वर्टिगो क्यों आता है। What is Vertigo in Hindi?

Login to Health मार्च 22, 2019 Brain Diseases, Lifestyle Diseases 17028 Views

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Vertigo in Hindi.

वर्टिगो का अर्थ है, घूमना या चक्कर आना, वर्टिगो शब्द लैटिन भाषा वर्टो से लिया गया है। वर्टिगो में लोगो को बहुत चक्कर आता है। मस्तिष्क में बहुत पीड़ा होती है या असंतुलन बना रहता है। इस असंतुलन के समय पीड़ित व्यक्ति को अधिक पसीने आना अथवा जी मचलना, उल्टी आना इत्यादि होता है। वर्टिगो के दौरान पीड़ित व्यक्ति बहुत अधिक कमजोरी महसूस करने लगता है। कुछ लोगो को ऊंचाई से बहुत डर लगता है और अधिक ऊंचाई पर जाने उनका सिर चक्कराने लगता है।

ज्यादा ऊंचाई से डर लगने के लक्षण को एक्रोफोबिया कहते है। यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब व्यक्ति को कान, मस्तिष्क व तंत्रिका मार्ग में कोई बाधा रहती है।

वर्टिगो किसी को भी हो सकता है इसके लिए कोई आयु सीमित नहीं है खासतौर पर बुजुर्गों में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगो में वर्टिगो आम बात है।

डिजिनेस और वर्टिगो सभी छेत्र के चिकिस्तको के लिए सामान्य शिकायत है। 15 %से 40 % लोग अपने जीवन के किसी भी क्षण वर्टिगो और डिजिनेस से पीड़ित होते है। 

चलिए आज वर्टिगो के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करे।

वर्टिगो क्या है ? (What is Vertigo in Hindi)

वर्टिगो चक्कर आने से मस्तिष्क घूमने लगता है व आंखो के सामने अंधेरा सा छा जाता है। कुछ नजर नहीं आता है और सारी धरती मानो घूम रही होती है।  यह अकसर तब होता है जब शरीर में रक्त की पूर्ति कम होती है रक्तचाप की अचानक कमी होने से वर्टिगो की स्तिथि बन जाती है। जिससे चक्कर आने लगता है। वर्टिगो के प्रभाव से लोगो को काम करने में समस्या उत्पन्न होती है क्योंकि रोजमर्रा की जिंदगी में लोगो को काम की बहुत चिंता रहती है और अधिक चिंता करने से मस्तिष्क प्रभावित होता है। जिससे वर्टिगो अटैक भी होता है। वर्टिगो अटैक कभी भी आ सकता है, चिकिस्तको के अनुसार वर्टिगो अटैक लंबे समय तक रहता व थोड़ी देर भी रह सकता है। मस्तिष्क रोगी व्यक्तियो को वर्टिगो अधिक प्रभावित करता है।

वर्टिगो के कारण क्या है? (What are The Causes of Vertigo in Hindi)

वर्टिगो बहुत सी बीमारियों को उभारने का काम करता है वर्टिगो के कारण आंतरिक कान में असंतुलन होता है। यह समस्या मस्तिष्क की बीमारियों के कारण होता है।

वर्टिगो के निम्लिखित कारण है।

  • BPPV – BPPV के चक्कर आमतौर पर सोने व् करवट बदलने पर आते है इसमें कान की शिराओ में कैल्शियम कार्बोनेट का कचरा जमा हो जाता है।बुजुर्गो रोगियों में BPPV कारण अत्यधिक होता है क्योकि सिर पर चोट लगने  से वह बिस्तर पर ही होते है जिससे उनके कान के भीतर संक्रमण होने लगता है।
  • मेनियार्स – मेनियार्स का रोग कान के भीतरी भाग में होता है, यह सुनने की शक्ति को प्रभावित करता है व आवाजे आती है जिसके कारण कुछ घंटो में चक्कर आने की संभावना होती हैं। यह कान के भीतर बहने वाले तरलपदार्थो के कारण होता है।
  • वेस्टीब्यूलर माइग्रेन – वेस्टीब्यूलर माइग्रेन के कारण सामान्य है। चक्कर आना, सिर में दर्द होना यह सामान्य लक्षण सभी वर्ग के लोगो में होना आम बात है। यह एक दूसरे से जुड़े रहते अथवा स्वतंत्र होते है। इन रोगियों के सुनवाई की समस्या नहीं होती है। वह अक्सर तेज रोशनी और आवाज को सेहन नहीं कर पाते है।
  • लेब्रिथीनाइटिस – यह रोग शरीर में संतुलन नस के जीवाणु  संक्रमण का कारण होता है। जिससे एक कान में अधिक और दूसरे कान में बहरापन आ जाता है।

वर्टिगो के लक्षण क्या है ? (What are The Symptoms of Vertigo in Hindi)

वर्टिगो के लक्षण इस प्रकार हैं।

  • अस्थिर या असंतुलित मह्सुस करना।
  • उच्चाई से डरना।
  • कम सुनाई देना।
  • गिरने का एहसास होना।
  • अधिक आवाज आने से सिरदर्द होना।
  • चक्कर आना।

वर्टिगो का इलाज क्या है ? (What is The Treatment for Vertigo in Hindi)

  • सामान्य वर्टिगो को इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है यह अपने आप ही ठीक हो जाता है। जिन्हे गंभीर रूप से वर्टिगो की शिकायत होती है उन्हे डॉक्टर जीवाणु संक्रमण को कम करने के लिए एंटीबायोटिक जैसी कुछ दवाइया देते हैं।
  • मोशन सिकनेस और जी मिचलाने व की समस्या को दूर करने के लिए डॉक्टर एंटी- इमिटिक्स या एंटी-हिस्टामाइन जैसे दवाओं की सलाह देते है।
  • यदि व्यक्ति को चिंता के वजह से चक्कर आने की समस्या होती है, तो चिकिस्तक मनोचिकित्सा थेरेपी की सहायता लेने की सलाह देते है। इस थेरेपी की मदद से मरीज की चक्कर की समस्या को ठीक किया जाता है।

(और पढ़े – स्पीच थेरेपी क्या है)

अगर आप वर्टिगो की समस्या से परेशान है तो अपने नजदीकी किसी अच्छे जनरल फिजिशियन डॉक्टर (General Physician) से संपर्क करे।