो में हो सकती है। जैसा की आगे भी बताया डिंब व शुक्राणु दोनों एक दूसरे के संपर्क में आते है तो शिशु का निर्माण कार्य शुरू हो जाता है, इस प्रक्रिया को युग्मनज कहा जाता है। 
  • युग्मनज बनने के बाद आपके फैलोपियन ट्यूब के जरिये गर्भाशय में प्रवेश कर लेता है। यह एकत्रित मांसपेशियो में विभाजित होने लगता है पोषण प्राप्त करने के लिए गर्भाशय की दिवार से जुड़ जाता है। गर्भनाल का निर्माण होने पर भ्रूण पोषण के लिए रक्त वाहिकाओं में घिरता है। 
  • गर्भावस्था के तीसरे व चौथे हफ्ते में भ्रूण में हृदय की धड़कन धड़कने लगती है। हालांकि तब भ्रूण मटर की दाने की तरह होता है लेकिन उसमे शिशु के फेफड़े, हाथ-पैर बनना शुरू हो जाता है। इसके बाद शिशु के चेहरे का निर्माण होने लगता है तो उसमे आंख, कान, नाक भी बनने लगते हैं। (और पढ़े – गर्भावस्था में थकान की समस्या)

प्रेगनेंसी के पहले महीने में कौन सी जांच करवानी चाहिए ? (Which test should be done in the first month of pregnancy in Hindi)

यदि महिला को गर्भावस्था का संदेह हो रहा है तो जांच के लिए चिकिस्तक से संपर्क कर सकते है। 

  • गर्भावस्था की जांच करने के लिए एच.सी.जी. हार्मोन की उपस्थिति के लिए चिकिस्तक आपका मूत्र सैंपल ले कर जांच कर सकते है। इसके अलावा रक्त की जांच भी कर सकते है। 
  • गर्भावस्था में जोखिम का पता लगाने के लिए चिकिस्तक सीरम प्रोजेस्टेरोन की जांच कर सकते है। 
  • गर्भावस्था का पता लगाने के लिए चिकिस्तक अल्ट्रासाउंड स्कैन कर सकता है। इससे महिला की अन्य बीमारियों जैसे मधुमेह का पता लगया जा सकता है। 
  • गर्भधारण में समस्या उत्पन्न करने वाले कारणों के बारे में जानने के लिए पैप स्मीयर जांच की जाती है। (और पढ़े – कोलोंस्कोपी जांच क्यों किया जाता है)

प्रेगनेंसी के पहले महीने में कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए ? (What should be kept in mind during the first month of pregnancy in Hindi)

गर्भावस्था के पहले महीने में निम्नलिखित सावधानी बरतना चाहिए। 

  • अपने आहार में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ अधिक शामिल करें। 
  • गर्भावस्था में अधिक मात्रा में तरल पदार्थ व पानी पीना चाहिए। 
  • गर्भावस्था के दौरान थोड़ा चलना फिरना चाहिए साथ ही हल्के व्यायाम कर सकते है। 
  • गर्भावस्था में पर्याप्त मात्रा में नींद लेनी चाहिए। 
  • गर्भावस्था के समय अपनी योनि में संक्रमण से बचाव करने के लिए योनि की स्वच्छता रखनी चाहिए। (और पढ़े – योनि में यीस्ट संक्रमण को दुर करने के घरेलु उपचार)

हमें आशा है की आपके प्रश्न प्रेगनेंसी का पहला महीना ? का उत्तर इस लेख के माध्यम से दे पाएं। 

अगर आपको प्रेगनेंसी का पहला महीना के बारे में अधिक जानकारी के लिए (Gynecologist) से संपर्क कर सकते हैं। 

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है।


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