पाइलोरोमायोटमी क्या है? Pyloromyotomy in Hindi

फ़रवरी 4, 2021 Lifestyle Diseases 577 Views

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पाइलोरोमायोटमी का मतलब हिंदी में,  (Pyloromyotomy Meaning in Hindi)

पाइलोरोमायोटमी क्या है?

पाइलोरोमायोटमी एक तरह की सर्जिकल प्रक्रिया है जो हाइपरट्रॉफिक पायलोरिक स्टेनोसिस के इलाज के लिए किया जाता है। यह प्रक्रिया तब की जाती है जब किसी बच्चे को पेट संबंधित समस्या रहती है या पाचन ठीक से नहीं हो पाता है। बच्चा कुछ भी खाता- पिता है तो उल्टियां कर देता है। इसके अलावा डिहाइड्रेशन, अचानक वजन में कमी आना जैसी समस्या रहती है। यदि कोई बच्चा पहले से पायलोरिक स्टेनोसिस से पीड़ित है, तो उसे बहुत भूख लगती है। ऐसे में चिकिस्तक बच्चे का परीक्षण करते है और लक्षण जानने के बाद पाइलोरोमायोटमी सर्जरी करते है जिसमे ओपन सर्जरी व लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। चिकिस्तको के अनुसरा  पायलोरिक स्टेनोसिस के अधिक मामले लड़कियों की अपेक्षा लड़को में होता है। इस विकार का स्पष्ट कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन यह विकार अनुवांशिक या जींस के कारण हो सकता है। बहुत से लोगो  पायलोरिक स्टेनोसिस के बारे में पता नहीं होगा, चलिए आज के लेख में आपको पाइलोरोमायोटमी के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं। 

  • पाइलोरोमायोटमी क्यों किया जाता हैं ? (What are the Purpose of Pyloromyotomy in Hindi)
  • पाइलोरोमायोटमी सर्जरी कैसे किया जाता हैं ? (What are the Procedure of Pyloromyotomy in Hindi)
  • पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के बाद देखभाल ? (How to Care After Pyloromyotomy in Hindi)
  • पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के बाद क्या जटिलताएं आ सकती हैं ?  (What are the Risks of Pyloromyotomy in Hindi)

पाइलोरोमायोटमी क्यों किया जाता हैं ? (What are the Purpose of Pyloromyotomy in Hindi)

पाइलोरोमायोटमी करवाने की सलाह कुछ लक्षण के आधार पर दिया जा सकता हैं। 

  • जैसे – डिहाइड्रेशन होना। 
  • कब्ज होना। 
  • अत्यधिक उल्टी आना। 
  • अचानक से वजन बढ़ना। 
  • बच्चों को भूख प्यास लगने पर सेवन कर उल्टी कर देना। 
  • कुछ भी खाने के बाद उल्टी करना। 
  • गैस्टिक अल्सर गंभीर होना। 
  • एब्डोमेन पेन होना। 
  • लगातार कम मल आना। 
  • मल में बलगम की उपस्थिति। (और पढ़े – बवासीर के घरेलु उपचार)

पाइलोरोमायोटमी सर्जरी कैसे किया जाता हैं ? (What are the Procedure of Pyloromyotomy in Hindi)

  • पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के पहले चिकिस्तक कुछ परीक्षण करते है। सबसे पहले शारीरिक परीक्षण करते है, जिसमे शिशु के पायलोरिक स्टेनोसिस व उल्टी के इतिहास के बारे में पूछते है। इसके अलावा पेट के दाये और ऊपरी जांच करते है की द्रव महसूस हो रहा है या पायलोरिक मांसपेशी बढ़ा हुआ है। 
  • पायलोरिक मांसपेशी की जांच जांच करने के लिए पेट का अल्ट्रासाउंड करते है। यदि अल्ट्रासाउंड से कुछ सटीक पता नहीं चल पाता तो, अन्य एक्स रे निकाल सकते है। सर्जरी के पहले बच्चा कुछ भी खाएं -पीए नहीं यह सुनिश्चित कर ले।
  • पाइलोरोमायोटमी सर्जरी की प्रक्रिया शुरू करने के पहले सामान्य एनेस्थीसिया दिया जाता है, ताकि प्रक्रिया के दौरान शिशु सोया रहे। पेट के ऊपरी हिस्से में एक चीरा लगाते है और पाइलोरिक मांसपेशी को फैलाते है। अब पाइलोरिक मांसपेशिया बढ़ी बाहरी परत की कटौती की जायेगी। इसके बाद चीरे लगे स्थानों को टांके लगा दिए जाते है। हालांकि पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के लिए छोटे चिरो के साथ लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया का उपयोग भी शामिल होता है। इस प्रक्रिया में कम से कम एक से दो घंटो का समय लग सकता है। (और पढ़े – लेप्रोस्कोपिक क्या होता है)

पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के बाद देखभाल ? (How to Care After Pyloromyotomy in Hindi)

पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के बाद चिकिस्तक शिशु की देखभाल करने के लिए निम्न सलाह देते हैं। 

  • सर्जरी के बाद तीन दिन के लिए दर्द निवारक दवाएँ दे सकते है। 
  • सर्जरी के बाद कुछ हफ्तों तक हल्के व ढीले कपड़े पहनाएं, ताकि शिशु को परेशानी न हो। 
  • जिस जगह पर सर्जरी हुई है उस जगह को सूखा रखे और हल्के हाथ से साफ जरूर करें। 
  • अगर बच्चें को स्नान करवाना चाहते है तो ध्यान रहे सर्जरी के जगह को चोट न लगे। इसके अलावा स्नान के बारे में चिकिस्तक से पूछ सकते है कब से स्नान करवा सकते है। 
  • बच्चें के शरीर का वजन सामान्य रखने के लिए चिकिस्तक द्वारा बताये गये पोषक तत्व आहार में दे। 
  • सर्जरी के बाद बच्चों को थोड़ी शिक्षा प्रदान करे कैसे सोना है और कैसे रहना है ताकि सर्जरी वाली स्थान को क्षति न पहुंचे। 
  • सर्जरी के बाद बच्चों की उल्टी आने की समस्या बंद हो जाती है, किंतु कुछ मामलो में थोड़ी उल्टी आ सकती है जो कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। (और पढ़े – समय से पहले जन्मा बच्चा कैसे दिखता है)

सर्जरी के बाद बच्चें में लक्षण नजर आते है तो चिकिस्तक से संपर्क करें। 

  • जैसे – अगर बच्चे का शरीर का तापमान 37 सेल्सियस से अधिक है। (और पढ़े – बच्चों में पीलिया की समस्या)
  • सर्जरी के स्थान पर अधिक सूजन व लालिमा नजर आना। 
  • दवा के सेवन के बाद भी अधिक दर्द होना। 
  • पानी की कमी होने से पेशाब कम होना। 

पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के बाद क्या जटिलताएं आ सकती हैं ?  (What are the Risks of Pyloromyotomy in Hindi)

सभी सर्जरी में कम या अधिक जोखिम रहता है उसी तरह पाइलोरोमायोटमी सर्जरी में कुछ जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। चलिए आगे बताते हैं। 

  • सर्जरी के बाद उल्टी आना। 
  • सर्जरी वाले जगह पर संक्रमण का खतरा होना। 
  • सर्जरी के स्थान में दर्द व रक्तस्राव होना। 
  • सर्जरी के टांके खुल जाना। 
  • आंतों को नुकसान 
  • पेट में पहले की सर्जरी
  • कुपोषण या निर्जलीकरण
  • दिल या फेफड़ों की स्थिति
  • चीरा स्थल पर हर्निया का गठन (और पढ़े – हर्निया का इलाज क्या है)
  • पेट की दिवार में छेद होना। 
  • अनाकर्षक चिह्न या निशान पड़ना। 

हमें आशा है की आपके प्रश्न पाइलोरोमायोटमी क्या है? का उत्तर इस लेख के माध्यम से दे पाएं। 

अगर आपको पाइलोरोमायोटमी के बारे में अधिक जानकारी के लिए (Pediatric Surgeon) से संपर्क कर सकते हैं। 

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है।


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