हाई रिस्क प्रेग्नेंसी क्या हैं । High risk pregnancy in Hindi

दिसम्बर 7, 2020 Womens Health 1296 Views

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हाई रिस्क प्रेग्नेंसी क्या हैं ?

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी यानि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था स्तिथि है जिसमे मां या उसके भ्रूण के स्वास्थ्य या जीवन को खतरे में डालती है। ऐसे में महिला को अपना विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है और समय- समय चिकिस्तक के पास जांच के लिए जाना चाहिए। यदि महिला पहले से किसी बीमारी से पीड़ित है जैसे डायबिटीज, बीपी, थाइरोइड आदि। ऐसे में बच्चें का विकास धीमी व खून न बन पाना व समय से पहले लेबर पेन जैसे जटिलता हो सकती है। हालांकि शुरुवात और नियमित प्रसव से पहले देखभाल करने से कई महिलाओं को जटिलताओं के बिना स्वस्थ गर्भधारण और प्रसव कराने में मदद हो सकती है। कुछ मामलो में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी क जोखिम बहुत कम उम्र में माँ बनने या अधिक उम्र में माँ बनने से हो सकता है। शायद बहुत सी महिलाएं सोच रही होगी हाई रिस्क प्रेग्नेंसी क्या हैं, चलिए आज के लेख में हाई रिक्स प्रेग्नेंसी के बारे में बताने वाले हैं। 

  • हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का कारण ? (Causes of High Risk Pregnancy in Hindi)
  • हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के संकेत व लक्षण ? (Sign and Symptoms of High Risk Pregnancy in Hindi)
  • हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का निदान ? (Diagnoses of High Risk Pregnancy in Hindi)
  • हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का इलाज ? (Treatments for High Risk Pregnancy in Hindi)
  • हाई रिस्क प्रेग्नेंसी से बचाव ? (Prevention of High Risk Pregnancy in Hindi)

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का कारण ? (Causes of High Risk Pregnancy in Hindi)

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के निम्न जोखिम कारक हो सकते हैं जो माँ और बच्चें के सेहत पर बुरा प्रभाव डालता है। 

  • उन्नत मातृ आयु 35 वर्ष से अधिक उम्र की माताओं के लिए गर्भावस्था का जोखिम अधिक होता है। इसके अलावा 18 वर्ष की उम्र में गर्भावस्था होना अनेक जोखिम को बढ़ावा दे सकता हैं। 
  • जीवनशैली   सिगरेट पीना, शराब पीना और अवैध ड्रग्स का उपयोग करना गर्भावस्था को खतरे में डाल सकता है।
  • माता की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएंउच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह, मिर्गी, थायरॉइड रोग, हृदय या रक्त विकार, खराब नियंत्रित अस्थमा और संक्रमण गर्भावस्था के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
  • एकाधिक गर्भावस्था गर्भावस्था के जोखिम जुड़वाँ या उच्च क्रम वाली महिलाओं को ले जाने के लिए अधिक होते हैं।
  • गर्भावस्था की जटिलताओं –  गर्भावस्था के दौरान विकसित होने वाली विभिन्न जटिलताएं जोखिम पैदा कर सकती हैं। 
  • जैसे – उदाहरणों में असामान्य प्लेसेंटा स्थिति, गर्भकालीन आयु (भ्रूण वृद्धि प्रतिबंध) और रीसस (आरएच) संवेदीकरण के लिए 10 प्रतिशत से कम भ्रूण की वृद्धि शामिल है। इसके अलावा संभावित गंभीर स्थिति तब हो सकती है जब आपका रक्त समूह आरएच नकारात्मक हो और आपके बच्चे का रक्त समूह आरएच हो यानि सकारात्मक।(और पढ़े – गर्भावस्था में पैर की सूजन की समस्या)

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के संकेत व लक्षण ? (Sign and Symptoms of High Risk Pregnancy in Hindi)

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामले में लक्षण व संकेत नजर आ सकते हैं।  

  • जैसे – योनि से रक्तस्राव होना। 
  • सिर दर्द होना। 
  • पेट में मरोड़ होना। 
  • योनि स्राव। 
  • भ्रूण की गतिविधि में कमी होना। 
  • दृष्टि में परिवर्तन आना। 

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का निदान ? (Diagnoses of High Risk Pregnancy in Hindi)

  • उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था का निदान अल्ट्रासाउंड द्वारा किया जा सकता है जिसमें बच्चे की छवियों का उत्पादन करने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है और इसके विकास में असामान्यताओं का पता लगाया जा सकता है। 
  • परिवार में आनुवांशिक बीमारियों का इतिहास होने पर एमनियोसेंटेसिस किया जाता है। एमनियोटिक द्रव का एक नमूना लिया जाता है और क्रोमोसोमल विपथन और अन्य जानलेवा बीमारियों के लिए जाँच की जाती है।
  • कोरियोनिक विल्ली नमूनाकरण (सीवीएस) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें नाल से कोशिकाओं की जांच की जाती है और बच्चे में आनुवंशिक विकारों की पहचान करने में मदद कर सकती है। 
  • गर्भनाल रक्त नमूनाकरण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिनमे शिशु में मौजूद संक्रमण और आनुवंशिक स्थितियों का निदान करने के लिए की जाती है। गर्भाशय ग्रीवा की लंबाई को मापने के द्वारा श्रम में जटिलताओं का निदान किया जा सकता है।

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का इलाज ? (Treatments for High Risk Pregnancy in Hindi)

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी कई कारणों से होती है। यह आवश्यक है कि बच्चे या माँ को होने वाली किसी भी समस्या को रोकने के लिए माँ अत्यधिक सावधानी बरतती है। सभी कारक गर्भावस्था को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित करते हैं और इसलिए, प्रत्येक को अलग तरीके से इलाज करने की आवश्यकता होती है।कुछ मामलो में जोखिम के आधार पर सी सेक्शन किया जा सकता है और कुछ समस्या को रोकने हेतु कुछ दवाइया की खुराक दे सकते हैं। (और पढ़े – सी सेक्शन क्या है)

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी से बचाव ? (Prevention of High Risk Pregnancy in Hindi)

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी से बचाव करने के लिए निम्न उपाय अपना सकते हैं।  

  • गर्भावस्था के समय धूम्रपान व शराब की लत से बचें। 
  • गर्भावस्था के दौरान तनाव से दूरी बनाये। (और पढ़े – गर्भावस्था में तनाव की समस्या)
  • सुबह थोड़ा चलना फिरना चाहिए, लेकिन कोरोना महामारी का समय है तो मास्क का उपयोग करना न भूले। 
  • गर्भावस्था में योगा करे, किंतु योगा ट्रेनर के निर्देश के अनुसार। 
  • अपने आहार में फल, हरी सब्जिया, दाल, रोटी, सलाह को शामिल करें। 
  • गर्भावस्था के समय महिलाओं को आराम करना चाहिए। 
  • जितना हो सके बाहर के तले, भुने, मसाले वाले भोजन से बचें। 

हमें आशा है की आपके प्रश्न हाई रिस्क प्रेग्नेंसी क्या हैं ? का उत्तर इस लेख के माध्यम से दे पाएं। 

अगर आपको हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के बारे में अधिक जानकारी चाहिए, तो स्त्री विशेषज्ञ (Gynecologist/Obstetrician) से संपर्क कर सकते हैं। 

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है।


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