योनि में गांठ के कारण व उपाय क्या है। Vaginal Cyst in Hindi

Login to Health दिसम्बर 6, 2019 Womens Health 7321 Views

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Vaginal Cyst Meaning in Hindi

योनि में खुजली व जलन की समस्या महिलाओं में आम बात होती है। लेकिन योनि में सिस्ट फुंसी या गांठ बहुत कष्टदायक नहीं होता है। इस गांठ में हवा व अन्य तरल पदार्थ भरे हुए होते है जो अल्सर की तरह नहीं होता है। हालांकि यह गांठ योनि के अलावा शरीर में कही भी हो सकता है। अधिकतर छोटे बच्चे के योनि में फुंसी व गांठ की समस्या होती है। कुछ मामले में योनि में चोट लगने से तरल पदार्थ का जमाव होता है। आपके दिमाग में बहुत से सवाल आ रहे होंगे। योनि में फुंसी सिस्ट क्यों होता है। चलिए आपके इन सवालो का जवाब देने के लिए लेख में विस्तार से Vaginal Cyst योनि में गांठ के प्रकार, कारण, लक्षण व उपचार के बारे में बताया गया है।

  • योनि में गांठ के प्रकार ? (Types of Vaginal Cyst in Hindi)
  • योनि में गांठ के लक्षण क्या है ? (Symptoms of Vaginal Cyst in Hindi)
  • योनि में गांठ के कारण क्या है ? (Causes of Vaginal Cyst in Hindi.
  • योनि में गांठ का उपचार क्या है ? (Treatments for Vaginal Cyst in Hindi)

योनि में गांठ के प्रकार ? (Types of Vaginal Cyst in Hindi)

योनि में गांठ के अनेक प्रकार से हो सकते है। जिसके बारे में निचे बताया गया है।

  • मुलेरियन सिस्ट्स – यह योनि संक्रमण का सबसे आम प्रकार है जो छोटे फोड़े-फुंसी के रूप में आता है। ये योनि के दीवारों में कभी भी बन सकती है। जो दिखाई नहीं देती मगर महसूस कर सकते है।
  • गार्टनर डक्ट सिस्ट्स – इस प्रकार में जब बच्चा जन्म लेता है उसके बाद उसकी नलिकाएं गायब नहीं होती है। जो जन्म के बाद होनी चाहिए तो इन बची हुई नलिकाओं में द्रव भर जाता है जो संक्रमण करता है।
  • इन्क्लूजन सिस्ट्स – यह योनि के निचले दिवार को प्रभावित करती है। यह बहुत छोटी होती है इस कारण इसका पता लगा पाना बहुत कठिन होता है। ये आमतौर पर बच्चे करे जन्म के बाद लगी चोट से होता है।
  • बर्थोलिन ग्रंथि की सिस्ट्स – इस प्रकार में अल्सर द्रव से भरा होता है ये बर्थोलिन ग्रंथियों पर बनता है। जो विजिनोल के ओपनिंग के दोनों ओर होती है। ये ग्रंथिया योनि में चिकनापन बनाती है।

योनि में गांठ के लक्षण क्या है ? (Symptoms of Vaginal Cyst in Hindi)

  • योनि में गांठ के लक्षण महिलाओं में नजर नहीं आते है लेकिन महिलाये महसूस कर सकती है। फुंसी आकार के हिसाब से लक्षण महसूस होता भी सकता है या नहीं भी हो सकता है।
  • महिलाओं को साल में एक बार स्त्रीविशेषज्ञ से जांच जरूर करवाना चाहिए। सिस्ट या फुंसी आकार के हिसाब से बढ़ते है और दर्द का अनुभव देते है।
  • अधिकतर महिलाओं में सिस्ट अधिक दर्द व पीड़ा नहीं देता है बल्कि सेक्स या संभोग करना असुविधा उत्पन्न कर सकता है। इसके अलावा व्यायाम करने, पैदल चलना, टैम्पोन के दौरान परेशानी आ सकती है। अगर योनि में सिस्ट संक्रमण फ़ैल जाता है तो दर्द की संभावना अधिक हो सकती है। त्वचा में संक्रमण अन्य रोग का कारण हो सकता है। अक्सर वेजिनल संक्रमण में फोड़ा ऊपर की ओर निकला होता है।

योनि में गांठ के कारण क्या है ? (Causes of Vaginal Cyst in Hindi)

योनि में गांठ के निम्नलिखित कारण हो सकते है।

  • योनि में अगर छोटी फुंसी होती है तो वह अपने आप ठीक हो जाता है। इसके अलावा योनि में फुंसी अक्सर तब होती है जब अन्य तरल पदार्थ भरने से जम जाती है। योनि में संक्रमण फ़ैलाने का कारण बनती है।
  • महिलाओं को आम तौर पर संक्रमण के कारण खुजली की समस्या होता है। जो बैक्टीरियल संक्रमण के बढ़ने का मुख्य कारण होता है।
  • नार्मल डिलीवरी के बाद महिलाओं की योनि में चीरा लगाते है। उसकी ठीक से देखभाल न होने के कारण सिस्ट संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा सर्जरी हुई जगहों का ध्यान नहीं देने पर संक्रमण होने लगता है।
  • इंफ्ल्यूएंजा सिस्ट योनि की दीवारों को चोट लगाने का कारण बनती है।
  • बर्थेलिन ग्रंथि की सिस्ट तब होती है जब बर्थेलिन की ग्रंथि बंद हो जाती है। जैसे त्वचा पर आवरण पड़ जाना और इसमें द्रव भर जाना इससे संक्रमण की संख्या बढ़ जाती है। हालांकि बैक्टीरिया मनुष्य की आंतो में अधिक पाया जाता है। (और पढ़े -नीम के फायदे संक्रमण रोकने में)

योनि में गांठ का उपचार क्या है ? (Treatments for Vaginal Cyst in Hindi)

बहुत से मामलो में उपचार जरुरत नहीं होती है यह अपने आप ठीक हो जाता है। कुछ मामलो योनि में गांठ का उपचार करने पहले चिकिस्तक लक्षणो के बारे में जानकारी लगे ताकि इसके आधार पर सही उपचार किया जा सके। चलिए आपको उपचार के बारे बताते है।

  • चिकिस्तक आमतौर पर संक्रमण को कम करने के लिए कुछ एंटीबायोटिक दवाओं की खुराक देते है जो यौन संक्रमण को दूर करता है। अगर आपके योनि में किसी तरह का फोड़ा हुआ है तो उसे सुखाने के लिए दवा देते है। इसके अलावा फोड़ा सूखा हुआ है तो एंटीबायोटिक नहीं देते है।
  • महिला को संक्रमण होने पर दो से तीन बार थोड़े गर्म पानी से स्नान करने की सलाह देते है। ऐसा करने पर सिस्ट संक्रमण आसानी से कम हो जाता है। दवा की जरुरत नहीं पड़ती है। अगर किसी महिला को मार्सुपियालिजेशन की समस्या है तो चिकिस्तक से उपचार करवाना चाहिए क्योंकि यह समस्या बार -बार हो सकती है।
  • बर्थेलिन अल्सर को हटाने की प्रक्रिया बहुत कम की जाती है ऐसा सिर्फ बहुत अधिक गंभीर मामलो में किया जाता है।
  • संक्रमित या बड़ी सिस्ट को बाहर निकालने के लिए चिकिस्तक सर्जरी करवाने की सुझाव दे सकते है। यह खासतौर पर एनेस्थीसिया या सिडेशन की क्रिया के माध्यम से किया जाता है। इस सर्जरी में चिकिस्तक एक छोटा सा चीरा सिस्ट में लगाते है जिसे बाद में सूखा दिया जाता है। इसके बाद चीरे में एक छोटी ट्यूब डालते है ,यह खुले रहकर सूखने व ठीक होने में मदद करती है।

अगर योनि से जुडी किसी भी तरह की समस्या हो रही है तो किसी अच्छे स्त्री विशेषज्ञ (Gynecologist) से संपर्क करें।

हमारा उद्देश्य केवल आपको लेख के माध्यम से जानकारी देना है। हम आपको किसी तरह दवा, उपचार की सलाह नहीं देते है। आपको अच्छी सलाह केवल एक चिकिस्तक ही दे सकता है। क्योंकि उनसे अच्छा दूसरा कोई नहीं होता है।