गैस्ट्रोस्कोपी क्या है । Gastroscopy in Hindi

Login to Health मार्च 20, 2021 Lifestyle Diseases, Liver Section 54 Views

हिन्दी

गैस्ट्रोस्कोपी का मतलब हिंदी में,  (Gastroscopy Meaning in Hindi)

गैस्ट्रोस्कोपी क्या है ?

गैस्ट्रोस्कोपी एक तरह की जांच प्रक्रिया है, जिसमे पेट से संबंधित समस्या का पता लगाया जाता है। एंडोस्कोप एक मशीन है जो पतले व लचीले ट्यूब से बना होता है। इसमें एक कैमरा लगा होता है जो अंदर की छवियों को मॉनिटर पर दर्शाता है। इस उपकरण का मुख्य कार्य है पेट के अंदर के छोटे आंत व एसोफैगस में होने वाली समस्या को देखना होता हैं। इसके अलावा ब्लीडिंग नसों की जांच करना ताकि चिकिस्तक उस जगह को निशान लगाकर उपचार कर सके। पेट के छालो का उपचार व एसोफैगस पतला है तो एंडोस्कोप की मदद से फैलाते है। चलिए आज के लेख में आपको गैस्ट्रोस्कोपी क्या है? के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं। 

  • गैस्ट्रोस्कोपी क्या है ? गैस्ट्रोस्कोपी क्यों किया जाता हैं ? (What are the Purpose of Gastroscopy in Hindi)
  • गैस्ट्रोस्कोपी से पहले की तैयारी ? (Prepare Before Gastroscopy in Hindi)
  • गैस्ट्रोस्कोपी कैसे किया जाता हैं ? (What are the Procedure of Gastroscopy in Hindi)
  • गैस्ट्रोस्कोपी के बाद देखभाल ? (After Care Gastroscopy in Hindi)
  • गैस्ट्रोस्कोपी के क्या जोखिम होते हैं ? (What are the risks of Gastroscopy in Hindi)
  • गैस्ट्रोस्कोपी के क्या परिणाम आ सकते हैं ? (What do the Result of Gastroscopy mean in Hindi)

गैस्ट्रोस्कोपी क्या है ? गैस्ट्रोस्कोपी क्यों किया जाता हैं ? (What are the Purpose of Gastroscopy in Hindi)

गैस्ट्रोस्कोपी करवाने की सलाह निम्न स्थितियों के आधार पर दिया जा सकता हैं। 

  • बार -बार उल्टी आना। 
  • सीने में जलन होना। 
  • अपच होना। 
  • पेट के ऊपरी हिस्से में अधिक दर्द होना। 
  • कुछ खाने या पीने में परेशानी होना। 
  • पेट के ऊपरी हिस्से में अन्य समस्या होना। (और पढ़े – एंडोस्कोपी क्यों किया जाता हैं)

कुछ स्तिथि में चिकिस्तक गैस्ट्रोस्कोपी न करवाने की सलाह देते है। 

गैस्ट्रोस्कोपी से पहले की तैयारी ? (Prepare Before Gastroscopy in Hindi)

  • गैस्ट्रोस्कोपी करवाने के आठ घंटे पहले चिकिस्तक मरीज को कुछ भी खाने -पीने से मना करते है। इसके अलावा जांच के कुछ घंटे पहले पानी न पीये। 
  • यदि आप किसी तरह के रोग से ग्रस्त है जैसे बीपी या डायबिटीज तो पहले ही जानकारी दे देना चाहिए। 
  • अगर खून पतला करने वाली दवा का सेवन करता है तो चिकिस्तक जांच के कुछ हफ्तों पहले बंद करने की सलाह दे सकते है ताकि जांच में कोई बाधा नहीं उत्पन्न हो। यह दवाइया जांच के परिणाम को प्रभावित कर देती है।  
  • कोई व्यक्ति धूम्रपान या शराब का सेवन करता है तो चिकिस्तक जांच से दो या तीन पहले बंद करने की सलाह देते हैं। 
  • जैसा की आपको पता है पेट के अंदर की जांच करने के लिए पेट पूरी तरह खाली होना चाहिए। ताकि चिकिस्तक अंदर अच्छी तरह जांच कर सके। (और पढ़े – कोलोंस्कोपी क्यों किया जाता हैं)

गैस्ट्रोस्कोपी कैसे किया जाता हैं ? (What are the Procedure of Gastroscopy in Hindi)

गैस्ट्रोस्कोपी एक आउटपेशंट प्रक्रिया है जिसमे मरीज को रातभर अस्पताल में रुकने की जरूरत नहीं होती है। गैस्ट्रोस्कोपी की प्रक्रिया में कम से कम 15 से 20 मिनट तक का समय लग सकता है। इस प्रक्रिया के दौरान मरीज के गले को एनेस्थीसिया स्प्रे लगाकर सुन्न कर दिया जाता है ताकि आपके दांत को सुरक्षा प्रदान किया जा सके। अब एंडोस्कोपिस्ट बाई करवट लेटाते है और एंडोस्कोप को गले के द्वारा पेट के अंदर डाला जाता है। एंडोस्कोप अंदर जाने के बाद पेट में हवा भर जाती है। एंडोस्कोपिस्ट के माध्यम से पेट के अंदर की परेशानियों को देखा जाता है जैसे पेट के अंदर लालिमा, चकत्ते, ब्लॉकेज, छेद को देख सकते हैं। यदि अन्य समस्या नजर आती है तो चिकिस्तक एडोस्कोप की मदद से टिश्यू का एक नमूना लेकर जांच के लिए लैब भेजते है। यदि पेट से जुडी कोई समस्या निकलती है  चिकिस्तक जांच के आधार पर इलाज करते हैं। (और पढ़े – पेट में अल्सर क्यों होता हैं)

गैस्ट्रोस्कोपी के बाद देखभाल ? (After Care Gastroscopy in Hindi)

गैस्ट्रोस्कोपी के बाद मरीज को ठीक होने में अधिक समय नहीं लगता है। जांच के बाद मरीज को घर जा सकता है। यदि मरीज को बेहोश किया गया है तो दूसरे दिन घर जा सकते हैं। 

  • जांच के बाद मरीज को अपना ध्यान रखना चाहिए और शराब का सेवन न करे व नीद की दवा न ले। 
  • जांच के बाद मरीज को खुद गाड़ी नहीं ड्राइव करना चाहिए। 
  • जांच के 24 घंटो के बाद मरीज को चिकिस्तक द्वारा दी गयी दवा का सेवन करना चाहिए। 
  • गैस्ट्रोस्कोपी जांच के परिणाम के लिए चिकिस्तक अस्पताल बुला सकते हैं। 
  • गैस्ट्रोस्कोपी जांच के बाद मरीज को खान -पान के बारे में चिकिस्तक से बात करनी चाहिए। (और पढ़े – एसिड रिफ्लेक्स की समस्या)

गैस्ट्रोस्कोपी के क्या जोखिम होते हैं ? (What are the risks of Gastroscopy in Hindi)

गैस्ट्रोस्कोपी एक तरह की सुरक्षित प्रक्रिया है जिसमे जोखिम की संभावना बहुत कम ही होती है। इन जोखिम में शामिल हैं। 

  • जैसे – सांस लेने में कठिनाई होना। 
  • दिल की धकड़ने की गति बढ़ना। 
  • बीपी कम या ज्यादा होना। 
  • बेहोश करने वाली दवाओं से एलर्जी प्रतिक्रिया। 
  • इंटरनल ब्लीडिंग होना। 
  • गले में सूजन या दर्द होना। 
  • पेट या ड्यूडनम में छेद हो जाना। 

चिकिस्तक से संपर्क कब करें –

यदि मरीज को उल्टी में खून आ रहा है या सीने में गंभीर दर्द हो रहा है तो तुरंत चिकिस्तक से संपर्क करें। (और पढ़े – फुल बॉडी चेकअप क्या हैं)

गैस्ट्रोस्कोपी के क्या परिणाम आ सकते हैं ? (What do the Result of Gastroscopy mean in Hindi)

गैस्ट्रोस्कोपी जांच के परिणाम मरीज के उम्र और स्वास्थ्य की स्तिथि के आधार पर तय किया जाता है। परिणाम में सामान्य या असामान्य आ सकता है। 

यदि चिकिस्तक बायोप्सी करता है तो परिणाम आने में थोड़ा समय लगता है। आपके चिकिस्तक परिणाम के बारे में बताने के लिए अस्पताल किसी घर के सदस्य के साथ बुलाते है ताकि स्वास्थ्य के बारे में सटीक जानकारी दे सके। यदि परिणाम सामान्य आते है तो कोई खास उपचार की जरूरत नहीं होती है। लेकिन परिणाम असामन्य आने पर चिकिस्तक अन्य जांच व उपचार करवाने की सलाह दे सकता हैं। (और पढ़े – बायोप्सी क्यों किया जाता हैं)

हमें आशा है की आपके प्रश्न गैस्ट्रोस्कोपी क्या है ? का उत्तर इस लेख के माध्यम से दे पाएं। 

अगर आपको गैस्ट्रोस्कोपी के बारे में अधिक जानकारी व इलाज करवाना हो, तो (Gastroenterologist) से संपर्क कर सकते हैं। 

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है।


Best Gastroenterologist in Delhi

Best Gastroenterologist in Mumbai

Best Gastroenterologist in Chennai

Best Gastroenterologist in Bangalore