यौन संचारित रोग (एसटीडी) क्या हैं। Sexually Transmitted Diseases (STDs) in Hindi.

Login to Health अक्टूबर 7, 2020 Mens Health, Womens Health 832 Views

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Sexually Transmitted Diseases in Hindi. 

यौन संचारित बीमारी को एसटीडी रोग के नाम से जाना जाता है। यह रोग यौन संपर्क के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे में पारित होने वाली स्थिति को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। एसटीडी रोग यौन संबंधित रोग है जो किसी भी महिला या पुरुष को हो सकता है। यदि आप एसटीडी वाले किसी व्यक्ति के साथ असुरक्षित योनि, गुदा या मुख मैथुन कर संपर्क में आए तो एसटीडी रोग हो सकता है। एसटीडी को यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) या वीनर रोग (वीडी) भी कहा जा सकता है। हालांकि एसटीडी केवल यौन संपर्क में आने से ही होता है किंतु यौन संचारित संक्रमण संक्रमित सुइयों और स्तनपान के जरिए हो सकता है। इन रोगो के अनेक लक्षण होते है जो पीड़ित व्यक्ति को तकलीफ देते है। इसलिए चिकिस्तक लक्षण को जानने के बाद का उपचार करने में मदद करते है। चलिए आपको आज के लेख में एसटीडी (Sexually Transmitted Diseases in Hindi)  रोग के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। 

  • एसटीडी के लक्षण क्या हैं ? (Symptoms of Sexually Transmitted Diseases (STDs) in Hindi)
  • एसटीडी के प्रकार ? (Types of STDs in Hindi)
  • एसटीडी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज की रोकथाम कैसे करें ? (Prevention of Sexually Transmitted Diseases (STDs) in Hindi)

एसटीडी के लक्षण क्या हैं ? (Symptoms of Sexually Transmitted Diseases (STDs) in Hindi)

महिलाओं में एसटीडी के लक्षण –  महिलाओं में कई मामलों एसटीडी (Sexually Transmitted Diseases in Hindi) के ऐसे होते है जो ध्यान देने योग्य लक्षण नहीं होते है। यह लक्षण किसी बीमारी का कारण नहीं होता है। हालांकि सामान्य एसटीडी लक्षण इस तरह है। 

  • जैसे – सेक्स या पेशाब के दौरान दर्द या तकलीफ होना। 
  • योनी, गुदा, नितंब, जांघ, या मुंह पर या उसके आसपास घाव, छाले या चकत्ते आना। 
  • योनि से असामान्य स्त्राव या रक्तस्राव होना। (और पढ़े – स्पॉटिंग के लक्षण)
  • योनि में या उसके आसपास खुजली होना। 

पुरुषो में एसटीडी के लक्षण –  पुरुषो में बिना एसटीडी के लक्षण विकसित होना संभव होता है। लेकिन कुछ एसटीडी लक्षण स्पष्ट दिखाई देते है। एसटीडी के सामान्य लक्षण इस तरह है। 

  • जैसे – सेक्स या पेशाब के दौरान दर्द या तकलीफ महसूस करना। 
  • लिंग, अंडकोष, गुदा, नितंब, जांघ, या मुंह पर या उसके आसपास घाव, छाले या चकत्ते आना। 
  • लिंग से असामान्य निर्वहन या रक्तस्राव होना।
  • र्दनाक या सूजे हुए अंडकोष।

एसटीडी के प्रकार ? (Types of STDs in Hindi)

कई अलग-अलग प्रकार के संक्रमण यौन संचारित रोग पैदा कर सकते है। चलिए आगे एसटीडी के आम प्रकार के बारे में बताते है। 

  • यौन संचारित रोग गोनोरिया (Gonorrhea) गोनोरिया नामक जीवाणु महिला और पुरुष को तेजी से संक्रमित करता है। यह यौन संचारित रोग में मुख्य है जो मौखिक सेक्स करने से अधिक होता है। संक्रमण होने से दर्द सूजन की समस्या होती है। निसरेरिया गोनोरिया के कारण इसे सुजाक भी कहा जाता है। यह गले, आंखो, गर्भाशय, गुदा, मूत्रमार्ग में सक्रमण फैला सकता है। यदि निसरेरिया गोनोरिया रक्त में फैलता है तो व्यक्ति को बुखार और त्वचा में चोट के निशान नजर आ सकते है। (और पढ़े – एक्जिमा क्यों होता है)
  • संचारित रोग एचवीपी (human papillomavirus) एचपीवी यौन संचारित संक्रमण होता है जो पुरुष और महिला दोनों को हो सकता है। जब एचपीवी संक्रमण होना शुरू होता है तो व्यक्ति के जननांग में मस्से बनने लगते है। इसके अलावा हाथ और पेरो में समस्या होने लगती है जो तनाव का कारण बनता है। एचपीवी संक्रमण खासतौर पर संभोग करने के कारण एक त्वचा से दूसरे त्वचा में फैलने लगता है। इसके अलावा जननांगो के स्पर्श होने से अन्य त्वचा के हिस्से में फैलने लगते है। कई बार पुरुष संक्रमित होने पर जान नहीं पाता है की वो एचपीवी संक्रमण से पीड़ित हो चूका है।
  • यौन संचारित रोग क्लैमिडिया (Chlamydia) क्लैमिडिया यौन संचारित रोग में से एक है। क्लैमिडिया ट्रैकोमेटिस जीवाणु के कारण होता है। यह जीवाणु गर्भाशय ग्रीवा के आसपास या यूरिन नली, गुदा को संक्रमित करता है। असुरक्षित यौन संबंध, गुदा, मुख संभोग करने से क्लैमिडिया होता है। यह संक्रमण माँ से बच्चे को भी हो सकता है। क्लैमिडिया जिन पुरुषो को होती है उनको पेशाब करते समय लिंग में जलन होने लगती है। इसके अलावा लिंग में खुजली या जलन पैदा होता है। (और पढ़े – असुरक्षित यौन संबंध से होने वाली बीमारियां)
  • यौन संचारित रोग हर्पिस (Herpes) हरपीज दाद सिंप्लेक्स वायरस (HSV) के लिए छोटा नाम है। यह वायरस के दो मुख्य भाग हैं, एचएसवी -1 और एचएसवी -2। इन दोनों को यौन संचारित संक्रमण कहा जाता है। यह एक बहुत ही सामान्य एसटीडी है। एचएसवी -1 मुख्य रूप से मौखिक दाद का कारण बनता है, जो ठंड घावों के लिए जिम्मेदार होता है। इसके अलावा एचएसवी -1 मौखिक सेक्स के दौरान एक व्यक्ति के मुंह से दूसरे व्यक्ति के जननांगों में भी जा सकता है। जब ऐसा होता है, तो एचएसवी -1 पैदा कर सकता है। एचएसवी -2 मुख्य रूप से जननांग में दाद का कारण बनता है। लक्षण में छाले या घाव शामिल है। जननांग दाद के मामले में, ये घाव जननांगों पर या उसके आसपास विकसित होते हैं। मौखिक दाद में व्यक्ति के मुंह पर या उसके आसपास विकसित हो सकता है। 

एसटीडी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज की रोकथाम कैसे करें ? (Prevention of Sexually Transmitted Diseases (STDs) in Hindi)

एसटीडी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज से बचाव करने के लिए कुछ निम्न उपाय अपना सकते हैं। चलिए आगे बताते हैं। 

  • यौन संबंध बनाने के लिए सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा आप किस साथी के साथ संभोग कर रहे है यह निर्भर करता है। 
  • महिला कंडोम अधिक सुरक्षा प्रदान नहीं करते है जितना पुरुष के कंडोम करते है। इसलिए संभोग करने से पहले पुरुषो को कंडोम का उपयोग करना चाहिए। कंडोम में कई प्रकार होते है जिनमे लेटेक्स कंडोम यौन रोग से बचाव करता है। (और पढ़ेकंडोम के उपयोग और फायदे)
  • महिलाओं को अपनी योनि को हमेशा सफाई करनी चाहिए ताकि किसी संक्रमण का जोखिम हो। इसके अलावा पुरुषो को भी अपने गुप्त अंगो को स्वच्छ रखना चाहिए। 
  • यदि एसटीडी के गंभीर लक्षण का अनुभव कर रहे है तो अपने चिकिस्तक से जांच करवाएं। 

अगर किसी व्यक्ति को एसटीडी (Sexually Transmitted Disease in Hindi) रोग के लक्षण नजर रहे है तो किसी अच्छे (Urologist/Dermatologist) से संपर्क कर सकते हैं। 

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है।


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